अधिकांश लोग गणेश जी की एक कथा जानते हैं — गजमुख की। पर कथाएँ सैकड़ों हैं। उन्होंने महाभारत लिखी, बिना कमरे से निकले भाई से विश्व-परिक्रमा की दौड़ जीती, कुबेर के अहंकार को मुट्ठी भर चावल से तोड़ा, और कर्नाटक के गोकर्ण में रावण को रोका। उनके नाम दो पुराण हैं — गणेश पुराण और मुद्गल पुराण।

गजमुख कैसे मिला — चार वर्णन

  • पार्वती ने बनाया (शिव पुराण): द्वार-रक्षक हेतु पुत्र बनाया; शिव को रोकने पर संघर्ष में शीश कट गया, फिर शिव ने गज-मस्तक लगाकर पुनर्जीवित किया।
  • कुछ वर्णनों में शिव या दोनों ने बनाया, शीश-छेदन के बिना।
  • ब्रह्मवैवर्त पुराण: शनि की दृष्टि से शिशु का मस्तक नष्ट हुआ, विष्णु गज-मस्तक लाए।

गजमुख निश्चित है; वह कैसे आया — इसमें परंपराओं ने सभी वर्णन सहेजे हैं।

टूटा दाँत — तीन कथाएँ

एकदंत के तीन कारण: (1) महाभारत लिखते समय लेखनी टूटने पर उन्होंने अपना दाँत तोड़कर लिखना जारी रखा — इसीलिए वे लेखकों-विद्यार्थियों के संरक्षक हैं; (2) परशुराम के परशु (जो शिव का दिया था) को उन्होंने पिता का शस्त्र मानकर रोका नहीं; (3) चंद्रमा के उपहास पर क्रोध में दाँत तोड़कर फेंका।

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विश्व-परिक्रमा की दौड़

नारद जी एक अविभाज्य फल लाए; शिव-पार्वती ने प्रतियोगिता रखी — जो पहले तीन बार विश्व की परिक्रमा करे। कार्तिकेय मोर पर निकल पड़े; गणेश जी ने माता-पिता की तीन परिक्रमा कर कहा — "मेरे माता-पिता ही संसार हैं।" फल उन्हें मिला। यह बुद्धि की कथा है।

प्रथम पूज्य क्यों

इंद्र-निर्मित विघ्नासुर हर यज्ञ नष्ट करने लगा; गणेश जी ने उसे पराजित किया और यह शर्त पर क्षमा दी कि वह वहाँ न जाए जहाँ गणेश पूजित हों। बदले में उसने माँगा कि उसका नाम गणेश से पहले लिया जाए — इसीलिए "विघ्नहर्ता", "विघ्नेश्वर"। विघ्न मिटता नहीं, बाँध दिया जाता है।

गोकर्ण में रावण, कुबेर का भोज, मूषक-वाहन

गोकर्ण: रावण को शिव से आत्मलिंग मिला इस शर्त पर कि मार्ग में भूमि पर न रखे; गणेश जी बालक रूप में आए, तीन बार पुकारकर लिंग रख दिया — वहीं महाबलेश्वर स्थापित हुआ। कुबेर का भोज: गणेश जी ने सारा वैभव खा लिया, पर शिव द्वारा दी मुट्ठी भर भुने चावल से तृप्त हुए — विनम्रता का पाठ। मूषक: गंधर्व क्रौंच शाप से मूषक बना, गणेश जी ने उसे नष्ट न कर वाहन बनाया।

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तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती

ब्रह्मवैवर्त पुराण अनुसार तुलसी-गणेश के परस्पर शाप के कारण गणेश जी को सामान्यतः तुलसी नहीं चढ़ती। एकमात्र अपवाद — चतुर्थी की एकविंशति पत्री पूजा में एक तुलसी पत्र (कुछ परिवार इसे भी छोड़ देते हैं)।

मुद्गल पुराण के आठ अवतार

वक्रतुण्ड (मत्सर), एकदंत (मद), महोदर (मोह), गजानन (लोभ), लंबोदर (क्रोध), विकट (काम), विघ्नराज (ममता), धूम्रवर्ण (अभिमान) — प्रत्येक एक भीतरी दोष का नाश करता है।

अष्टविनायक

महाराष्ट्र के आठ स्वयंभू क्षेत्र — मोरगाँव (मयूरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लालेश्वर), महड (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणि), लेण्याद्रि (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर), रांजणगाँव (महागणपति)। यात्रा मोरगाँव से आरंभ होकर मोरगाँव पर पूर्ण होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश जी को गजमुख कैसे मिला?

शिव पुराण अनुसार पार्वती द्वारा निर्मित बालक का शीश शिव से संघर्ष में कटा, तब गज-मस्तक लगाया गया; ब्रह्मवैवर्त पुराण इसे शनि की दृष्टि से जोड़ता है।

गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ती?

तुलसी-गणेश के परस्पर शाप के कारण; एकमात्र अपवाद 21-पत्री पूजा का एक तुलसी पत्र है।

गणेश जी के आठ अवतार कौन से हैं?

वक्रतुण्ड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नराज और धूम्रवर्ण — मुद्गल पुराण अनुसार।

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