मंगला गौरी व्रत श्रावण का मंगलवार व्रत है; दांपत्य-सुख हेतु स्त्रियाँ देवी गौरी (पार्वती) की आराधना करती हैं। 2026 में मंगलवार 18, 25 अगस्त व 1, 8 सितंबर को हैं। यह श्रावण मास 2026 के साप्ताहिक व्रतों में से एक है।

मंगला गौरी व्रत 2026 तिथियाँ

  • मंगलवार: 18, 25 अगस्त व 1, 8 सितंबर 2026
  • देवता: गौरी (पार्वती), शिव सहित
  • रखती हैं: विवाहित स्त्रियाँ, विशेषकर नवविवाहिताएँ (प्रायः पाँच वर्ष)

महत्व

"मंगल" अर्थात् मंगलवार; "गौरी" पार्वती का शुभ स्वरूप। नवविवाहिताएँ — परंपरा से पहले पाँच वर्ष — दीर्घ व सुखद दांपत्य, पति के कल्याण व स्वस्थ संतान हेतु, पार्वती की शिव-भक्ति को आदर्श मानकर यह व्रत रखती हैं।

कथा

मंगला गौरी कथा में निःसंतान व्यापारी दंपति को व्रत-फल रूप में अल्पायु पुत्र मिलता है; मंगला गौरी व्रत रखने वाली भक्त बहू के पुण्य से उसकी आयु बढ़ती है व परिवार समृद्ध होता है — यह व्रत के सौभाग्य-दायी सामर्थ्य की कथा है।

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पूजा विधि

  1. मंगलवार स्नान व संकल्प; गौरी (मूर्ति/हल्दी प्रतिमा) स्थापना।
  2. सोलह-सोलह वस्तुओं से षोडशोपचार पूजा — 16 पुष्प, 16 पत्ते, 16 मालाएँ, 16 फल।
  3. नैवेद्य, मंगला गौरी कथा व आरती।
  4. उपवास व सुमंगलियों को प्रसाद।

मंत्र

गौरी: ॐ गौर्यै नमः · oṃ gauryai namaḥ।

शिव: ॐ नमः शिवाय · oṃ namaḥ śivāya।

प्रवासी मंगला गौरी व्रत कैसे रखते हैं

यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में स्त्रियाँ प्रत्येक श्रावण मंगलवार घर पर सरल गौरी पूजा, उपलब्ध वस्तुओं से सोलह अर्पण व कथा के साथ व्रत रखती हैं; मंदिर व ऑनलाइन सत्संग विधि बताते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगला गौरी व्रत 2026 कब है?

श्रावण के मंगलवारों को — 2026 में 18, 25 अगस्त व 1, 8 सितंबर।

मंगला गौरी व्रत कौन रखता है?

विवाहित स्त्रियाँ, विशेषकर नवविवाहिताएँ (प्रायः विवाह के पहले पाँच वर्ष), दांपत्य-सुख व पति की दीर्घायु हेतु देवी गौरी (पार्वती) की आराधना करती हैं।

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व्रत कैसे रखें?

सोलह-सोलह अर्पण (16 पुष्प, 16 पत्ते, 16 मालाएँ…) से गौरी की षोडशोपचार पूजा, नैवेद्य, उपवास व मंगला गौरी कथा।

मुख्य मंत्र क्या है?

ॐ गौर्यै नमः व ॐ नमः शिवाय — गौरी व शिव का संयुक्त आवाहन।

मुख्य बिंदु

  • मंगला गौरी व्रत 2026: मंगलवार 18, 25 अगस्त व 1, 8 सितंबर।
  • दांपत्य-सुख हेतु विवाहित स्त्रियों की गौरी पूजा।
  • षोडशोपचार पूजा (16-16) + मंगला गौरी कथा।

देखें: श्रावण मास 2026वरलक्ष्मी व्रत 2026