रविवार, 8 नवंबर 2026 / आश्विन कृष्ण (बहुल) चतुर्दशी (दक्षिण भारतीय अमांत पंचांग; उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग में यही कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी है)

इस दिन श्रीकृष्ण-सत्यभामा की पूजा, यम तर्पण और अभ्यंग स्नान मुख्य कर्तव्य हैं।

तैलाभ्यंग स्नान का महत्व (धर्मसिंधु)

"तैले लक्ष्मीर्जले गंगा दीपावल्याश्चतुर्दशी । प्रातःस्नानं तु यः कुर्यात् यमलोकं न पश्यति ॥"

आश्विन चतुर्दशी की भोर में तिल के तेल से तैलाभ्यंग स्नान करने से यम-पीड़ा और नरक-पीड़ा दूर होती है। इसलिए सूर्योदय से पहले ही स्नान करें। नित्यकर्म के बाद यम तर्पण करें।

यम तर्पण

धर्मसिंधु निर्देश देता है कि चतुर्दशी की सुबह तैलाभ्यंग के बाद यमधर्मराज की शांति और नरक-पीड़ा से मुक्ति के लिए 14 नामों से तिल-जल की तिलांजलि दी जाए।

निर्णयसिंधु, स्मृति मुक्तावली: नरक चतुर्दशी प्रयुक्त यम तर्पण

संकल्प: आचम्य प्रीत्यर्थं यमप्रीतये अपमृत्युपरिहारद्वारा दीर्घायुष्यसिद्ध्यर्थं नरकचतुर्दशी महापर्वणि पुण्यकाले यमतर्पणं करिष्ये।

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कूर्चासने दक्षिणाभिमुखो भूत्वा प्राचीनावीती (कुश के आसन पर दक्षिण मुख होकर, यज्ञोपवीत को प्राचीनावीत करके):

  1. ॐ यमाय नमः – यमं तर्पयामि
  2. ॐ धर्मराजाय नमः – धर्मराजं तर्पयामि
  3. ॐ मृत्यवे नमः – मृत्युं तर्पयामि
  4. ॐ अन्तकाय नमः – अन्तकं तर्पयामि
  5. ॐ वैवस्वताय नमः – वैवस्वतं तर्पयामि
  6. ॐ कालाय नमः – कालं तर्पयामि
  7. ॐ सर्वभूतक्षयाय नमः – सर्वभूतक्षयं तर्पयामि
  8. ॐ औदुम्बराय नमः – औदुम्बरं तर्पयामि
  9. ॐ दध्नाय नमः – दध्नं तर्पयामि
  10. ॐ नीलाय नमः – नीलं तर्पयामि
  11. ॐ परमेष्ठिने नमः – परमेष्ठिनं तर्पयामि
  12. ॐ वृकोदराय नमः – वृकोदरं तर्पयामि
  13. ॐ चित्राय नमः – चित्रं तर्पयामि
  14. ॐ चित्रगुप्ताय नमः – चित्रगुप्तं तर्पयामि

सव्यं यथास्थानं उपविश्य (फिर यज्ञोपवीत को सव्य स्थिति में करें)।

चौदह नामों का उच्चारण करते हुए प्रत्येक नाम से तीन तिलांजलि, कुल 42 तर्पण यम को अर्पित करें।

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यम तर्पण श्लोक

यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च । वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च ॥

औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने । वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय ते नमः ॥

अनेन यमतर्पणेन भगवान् सर्वात्मकः श्रीपरमेश्वरः सुप्रीणातु । श्रीपरमेश्वरार्पणमस्तु ॥

दिन भर का आचरण

यम की पूजा के बाद उड़द से बने व्यंजन खाए जाते हैं, और सूर्यास्त के बाद द्वार पर दीप जलाए जाते हैं और पटाखे चलाए जाते हैं। पटाखे केवल स्थानीय नियमों में अनुमत समय में और सुरक्षित ढंग से ही चलाएं।

ध्यान दें: तर्पण-विधि पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है; संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

🌷 ॐ यमाय नमः 🌷

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