वाल्मीकि जयंती महर्षि वाल्मीकि की जन्म वर्षगांठ — आदि कवि (पहले कवि) और वाल्मीकि रामायण के लेखक — को मनाती है।

2026 में, वाल्मीकि जयंती सोमवार, 5 अक्टूबर (अश्विन शुक्ल पूर्णिमा — शरद पूर्णिमा भी) को है। डाकू से महान ऋषि बनने की उनकी कहानी हिंदू परंपरा की सबसे प्रेरक है।

परिवर्तन कथा — रत्नाकर से वाल्मीकि

रत्नाकर एक डाकू थे जो वनों में यात्रियों को मारकर लूटते थे। एक दिन सागे नारद ने उनसे पूछा: "क्या आपका परिवार आपके पाप के साथ साझा करेगा?"

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हैरान, रत्नाकर ने अपनी पत्नी, माता-पिता और बच्चों से पूछा। प्रत्येक ने कहा: "हम आपके काम से लाभ उठाते हैं, पर पाप अकेले आपका है।"

सागे नारद ने उन्हें मंत्र दिया: "मारा" (मृत्यु — जो उच्चारण में आसानी से "राम" बन जाता है)।

रत्नाकर ने सहस्र वर्षों तक ध्यान किया। श्वेत चींटी टीले (वाल्मीक) उनके पूरे शरीर पर बने। नारद ने उन्हें वाल्मीकि नाम दिया।

रामायण कैसे रचा गया

एक दिन वाल्मीकि ने देखा कि एक शिकारी ने मिलने वाले क्रौंच पक्षियों में से एक को मार डाला। मादा क्रौंच ने दुख से रोई। शोक से भर वाल्मीकि ने दुनिया का पहला पद्य रच डाला:

"मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः"

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ब्रह्मा ने प्रकट होकर कहा: "इस मीटर में राम की कहानी रचो।" वाल्मीकि ने रामायण की 24,000 शलोकें रचीं।

वाल्मीकि जयंती पूजा विधि घर पर

  1. सूर्योदय से पहले स्नान।
  2. महर्षि वाल्मीकि की चित्र/मूर्ति के साथ वेदी।
  3. फूल, चंदन, कुमकुम, अक्षत अर्पित करें।
  4. फल, मिठाई, खीर अर्पित करें।
  5. वाल्मीकि रामायण का कम से कम एक अध्याय पढ़ें।
  6. मंत्र: "ॐ श्री रामाय नमः" + "ॐ वाल्मीकाये नमः" 108 बार।
  7. दान करें: पुस्तकें, भोजन, धन।

वाल्मीकि मंत्र

वाल्मीकि प्रणाम मंत्र: ॐ वाल्मीकये नमः

वाल्मीकि गायत्री मंत्र: ॐ वाल्मीकाय विद्महे आदिकवये धीमहि । तन्नो वाल्मीकः प्रचोदयात् ॥

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