पंचांग 8 नवंबर 2026 (रविवार): दीवाली, लक्ष्मी पूजा, नरक चतुर्दशी, काली पूजा और चोपड़ा पूजा, तिथि और पूजा विधि
रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीवाली है। हैदराबाद में सूर्योदय के समय चतुर्दशी 11:27 AM तक रहती है, इसलिए दिन की शुरुआत नरक चतुर्दशी के तेल स्नान और तमिल दीपावली से होती है, और शाम को अमावस्या रहती है, जिसमें लक्ष्मी पूजा, बंगाल में काली पूजा, गुजरात में चोपड़ा और शारदा पूजा तथा केदार गौरी व्रत होते हैं। यहाँ पूरा पंचांग, हर पर्व का सार और हमारी विस्तृत दीवाली गाइड के लिंक दिए गए हैं।

रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीवाली है। हैदराबाद में सूर्योदय के समय चतुर्दशी 11:27 AM तक रहती है, इसलिए दिन की शुरुआत नरक चतुर्दशी के तेल स्नान और तमिल दीपावली से होती है, और शाम को अमावस्या रहती है, जिसमें लक्ष्मी पूजा, बंगाल में काली पूजा, गुजरात में चोपड़ा और शारदा पूजा तथा केदार गौरी व्रत होते हैं।
संक्षिप्त उत्तर: रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीवाली है। हैदराबाद में चतुर्दशी 11:27 AM तक रहती है (सुबह नरक चतुर्दशी का तेल स्नान और तमिल दीपावली), और अमावस्या फिर शाम को रहती है, जिसमें लक्ष्मी पूजा, काली पूजा, चोपड़ा और शारदा पूजा तथा केदार गौरी व्रत होते हैं। अपने शहर में लक्ष्मी पूजा का समय जानने के लिए हमारी लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026 भारत शहरवार गाइड देखें।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज पूरा हिंदू भारत, और दुनिया भर के हिंदू घर, महीने की सबसे अँधेरी रात में दीप जलाते हैं। सुबह सत्यभामा सहित श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय का स्मरण होता है; शाम को स्वच्छ और जगमगाते घरों में लक्ष्मी जी का स्वागत होता है। इस पृष्ठ पर आज का पंचांग और हर पर्व की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। पूरी कथा, अनुष्ठान और क्षेत्रीय परंपराओं के लिए हमारी दीवाली 2026 संपूर्ण 5-दिवसीय गाइड से शुरुआत करें।
आज का पंचांग (हैदराबाद)
| पंचांग तत्व | हैदराबाद (IST) |
|---|---|
| तिथि/दिनांक | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| चंद्र मास | आश्विन (अमांत, तेलुगु और दक्षिण भारतीय पंचांग); कार्तिक (पूर्णिमांत, उत्तर भारत) |
| पक्ष | कृष्ण (घटता चंद्रमा) |
| तिथि | चतुर्दशी 11:27 AM तक, फिर अमावस्या |
| नक्षत्र | स्वाति, पूरी रात (अगले दिन तक जारी) |
| योग | आयुष्मान 9 नवंबर को 03:03 AM तक |
| करण | शकुनि |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:18 AM / 05:42 PM |
| चंद्रोदय / चंद्रास्त | 06:13 AM / 04:49 PM |
| राहु काल, अभिजित और अन्य मुहूर्त | यहाँ शामिल नहीं; कृपया स्थानीय पंचांग देखें |
स्रोत: हैदराबाद के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग, IST। स्वाति नक्षत्र पूरी रात रहता है और 9 नवंबर को 07:24 AM पर समाप्त होता है। योग आयुष्मान, अर्थात "दीर्घायु", 9 नवंबर को 03:03 AM तक है। इस पृष्ठ पर हम लक्ष्मी पूजा मुहूर्त या राहु काल नहीं दे रहे हैं; कृपया शहरवार गाइड या स्थानीय पंचांग देखें।
आज के पर्व एक नज़र में
| कब | पर्व | कहाँ अधिक मनाया जाता है | विस्तृत गाइड |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय से पहले | नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) | दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गोवा और कई अन्य क्षेत्र | नरक चतुर्दशी 2026 |
| सुबह | तमिल दीपावली | तमिलनाडु और दुनिया भर के तमिल घर | तमिलनाडु में दीवाली |
| शाम | लक्ष्मी पूजा, दीपमालिका (दीपों की पंक्तियाँ) | पूरा भारत | लक्ष्मी पूजा विधि 2026 |
| शाम | चोपड़ा पूजा और शारदा पूजा | गुजरात; व्यापारी परिवार | चोपड़ा पूजा 2026 |
| शाम | केदार गौरी व्रत | तमिलनाडु, कर्नाटक | केदार गौरी व्रत 2026 |
| रात | काली पूजा | पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा | काली पूजा 2026 |
धार्मिक महत्व
नरक चतुर्दशी: सुबह सत्यभामा के साथ श्रीकृष्ण द्वारा असुरराज नरकासुर के वध और उसके द्वारा बंदी बनाई गई स्त्रियों की मुक्ति का स्मरण किया जाता है। भोर से पहले का तेल स्नान उस अंधकार को धो डालने का प्रतीक है जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है। तेलुगु राज्यों में नरक चतुर्दशी और शाम की दीपावली पूजा मिलकर मुख्य पर्व बनती हैं; हमारी तेलुगु दीपावली 2026 गाइड देखें।
लक्ष्मी पूजा: दीवाली की अमावस्या की शाम को समृद्धि और मंगल की देवी लक्ष्मी की, विघ्नहर्ता गणेश के साथ पूजा की जाती है। उत्तर भारत में इसे श्रीराम के अयोध्या लौटने की रात के रूप में भी याद किया जाता है। द्रिक पंचांग में आज दी गई कमला जयंती, दस महाविद्याओं में से एक, कमला रूप में लक्ष्मी का सम्मान करती है।
काली पूजा और दर्श अमावस्या: बंगाल में यही अमावस्या की रात माँ काली की होती है, जिनकी पूजा मध्यरात्रि में होती है। दर्श अमावस्या अमावस्या के व्रत-अनुष्ठान का नाम है, जिस दिन कई परिवार अपने पितरों को भी याद करते हैं।
पूजा विधि: घर पर लक्ष्मी पूजा
- भोर से पहले (वैकल्पिक, क्षेत्रीय): नरक चतुर्दशी के लिए तेल मालिश और स्नान, नए या स्वच्छ वस्त्र, और द्वार पर एक दीपक।
- दोपहर: पूजा स्थान साफ़ करें, रंगोली बनाएँ, लाल या पीले वस्त्र पर लक्ष्मी और गणेश को विराजित करें और जल से भरा कलश रखें।
- शाम (आवश्यक): अपने शहर के मुहूर्त में मुख्य घी का दीपक जलाएँ, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल, मिठाई और फल अर्पित करें, नीचे दिया मंत्र जपें और आरती करें।
- दीपमालिका: प्रवेश द्वार, खिड़कियों, बालकनी, तुलसी के पौधे और रसोई में दीयों की पंक्तियाँ जलाएँ।
- वैकल्पिक परंपराएँ: बही-खातों, सिक्कों या आभूषणों की पूजा; लक्ष्मी अष्टोत्तर का पाठ; जहाँ सुरक्षित हो वहाँ रात भर दीपक जलाए रखना।
सामग्री नहीं है? किसी साफ़ कोने में एक दीपक जलाएँ, उसके पास एक सिक्का या लक्ष्मी जी का चित्र रखें, मंत्र का 108 बार जप करें और जो कुछ आपके पास पहले से है उसके लिए देवी का धन्यवाद करें। हमारी चरण-दर-चरण लक्ष्मी पूजा विधि और लिप्यंतरण सहित महालक्ष्मी आरती में पूरी पूजा दी गई है।
आज का मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः (IAST: oṃ śrī mahālakṣmyai namaḥ)। अर्थ: "ॐ, महान देवी लक्ष्मी को नमन।" शाम की पूजा में श्रद्धा और कृतज्ञता के अर्पण के रूप में इसका 108 बार जप करें; यह तुरंत धन मिलने का वादा नहीं है।
आज आप क्या कर सकते हैं
- यदि आपके परिवार की परंपरा है तो सूर्योदय (हैदराबाद में 06:18 AM) से पहले नरक चतुर्दशी का तेल स्नान करें।
- हमारी भारत शहरवार गाइड में अपने शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त देखें और शाम की योजना उसी के अनुसार बनाएँ।
- 05:42 PM के सूर्यास्त के बाद द्वार, खिड़कियों और तुलसी के पौधे पर दीये जलाएँ।
- बड़ों से मिलें या उन्हें फ़ोन करें और उनका आशीर्वाद लें।
- पड़ोसियों, घरेलू कामगारों और अकेले दीवाली मना रहे किसी भी व्यक्ति के साथ मिठाई बाँटें।
- यदि आप पटाखे जलाते हैं, तो स्थानीय नियमों का पालन करें और पानी व रेत तैयार रखें; शांत, पटाखा-मुक्त दीवाली के बारे में भी सोचें।
- दीयों को पर्दों से दूर रखें और जहाँ बच्चे या पालतू जानवर पहुँच सकें वहाँ उन्हें कभी अकेला न छोड़ें।
परिवारों और बच्चों के लिए
बच्चों को दीयों में तेल भरने, बाती लगाने और किसी बड़े के साथ पहला दीपक जलाने दें। उन्हें श्रीराम के लौटने की या श्रीकृष्ण और नरकासुर की कथा सुनाएँ, और आरती में उन्हें छोटी-सी भूमिका दें। सुझावों के लिए हमारी पर्यावरण-अनुकूल, पटाखा-मुक्त दीवाली गाइड देखें। फुलझड़ियाँ और माचिस केवल बड़ों की निगरानी में ही दें।
विदेश में बसे हिंदू: आज का सूर्योदय, तिथि और नक्षत्र
8 नवंबर 2026 को स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, और स्थानीय सूर्योदय के समय तिथि और नक्षत्र।
| देश | शहर | स्थानीय सूर्योदय | स्थानीय सूर्यास्त | स्थानीय सूर्योदय पर तिथि | स्थानीय सूर्योदय पर नक्षत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| अमेरिका (USA) | न्यूयॉर्क | 6:33 AM | 4:45 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
| ब्रिटेन (UK) | लंदन | 7:04 AM | 4:23 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
| कनाडा | टोरंटो | 7:01 AM | 5:01 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
| ऑस्ट्रेलिया | सिडनी | 5:47 AM | 7:30 PM | कृष्ण चतुर्दशी | चित्रा |
| ब्राज़ील | साओ पाउलो | 5:15 AM | 6:25 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | दुबई | 6:29 AM | 5:35 PM | कृष्ण चतुर्दशी | स्वाति |
| सिंगापुर | सिंगापुर | 6:45 AM | 6:51 PM | कृष्ण चतुर्दशी | चित्रा |
| मलेशिया | कुआलालंपुर | 6:56 AM | 6:57 PM | कृष्ण चतुर्दशी | चित्रा |
| जर्मनी | फ्रैंकफर्ट | 7:24 AM | 4:52 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
| दक्षिण अफ्रीका | डरबन | 4:54 AM | 6:24 PM | कृष्ण चतुर्दशी | स्वाति |
| यूरोप | एम्स्टर्डम | 7:46 AM | 5:00 PM | कृष्ण अमावस्या | स्वाति |
हिंदूटोन (HinduTone) के पंचांग कैलकुलेटर से गणना की गई, द्रिक पंचांग से सत्यापित; विदेश में पर्व की तिथियाँ एक दिन अलग हो सकती हैं — अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें। इस तालिका के सभी समय हर शहर के स्थानीय समय हैं।
विदेश में लक्ष्मी पूजा की गणना स्थानीय सूर्यास्त और आपके स्थान पर अमावस्या से होती है, इसलिए कभी भी भारतीय समय का उपयोग न करें। हमारी देशवार मुहूर्त गाइड देखें: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, UAE, सिंगापुर और यूरोप।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 8 नवंबर 2026 को दीवाली है?
हाँ। भारत में दीवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। अमावस्या 11:27 AM IST पर शुरू होकर पूरी शाम रहती है, और इसी समय लक्ष्मी पूजा की जाती है।
8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?
यह आपके शहर पर निर्भर करता है, क्योंकि इसकी गणना स्थानीय सूर्यास्त और शाम के प्रदोष काल से होती है। अपने शहर के लिए कृपया हमारी लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026 भारत शहरवार गाइड देखें। हैदराबाद में आज सूर्यास्त 05:42 PM पर है।
क्या 2026 में नरक चतुर्दशी और दीवाली एक ही दिन हैं?
हाँ, भारत में। 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी (11:27 AM तक) रहती है, इसलिए नरक चतुर्दशी का भोर से पहले का तेल स्नान आज सुबह है, और शाम को अमावस्या होने से यही लक्ष्मी पूजा का दिन भी है। इसी कारण नरक चतुर्दशी की सुबह मनाई जाने वाली तमिल दीपावली भी आज ही है।
2026 में काली पूजा कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा की मुख्य दीवाली उपासना, काली पूजा, 8 नवंबर 2026 की अमावस्या की रात को है। यह मध्यरात्रि के आसपास की जाती है।
चोपड़ा पूजा और शारदा पूजा क्या हैं?
गुजरात में और गुजराती व मारवाड़ी व्यापारी परिवारों में दीवाली पर नए बही-खातों (चोपड़ा) की लक्ष्मी, गणेश और शारदा (सरस्वती) के साथ पूजा की जाती है, ताकि आने वाले वर्ष में व्यापार ईमानदार और समृद्ध रहे।
केदार गौरी व्रत क्या है?
यह मुख्य रूप से तमिलनाडु और कर्नाटक में रखा जाने वाला व्रत है, जिसे केदार गौरी नोम्बु भी कहते हैं। इसमें दीपावली अमावस्या पर केदारेश्वर रूप में शिव की पार्वती (गौरी) के साथ पूजा होती है। द्रिक पंचांग इसे आज के दिन बताता है।
एक समापन विचार
एक दीपक अपनी लौ खोए बिना दूसरे दीपक को जला देता है। आज रात आप जो प्रकाश जलाएँ, वह किसी और के घर तक भी पहुँचे। शुभ दीपावली।
संपादक की टिप्पणी
संपादक की टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग के समय और पर्व स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। यह गाइड हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग पर आधारित है। कृपया स्थानीय पूजा समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से अवश्य जाँच लें।




