मोदक प्रसिद्ध है, पर एकमात्र नहीं। यदि आप बप्पा को पाँच या दस दिन रखते हैं तो प्रतिदिन भिन्न नैवेद्य चाहिए। यहाँ मोदक के अतिरिक्त दक्षिण व अन्य क्षेत्रों के पारंपरिक नैवेद्य दिए हैं।

नैवेद्य के नियम

  • पकाते समय चखें नहीं — नैवेद्य अपूर्व (पहले न चखा हुआ) होना चाहिए।
  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र में पकाएँ; प्याज-लहसुन वर्जित; ताज़ा ही अर्पित करें।
  • पहले बप्पा को अर्पित करें, फिर परिवार ग्रहण करे।

प्रमुख नैवेद्य

  • मोदक (उकडीचे/तला हुआ) — बप्पा का प्रिय; 21 की संख्या पारंपरिक।
  • उंड्रालु / कुडुमुलु — चावल-रवा के भाप में बने पिंड (तेलुगु परंपरा)।
  • पंचकज्जाय — भुनी चना दाल, गुड़, नारियल, घी, इलायची (बिना पकाए, 5 मिनट)।
  • पुलिहोरा (इमली चावल), सुंदल (चना/मूँग), बेसन व नारियल लड्डू, सेमिया पायसम।
  • पंचामृत (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर) — गणेश जी को तुलसी न डालें।

विदेश में सामग्री के विकल्प

  • ताज़ा नारियल → फ्रोज़न कद्दूकस नारियल (या गुनगुने दूध में भिगोया सूखा नारियल)।
  • गुड़ → डार्क मस्कोवाडो/पानेला।
  • चावल रवा → सोना मसूरी को सूखा दरदरा पीस लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदक के अलावा गणेश जी को क्या चढ़ाएँ?

उंड्रालु, कुडुमुलु, पुलिहोरा, पंचकज्जाय, सुंदल, बेसन/नारियल लड्डू, पायसम और पंचामृत।

क्या पकाते समय नैवेद्य चख सकते हैं?

नहीं — नैवेद्य अर्पण से पहले चखना वर्जित है।

संबंधित लेख — गणेश चतुर्थी 2026 सम्पूर्ण गाइड