सीमंत (सीमंतोन्नयन — "केश-विभाजन") षोडश संस्कारों में तीसरा है — गर्भावस्था में किया जाने वाला कोमल संस्कार जो होने वाली माता एवं गर्भस्थ शिशु को आशीर्वाद देता है और माता को परिवार के स्नेह से घेरता है।

महत्व

यह संस्कार माता एवं शिशु के कल्याण एवं रक्षा हेतु प्रार्थना करता है एवं आने वाले शिशु का आनंदपूर्वक स्वागत करता है। तेलुगु एवं दक्षिण भारतीय परंपरा में होने वाली माता को चूड़ियों, पुष्पों एवं नई साड़ी से सजाया जाता है एवं बड़े आशीर्वाद देते हैं।

कब किया जाता है?

  • सामान्यतः गर्भावस्था के 5, 7 या 8वें माह में, शुभ दिन पर (क्षेत्र-परिवार अनुसार भिन्न)।
  • शुभ मुहूर्त पंचांग/पुरोहित द्वारा चुनें।

सामग्री

  • होने वाली माता हेतु नई चूड़ियाँ (हरी/लाल), पुष्प एवं नई साड़ी
  • हल्दी, कुंकुम, दीप, अक्षत, छोटा कलश
  • फल, मिठाई एवं उत्सव-भोज सामग्री

विधि (सामान्य रूप)

  1. दीप जलाकर गणेश आवाहन — "ॐ गं गणपतये नमः"।
  2. पुरोहित/बड़े माता एवं शिशु के कल्याण हेतु संक्षिप्त संकल्प करते हैं।
  3. होने वाली माता को चूड़ियों, पुष्पों एवं नई साड़ी से सजाया जाता है; सुहागिनें-बड़े अक्षत एवं आरती से आशीर्वाद देते हैं।
  4. माता को प्रिय भोजन अर्पित कर परिवार उत्सव-भोज एवं प्रसाद सहित मनाता है।

सूचना: प्रथाएँ क्षेत्र एवं समुदाय अनुसार (तेलुगु, तमिल, उत्तर भारतीय…) बहुत भिन्न होती हैं — पारिवारिक परंपरा एवं बड़ों का अनुसरण करें।

NRI विदेश में कैसे करें

  • चूड़ियों, आशीर्वाद एवं उत्सव-भोज सहित आत्मीय गृह-मिलन पूर्णतः मान्य; पुरोहित प्रत्यक्ष/ऑनलाइन सम्मिलित हो सकते हैं।
  • चूड़ियाँ, पुष्प एवं सामग्री भारतीय दुकानों से; दादा-दादी को वर्चुअली सम्मिलित करें।
  • अनेक NRI समुदाय एवं मंदिर सामूहिक आशीर्वाद आयोजित करते हैं।

16 संस्कार गाइड देखें। अगले संस्कार नामकरण एवं अन्नप्राशन हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीमंत संस्कार गर्भावस्था के किस माह में किया जाता है?

सीमंत सामान्यतः गर्भावस्था के 5, 7 या 8वें माह में शुभ दिन पर किया जाता है, जो क्षेत्र और परिवार अनुसार भिन्न होता है। शुभ मुहूर्त पंचांग या पुरोहित से चुनें।

सीमंतोन्नयन संस्कार क्यों किया जाता है?

सीमंतोन्नयन षोडश संस्कारों में तीसरा है, जो होने वाली माता और गर्भस्थ शिशु के कल्याण एवं रक्षा हेतु प्रार्थना करता है। यह आने वाले शिशु का आनंदपूर्वक स्वागत भी है।

सीमंत में होने वाली माता को चूड़ियाँ क्यों पहनाई जाती हैं?

तेलुगु एवं दक्षिण भारतीय परंपरा में होने वाली माता को नई हरी या लाल चूड़ियों, पुष्पों और नई साड़ी से सजाया जाता है। फिर सुहागिनें और बड़े अक्षत व आरती से आशीर्वाद देते हैं।

सीमंत संस्कार की विधि क्या है?

दीप जलाकर "ॐ गं गणपतये नमः" से गणेश आवाहन होता है, फिर माता एवं शिशु के कल्याण हेतु संकल्प किया जाता है। माता को सजाकर आशीर्वाद दिया जाता है और प्रिय भोजन अर्पित कर परिवार उत्सव-भोज मनाता है।

NRI परिवार विदेश में सीमंत कैसे मनाएँ?

चूड़ियों, आशीर्वाद और उत्सव-भोज सहित आत्मीय गृह-मिलन पूर्णतः मान्य है; पुरोहित प्रत्यक्ष या ऑनलाइन जुड़ सकते हैं। सामग्री भारतीय दुकानों से लें, और अनेक NRI समुदाय व मंदिर सामूहिक आशीर्वाद भी आयोजित करते हैं।