नाग पंचमी नाग देवताओं — पृथ्वी, जल व गृह के रक्षक सर्प देवताओं — का सम्मान करती है। 2026 में यह लगभग 17 अगस्त (श्रावण शुक्ल पंचमी), श्रावण मास 2026 में।

नाग पंचमी 2026 तिथि

  • तिथि: ~17 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल पंचमी) — स्थानीय पुष्टि करें
  • देवता: नव नाग (अनंत/शेष, वासुकि, तक्षक…), सुब्रह्मण्य
  • और: कुछ क्षेत्रों में गरुड़ पंचमी रूप में

महत्व

सनातन धर्म में सर्पों का पवित्र स्थान है — शेष लोकों को धारण कर विष्णु की शय्या बनते हैं, वासुकि शिव के कंठ की शोभा हैं, सुब्रह्मण्य सर्प रूप में पूजे जाते हैं। नाग पंचमी परिवार-कल्याण, संतान व रक्षा हेतु; सर्प व काल सर्प दोष निवारण रूप में रखी जाती है।

कथा

अनेक कथाएँ: यमुना में कालिय नाग का कृष्ण द्वारा दमन; जनमेजय के सर्प-यज्ञ को इसी पंचमी पर आस्तीक मुनि द्वारा रोककर नाग-जाति की रक्षा। यह दिन मनुष्यों व सर्प-लोक के सामंजस्य का उत्सव है।

Advertisement

अनुष्ठान व पूजा विधि

  1. स्नान व संकल्प; पूजा स्थान स्वच्छ करें।
  2. नाग मूर्ति, नाग-शिला या बाँबी की दूध, हल्दी, कुमकुम व पुष्प से पूजा।
  3. नैवेद्य; उपवास व परिवार की रक्षा हेतु प्रार्थना।
  4. इस दिन भूमि खोदना व किसी जीव को हानि वर्जित।

मंत्र

नाग: ॐ नागराजाय नमः · oṃ nāgarājāya namaḥ।

नवनाग: अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्… — नव नाग देवों का आवाहन।

प्रवासी नाग पंचमी कैसे मनाते हैं

यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में सुब्रह्मण्य व शिव मंदिर नाग पूजा व सर्प-दोष निवारण करते हैं। घर पर नाग चित्र/मूर्ति के समक्ष दूध व हल्दी अर्पित कर नाग मंत्र जपें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाग पंचमी 2026 कब है?

नाग पंचमी लगभग 17 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल पंचमी) को। सही दिन पंचांग से पुष्टि करें।

नाग पंचमी पर किसकी पूजा होती है?

नाग देवता — अनंत (शेष), वासुकि व तक्षक जैसे सर्प देवता — व भगवान सुब्रह्मण्य/नागुल; सर्प/काल सर्प दोष निवारण व रक्षक रूप में पूजे जाते हैं।

Advertisement

नाग पंचमी कैसे मनाएँ?

नाग मूर्ति, बाँबी या नाग-शिला की दूध, हल्दी व पुष्प से पूजा, उपवास व परिवार-कल्याण/रक्षा हेतु प्रार्थना। भूमि खोदना परंपरा से वर्जित।

मुख्य मंत्र क्या है?

ॐ नागराजाय नमः व नवनाग स्तोत्र: "अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्…"।

मुख्य बिंदु

  • नाग पंचमी 2026: ~17 अगस्त (श्रावण शुक्ल पंचमी)।
  • रक्षा व सर्प-दोष निवारण हेतु सर्प देवताओं की पूजा।
  • दूध व हल्दी अर्पण; ॐ नागराजाय नमः।

देखें: श्रावण मास 2026मंगला गौरी व्रत 2026