वरलक्ष्मी व्रत 2026: तिथि, पूजा विधि, कथा व मंत्र
वरलक्ष्मी व्रत 2026 (शुक्रवार 21 अगस्त): श्री महालक्ष्मी आराधना — महत्व, कलश व तोरम पूजा विधि, चारुमती कथा, मंत्र व प्रवासी गाइड।

वरलक्ष्मी व्रत 2026 (शुक्रवार 21 अगस्त): श्री महालक्ष्मी आराधना — महत्व, कलश व तोरम पूजा विधि, चारुमती कथा, मंत्र व प्रवासी गाइड।
वरलक्ष्मी व्रत श्रावण में स्त्रियों का प्रमुख पर्व है — वर देने वाली (वर) देवी श्री महालक्ष्मी की आराधना का दिन। 2026 में यह शुक्रवार, 21 अगस्त को है। यह श्रावण मास 2026 का मुख्य आकर्षण है।
वरलक्ष्मी व्रत 2026 तिथि
- तिथि: शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा से पूर्व शुक्रवार)
- देवता: श्री महालक्ष्मी (वरलक्ष्मी)
- विदेश में: स्थानीय शुक्रवार; विश्वभर में समान दिन
महत्व
"वर" अर्थात् वरदान। वरलक्ष्मी अष्ट लक्ष्मी (अष्ट-ऐश्वर्य) प्रदान करने वाली लक्ष्मी का स्वरूप हैं — स्वास्थ्य, समृद्धि, संतान, साहस आदि। विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु व परिवार-कल्याण हेतु यह व्रत रखती हैं; वरलक्ष्मी की पूजा अष्ट लक्ष्मी की पूजा के समान मानी जाती है।
कथा
कथा में देवी पार्वती ने शिव से स्त्रियों हेतु समृद्धि-कल्याण का व्रत पूछा, तब शिव ने वरलक्ष्मी व्रत सिखाया। स्कंद पुराण में चारुमती नामक भक्त को वरलक्ष्मी ने स्वप्न में दर्शन देकर व्रत बताया, जिससे वह व उसका नगर ऐश्वर्य से धन्य हुए।
पूजा विधि
- स्थान स्वच्छ कर कलश रखें — चावल पर कलश, ऊपर नारियल व आम-पत्ते, देवी के मुख रूप में सजावट।
- तोरम बनाएँ: नौ गाँठ/हल्दी धागा; पूजा कर दाहिनी कलाई पर बाँधें।
- कुमकुम, हल्दी, पुष्प, चूड़ियाँ व नैवेद्य (पायसम, मीठा पोंगल) अर्पित करें।
- श्री सूक्त व वरलक्ष्मी अष्टोत्तर का पाठ, आरती; सुमंगलियों को प्रसाद।
मंत्र
लक्ष्मी: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः · oṃ śrīṃ mahālakṣmyai namaḥ — 108 बार; श्री सूक्त पाठ।
प्रवासी वरलक्ष्मी व्रत कैसे रखते हैं
यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में तेलुगु संस्थाएँ व लक्ष्मी मंदिर वरलक्ष्मी पूजा करते हैं; परिवार 21 अगस्त को घर पर कलश, तोरम व श्री सूक्त से व्रत रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वरलक्ष्मी व्रत 2026 कब है?
वरलक्ष्मी व्रत 2026 — शुक्रवार, 21 अगस्त, श्रावण पूर्णिमा से पूर्व शुक्रवार।
वरलक्ष्मी व्रत कौन रखता है?
मुख्यतः विवाहित स्त्रियाँ (सुमंगली) परिवार के कल्याण, स्वास्थ्य व समृद्धि हेतु श्री महालक्ष्मी की आराधना करती हैं।
वरलक्ष्मी पूजा में कलश क्या है?
नारियल व आम-पत्तों से देवी के मुख रूप में सजाया कलश पूजा का केंद्र होता है; कलाई पर तोरम (9-गाँठ धागा) बाँधा जाता है।
मुख्य मंत्र क्या है?
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, श्री सूक्त व लक्ष्मी/वरलक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली।
मुख्य बिंदु
- वरलक्ष्मी व्रत 2026: शुक्रवार, 21 अगस्त।
- श्री महालक्ष्मी — वर देने वाली देवी; विवाहित स्त्रियाँ।
- कलश पूजा, तोरम बाँधना, श्री सूक्त पाठ।
देखें: श्रावण मास 2026 व श्रावण सोमवार 2026।




