केदारेश्वर व्रत केदारेश्वर रूप में शिव व गौरी देवी को समर्पित प्रिय व्रत है, जिसे कार्तिक मास 2026 के आरंभ की दीपावली के आसपास स्त्रियाँ रखती हैं — लगभग नवंबर 2026 आरंभ-मध्य। दांपत्य सुख व समृद्धि हेतु।

केदारेश्वर व्रत 2026 तिथि

  • तिथि: ~नवंबर 2026 आरंभ-मध्य (दीपावली / कार्तिक आरंभ अमावस्या) — स्थानीय पुष्टि करें
  • अन्य नाम: केदार गौरी व्रत

महत्व

यह व्रत शिव-पार्वती को संयुक्त रूप में — प्रायः अर्धनारीश्वर रूप में — पूजता है, गृहस्थ दांपत्य का दिव्य आदर्श। आचरण से सौभाग्य, पारिवारिक कल्याण व समृद्धि की पुनर्प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है।

कथा व परंपरा

परंपरा है कि दरिद्रता में पड़ी भक्त ने श्रद्धा से केदारेश्वर व्रत रखकर समृद्धि पुनः पाई, व पार्वती ने स्वयं शिव के अर्धभाग में मिलने हेतु व्रत किया। 21 गाँठों का तोरम व 21 अर्पण पूर्णता दर्शाते हैं।

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व्रत व पूजा विधि

  1. स्नान व संकल्प; 21 गाँठों का तोरम तैयार करें।
  2. प्रत्येक का 21, दीप व नैवेद्य सहित केदारेश्वर–गौरी पूजा।
  3. परंपरा हो तो 21 दिन रखकर उद्यापन।
  4. ॐ नमः शिवाय; भक्ति से तोरम बाँधें।

मंत्र

शिव: ॐ नमः शिवाय · oṃ namaḥ śivāya।

प्रवासी कैसे मनाते हैं

यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में तेलुगु व हिंदू परिवार घर पर तोरम व शिव–गौरी पूजा सहित केदारेश्वर व्रत रखते हैं; मंदिर उद्यापन व पूजा-सामग्री देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केदारेश्वर व्रत 2026 कब है?

केदारेश्वर (केदार गौरी) व्रत दीपावली के आसपास, कार्तिक आरंभ की अमावस्या को — लगभग नवंबर 2026 आरंभ-मध्य; पंचांग से पुष्टि करें।

किनकी पूजा होती है?

केदारेश्वर रूप में शिव, गौरी (पार्वती) सहित — प्रायः अर्धनारीश्वर रूप में।

21 संख्या क्यों?

व्रत में 21 — 21 गाँठों का तोरम, प्रत्येक का 21 — पूर्णता का प्रतीक; अनेक 21 दिन रखकर उद्यापन करते हैं।

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किसके लिए?

दांपत्य सुख (सौभाग्य), पारिवारिक कल्याण व समृद्धि — व्रत से समृद्धि पुनः पाने वाली भक्त की कथा से।

मुख्य बिंदु

  • केदारेश्वर व्रत 2026: ~नवंबर आरंभ-मध्य (दीपावली/कार्तिक आरंभ)।
  • शिव–गौरी (अर्धनारीश्वर) — सौभाग्य व समृद्धि।
  • 21 गाँठों का तोरम; 21 दिन, उद्यापन; ॐ नमः शिवाय।

देखें: कार्तिक मास 2026, दीपावली 2026कार्तिक सोमवार 2026