कार्तिक दीपों जितना ही जप का मास है। शिव व विष्णु दोनों को प्रिय होने से, कार्तिक मास 2026 मास भर ये मंत्र आपके साथ रहें।

शिव मंत्र

पंचाक्षरी: ॐ नमः शिवाय · oṃ namaḥ śivāya

महामृत्युंजय: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् · उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।

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कार्तिक सोमवार को दीप पर बिल्व-पत्र सहित अर्पित करें।

विष्णु मंत्र

अष्टाक्षरी: ॐ नमो नारायणाय · oṃ namo nārāyaṇāya

द्वादशाक्षरी: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय · oṃ namo bhagavate vāsudevāya

कार्तिक एकादशी को व मास भर विष्णु-कृपा हेतु जपें।

दामोदर प्रार्थना

कार्तिक दामोदर मास है। भक्त नित्य दामोदराष्टकम पढ़ते हैं — माता यशोदा की रस्सी से बँधे कृष्ण को आठ श्लोकों का स्तोत्र — "नमामीश्वरं सच्चिदानन्द रूपं" से आरंभ। सरल प्रार्थना: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, नमस्ते देव दामोदर।

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कैसे व कब जपें

  1. प्रातः, कार्तिक स्नान के बाद, पूजा-स्थल पर।
  2. संध्या, दीप जलाने से पूर्व।
  3. 108 (एक माला) परंपरा; मास भर नियमित।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिक मास के लिए कौन-से मंत्र श्रेष्ठ हैं?

कार्तिक शिव व विष्णु दोनों का सम्मान करता है, अतः शिव हेतु ॐ नमः शिवाय व महामृत्युंजय, व विष्णु हेतु ॐ नमो नारायणाय / ॐ नमो भगवते वासुदेवाय व दामोदर प्रार्थना जपें।

कितनी बार जपें?

प्रतिदिन 108 (एक माला) परंपरा है; मास भर नियमितता संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है। कार्तिक स्नान के बाद प्रातः व दीप पर संध्या आदर्श।

दामोदराष्टकम क्या है?

भगवान दामोदर (यशोदा की रस्सी से बँधे कृष्ण) को समर्पित आठ श्लोकों का प्रिय स्तोत्र, कार्तिक भर नित्य पठित; यह "नमामीश्वरं सच्चिदानन्द रूपं" से आरंभ होता है।

क्या आरंभकर्ता जप सकते हैं?

हाँ — सरल पंचाक्षरी (ॐ नमः शिवाय) या अष्टाक्षरी (ॐ नमो नारायणाय) से आरंभ करें; भक्ति से उच्चारण करें, अभ्यास ही शुद्ध करता है।

मुख्य बिंदु

  • शिव: ॐ नमः शिवाय व महामृत्युंजय।
  • विष्णु: ॐ नमो नारायणाय व ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
  • दामोदराष्टकम नित्य; मास भर 108 की माला।

देखें: कार्तिक मास 2026स्नान व दीप दान.