सुब्रह्मण्य षष्ठी 2026: तिथि, कार्तिकेय, व्रत व मंत्र
सुब्रह्मण्य षष्ठी (चम्पा षष्ठी) 2026 (~दिसंबर मध्य-अंत): कार्तिकेय/मुरुगन — महत्व, सर्प संबंध, नाग/कुज दोष, व्रत, मंत्र व प्रवासी गाइड।

सुब्रह्मण्य षष्ठी (चम्पा षष्ठी) 2026 (~दिसंबर मध्य-अंत): कार्तिकेय/मुरुगन — महत्व, सर्प संबंध, नाग/कुज दोष, व्रत, मंत्र व प्रवासी गाइड।
सुब्रह्मण्य षष्ठी भगवान सुब्रह्मण्य का सम्मान करती है — कार्तिकेय, स्कंद, मुरुगन — शिव के तेजस्वी पुत्र व देव-सेनापति। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष षष्ठी को, कार्तिक मास 2026 के बाद, लगभग दिसंबर 2026 मध्य-अंत को आती है।
सुब्रह्मण्य षष्ठी 2026 तिथि
- तिथि: ~दिसंबर 2026 मध्य-अंत (मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी / चम्पा षष्ठी) — स्थानीय पुष्टि करें
- टिप्पणी: तमिल स्कंद षष्ठी (तिरुचेंदूर सूरसंहारम) ऐप्पसि मास में पूर्व
सुब्रह्मण्य कौन हैं
सुब्रह्मण्य अनेक नामों से — कार्तिकेय, स्कंद, मुरुगन, षण्मुख (छह मुख), कुमार स्वामी, शरवणभव। शिव की अग्नि से जन्मे व छह कृत्तिका तारों द्वारा पालित, वे देव-सेनापति बने व तारकासुर का वध कर धर्म की पुनर्स्थापना की।
सुब्रह्मण्य व सर्प
दक्षिण में सुब्रह्मण्य की विशेषकर नाग (सर्प) रूप में — कुक्के सुब्रह्मण्य जैसे क्षेत्रों में — पूजा होती है। इसीलिए सुब्रह्मण्य षष्ठी व नागुल चविति दोनों नाग दोष व कुज (मंगल) दोष निवारण व संतान-कल्याण हेतु आराधित हैं।
व्रत व पूजा विधि
- षष्ठी उपवास; स्नान व संकल्प।
- अभिषेक, पुष्प व दीप सहित सुब्रह्मण्य पूजा; नैवेद्य।
- संभव हो तो मुरुगन/सुब्रह्मण्य मंदिर दर्शन।
- ॐ शरवणभवाय नमः व सुब्रह्मण्य स्तुति।
मंत्र
सुब्रह्मण्य: ॐ शरवणभवाय नमः · oṃ śaravaṇabhavāya namaḥ; ॐ सुब्रह्मण्याय नमः।
प्रवासी कैसे मनाते हैं
यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, यूएई व जर्मनी में मुरुगन व सुब्रह्मण्य मंदिर विशेष अभिषेक व षष्ठी कार्यक्रम करते हैं; घर पर उपवास व ॐ शरवणभवाय नमः।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुब्रह्मण्य षष्ठी 2026 कब है?
सुब्रह्मण्य षष्ठी (चम्पा षष्ठी) कार्तिक के बाद मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष षष्ठी को — लगभग दिसंबर 2026 मध्य-अंत; स्थानीय पुष्टि करें। (तमिल स्कंद षष्ठी / सूरसंहारम ऐप्पसि में पूर्व।)
सुब्रह्मण्य कौन हैं?
सुब्रह्मण्य — कार्तिकेय, स्कंद, मुरुगन, षण्मुख, कुमार स्वामी — शिव-पार्वती के पुत्र, देव-सेनापति व तारकासुर-संहारक।
सर्पों से संबंध क्यों?
दक्षिण में सुब्रह्मण्य की नाग (सर्प) रूप में पूजा होती है; सुब्रह्मण्य षष्ठी व नागुल चविति दोनों इस अंश का सम्मान करते हैं, नाग/कुज दोष निवारण हेतु।
यह दिन कैसे मनाते हैं?
षष्ठी उपवास, सुब्रह्मण्य पूजा, अभिषेक, मुरुगन/सुब्रह्मण्य मंदिर दर्शन व ॐ शरवणभवाय नमः।
मुख्य बिंदु
- सुब्रह्मण्य षष्ठी 2026: ~दिसंबर मध्य-अंत (मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी)।
- कार्तिकेय/मुरुगन, तारकासुर-संहारक।
- नाग व कुज दोष निवारण; ॐ शरवणभवाय नमः।
देखें: कार्तिक मास 2026, नागुल चविति 2026 व कार्तिक मंत्र।



