अक्षराभ्यास (विद्यारंभ — "विद्या का आरंभ") वह संस्कार है जो शिशु को अक्षरों एवं ज्ञान के संसार में प्रवेश कराता है। देवी सरस्वती एवं भगवान गणेश के आशीर्वाद से शिशु अपने प्रथम अक्षर लिखता है — आजीवन विद्या का कोमल, आनंदमय आरंभ।

महत्व

सनातन धर्म में विद्या को दिव्य वरदान माना जाता है। इस संस्कार में बुज़ुर्ग के हाथ के सहारे शिशु चावल की थाली में पवित्र अक्षर ("ॐ"/"श्री") लिखता है, कुछ शहद/स्वर्ण से जीभ पर अक्षर बनाते हैं — विद्या में मधुरता एवं विवेक हेतु।

कब किया जाता है?

  • सामान्यतः 2–5 वर्ष की आयु में, शुभ दिन पर।
  • विजयदशमी (दशहरा) एवं वसंत पंचमी (सरस्वती दिवस) विशेष श्रेष्ठ।
  • शुभ मुहूर्त पंचांग/पुरोहित द्वारा चुनें।

सामग्री

  • प्रथम अक्षर लिखने हेतु चावल की थाली
  • देवी सरस्वती एवं गणेश के चित्र/मूर्ति
  • दीप, हल्दी, कुंकुम, पुष्प; स्लेट/पुस्तक एवं कलम
  • फल, मिठाई, प्रसाद

विधि (चरणबद्ध)

  1. स्थान स्वच्छ कर दीप जलाएँ एवं गणेश आवाहन — "ॐ गं गणपतये नमः"।
  2. विद्यारंभ श्लोक से देवी सरस्वती की प्रार्थना करें (नीचे)।
  3. शिशु की उँगली पकड़कर चावल की थाली में पवित्र अक्षर ("ॐ"/"श्री") लिखाएँ; शिशु दोहराता है।
  4. शिशु को आशीर्वाद दें एवं प्रसाद बाँटें।

सरस्वती विद्यारंभ श्लोक

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

Advertisement

Sarasvati namastubhyaṁ varade kāmarūpiṇi, vidyārambhaṁ kariṣyāmi siddhir bhavatu me sadā.

भाव (हमारे शब्दों में): हे वरदायिनी, इच्छानुरूप रूप धारण करने वाली देवी सरस्वती! आपको नमस्कार — मैं विद्या आरंभ करता हूँ; मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो।

NRI विदेश में कैसे करें

  • सरस्वती चित्र, चावल-थाली लेखन एवं श्लोक सहित सरल गृह-विधि पूर्णतः मान्य है।
  • पुरोहित प्रत्यक्ष/ऑनलाइन व्यवस्थित करें; विदेश के मंदिर विजयदशमी पर सामूहिक विद्यारंभ करते हैं।
  • दादा-दादी को वीडियो कॉल पर शिशु के प्रथम अक्षरों हेतु सम्मिलित करें।

16 संस्कार गाइड, अन्नप्राशन देखें। अगला विद्या-पड़ाव उपनयन है।