नामकरण (नामकरण संस्कार) षोडश संस्कारों में पाँचवाँ है, जिसमें नवजात शिशु को विधिवत नाम दिया जाता है। परंपरागत रूप से यह जन्म के लगभग ग्यारहवें दिन (परिवार एवं क्षेत्र अनुसार भिन्न) किया जाता है। यह आनंदमय आशीर्वाद एवं स्वागत का संस्कार है।

महत्व

नाम प्रायः शिशु के जन्म-नक्षत्र एवं उसके आरंभिक अक्षर, कुलदेवता, या किसी बुज़ुर्ग के आशीर्वाद से चुना जाता है। चुना हुआ नाम शिशु के कान में धीरे से कहा जाता है, एवं दीर्घायु तथा धर्ममय जीवन हेतु आशीर्वाद दिया जाता है।

कब किया जाता है? (मुहूर्त)

  • परंपरागत रूप से जन्म के 11वें दिन; कुछ परिवार 12वें दिन, बाद के शुभ दिन, या नक्षत्र अनुसार चुनते हैं।
  • शुभ मुहूर्त पंचांग में देखें/पुरोहित से परामर्श करें, समय-क्षेत्र अनुसार समायोजित करें।

सामग्री

  • दीप, हल्दी, कुंकुम, अक्षत, पुष्प
  • छोटा कलश, पान-सुपारी, फल, मिठाई
  • शिशु हेतु नया वस्त्र/झूला; नाम लिखने हेतु चावल की थाली (वैकल्पिक)

विधि (चरणबद्ध)

  1. स्थान स्वच्छ कर दीप जलाएँ एवं गणेश आवाहन करें — "ॐ गं गणपतये नमः"।
  2. बड़े/पुरोहित संक्षिप्त संकल्प करते हैं।
  3. चुना नाम चावल की थाली में लिखकर शिशु के दाहिने कान में धीरे से कहा जाता है।
  4. अक्षत से शिशु को आशीर्वाद दें एवं प्रार्थना करें (अनेक गायत्री/"ॐ नमो नारायणाय" पढ़ते हैं)।
  5. प्रसाद बाँटकर परिवार सहित मनाएँ।

सूचना: मंत्र एवं विधि संप्रदाय (स्मार्त, वैष्णव आदि) एवं क्षेत्र अनुसार बदलते हैं — पारिवारिक पुरोहित की विधि अपनाएँ।

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NRI विदेश में कैसे करें

  • स्थानीय पुरोहित को प्रत्यक्ष बुलाएँ, या भारत के पुजारी के साथ ऑनलाइन संस्कार करें।
  • दीप, नाम-कथन, बड़ों का आशीर्वाद एवं प्रसाद सहित सरल गृह-विधि पूर्णतः मान्य है।
  • भारतीय दुकानों से सामग्री; दादा-दादी को वीडियो कॉल पर सम्मिलित करें।

नाम चुन रहे हैं? अर्थ, नक्षत्र-राशि मार्गदर्शन हेतु हमारा हिंदू बेबी नेम्स हब देखें। 16 संस्कार गाइड एवं अन्नप्राशन भी देखें।