चूडाकरण (मुंडन — प्रथम केश-मुंडन) शिशु के प्रथम औपचारिक केश-मुंडन का संस्कार है। यह शुद्धि एवं आशीर्वाद का कोमल संस्कार है, परंपरागत रूप से जीवन के आरंभिक वर्षों में, प्रायः मंदिर में किया जाता है।

महत्व

शिशु के प्रथम केश अर्पित करना विनम्रता एवं कृतज्ञता का भाव है, एवं शिशु को स्वास्थ्य तथा वृद्धि का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। अनेक परिवार इसे मंदिर में — तिरुमला में केश-अर्पण (मोट्टई) विशेष प्रिय परंपरा है — पूर्ण करते हैं।

कब किया जाता है?

  • परंपरागत रूप से पहले-तीसरे वर्ष के बीच, शुभ दिन पर (प्रायः विषम वर्ष; प्रथाएँ भिन्न)।
  • शुभ मुहूर्त पंचांग/पुरोहित द्वारा चुनें; उस दिन शिशु स्वस्थ हो।

सामग्री

  • दीप, हल्दी, कुंकुम, अक्षत, पुष्प
  • छोटा कलश, फल, मिठाई, प्रसाद
  • मंदिर में हो तो मंदिर की मुंडन-व्यवस्था का पालन करें

विधि (सामान्य रूप)

  1. दीप जलाकर गणेश आवाहन — "ॐ गं गणपतये नमः"।
  2. पुरोहित/बड़े शिशु के कल्याण हेतु संक्षिप्त संकल्प करते हैं।
  3. आशीर्वाद सहित पहले एक केश-लट अर्पित की जाती है; फिर धीरे से मुंडन पूर्ण होता है।
  4. सिर पर थोड़ी हल्दी/चंदन लगाएँ; प्रार्थना एवं प्रसाद सहित मनाएँ।

सूचना: प्रथाएँ एवं समय क्षेत्र-परिवार अनुसार बदलते हैं — बड़ों/पुरोहित का अनुसरण करें।

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NRI विदेश में कैसे करें

  • प्रतीकात्मक प्रथम लट एवं आशीर्वाद सहित सरल गृह-विधि मान्य; अनेक NRI भारत के मंदिर (जैसे तिरुमला) में पूर्ण मुंडन कराते हैं।
  • पुरोहित प्रत्यक्ष/ऑनलाइन व्यवस्थित करें; दादा-दादी को वीडियो कॉल पर सम्मिलित करें।

मंदिर यात्रा की योजना? हमारी तिरुमला तिरुपति बालाजी NRI गाइड देखें। 16 संस्कार गाइड एवं अन्नप्राशन भी देखें।