जून 2026 के शिव व्रत: कालाष्टमी (8 जून) और मासिक शिवरात्रि (13 जून)
जून 2026 दो शक्तिशाली शिव अनुष्ठान लेकर आता है — 8 जून को कालाष्टमी और 13 जून को मासिक शिवरात्रि। भक्तों और एनआरआई के लिए महत्व, विधि, उपवास नियम और सरल घरेलू पूजा।

जून 2026 दो शक्तिशाली शिव अनुष्ठान लेकर आता है — 8 जून को कालाष्टमी और 13 जून को मासिक शिवरात्रि। भक्तों और एनआरआई के लिए महत्व, विधि, उपवास नियम और सरल घरेलू पूजा।
ज्येष्ठ मास शिव भक्तों के लिए दो अत्यंत शुभ अवसर लेकर आता है — 8 जून, 2026 को कालाष्टमी और 13 जून, 2026 को मासिक शिवरात्रि। माना जाता है कि ये मासिक अनुष्ठान भगवान शिव के सच्चे भक्तों को शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करते हैं। विस्तृत पूजा विधि के लिए, हमारी कालभैरव अष्टमी 2026 गाइड और मासिक शिवरात्रि 13 जून, 2026 पूजा विधि देखें।
कालाष्टमी (कालभैरव अष्टमी) — 8 जून, 2026
कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (8वें दिन) को पड़ती है। भक्त भगवान कालभैरव की पूजा करते हैं, जो भगवान शिव का उग्र रूप हैं, काल (समय) के रक्षक और पवित्र स्थानों के संरक्षक हैं।
कालाष्टमी का महत्व
- भगवान कालभैरव सभी भैरवों के सेनापति और भक्तों के रक्षक हैं।
- उनकी पूजा भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है, ऐसा माना जाता है।
- विशेष रूप से कानूनी समस्याओं, विलंब या आध्यात्मिक बाधाओं का सामना कर रहे लोगों के लिए लाभकारी।
- कई भक्त उपवास रखते हैं और शिव तथा कालभैरव का विशेष अभिषेक करते हैं।
कालाष्टमी कैसे मनाएँ
- जल्दी उठें, पवित्र स्नान करें, और शिव मंदिर जाकर दूध, जल और बिल्व पत्र अर्पित करें।
- “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जप करें।
- एक सरल घरेलू पूजा करें; उपवास रखें या केवल फल और दूध लें।
मासिक शिवरात्रि — 13 जून, 2026
मासिक शिवरात्रि हर माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ती है। महा शिवरात्रि के विपरीत, जो वर्ष में एक बार आती है, मासिक शिवरात्रि उपवास, जप और पूजा के माध्यम से भगवान शिव से जुड़ने के मासिक अवसर प्रदान करती है।
मासिक शिवरात्रि का महत्व
- पापों और नकारात्मक कर्मों को दूर करती है।
- मन की शांति और बुरे प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है।
- इच्छाओं की पूर्ति में सहायता करती है और भगवान शिव के प्रति भक्ति को सुदृढ़ करती है।
- अच्छा स्वास्थ्य और पारिवारिक कल्याण लाती है।
मासिक शिवरात्रि की विधि
- उपवास रखें (निर्जल, या क्षमता अनुसार फल और दूध के साथ)।
- जल, दूध, दही, शहद और घी से भगवान शिव का अभिषेक करें।
- बिल्व पत्र अर्पित करें, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं।
- दिन भर “ॐ नमः शिवाय” का जप करें और यदि संभव हो तो रात्रि की शिव पूजा के लिए जागते रहें।
- शिव पुराण या शिव कथाएँ पढ़ें या सुनें।
इन शिव व्रतों को करने के लाभ
- असमय आने वाली समस्याओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा।
- मानसिक शांति, भावनात्मक बल और बाधाओं का निवारण।
- आध्यात्मिक प्रगति और भगवान शिव से निकटता।
- स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य के लिए आशीर्वाद, और समय पर सफलता हेतु भगवान कालभैरव की कृपा।
घर पर मनाने के सरल तरीके (एनआरआई और भक्तों के लिए)
- शिवलिंग या चित्र का उपयोग करके जल, दूध और बिल्व पत्र से एक सरल शिव अभिषेक करें।
- जप करें: ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का 108 या 1008 बार।
- घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ; मांसाहार, मदिरा और नकारात्मक विचारों से बचें।
- शिव भजन सुनें, या भगवान शिव के 108 नाम पढ़ें।
दोनों व्रत उस भक्ति को गहरा करते हैं जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों पर अपने चरम पर पहुँचती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
जून 2026 में कालाष्टमी कब है?
कालाष्टमी (कालभैरव अष्टमी) 8 जून, 2026 (सोमवार) को मनाई जाती है।
जून 2026 में मासिक शिवरात्रि कब है?
मासिक शिवरात्रि 13 जून, 2026 (शनिवार) को पड़ती है।
क्या हमें इन दिनों उपवास रखना चाहिए?
हाँ, उपवास (आंशिक उपवास भी) की सलाह दी जाती है। निर्जल उपवास अत्यंत लाभकारी माना जाता है पर सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
क्या महिलाएँ मासिक शिवरात्रि और कालाष्टमी मना सकती हैं?
हाँ। पुरुष और महिलाएँ दोनों इन शिव व्रतों को समान भक्ति के साथ कर सकते हैं।
इन दिनों हमें भगवान शिव को क्या अर्पित करना चाहिए?
जल, दूध, बिल्व (बेल) पत्र, फल और अगरबत्ती अत्यंत शुभ अर्पण माने जाते हैं।
जय भोलेनाथ! जय कालभैरव! हर हर महादेव!




