श्रावण सोमवार 2026: तिथियाँ, रुद्राभिषेक व मंत्र
श्रावण सोमवार 2026 (सोमवार 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर): सर्वाधिक पवित्र शिव सोमवार — महत्व, रुद्राभिषेक पूजा विधि, मंत्र व प्रवासी गाइड।

श्रावण सोमवार 2026 (सोमवार 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर): सर्वाधिक पवित्र शिव सोमवार — महत्व, रुद्राभिषेक पूजा विधि, मंत्र व प्रवासी गाइड।
श्रावण सोमवार — श्रावण के सोमवार (सावन सोमवार) — भगवान शिव की आराधना के सर्वाधिक पवित्र दिन हैं। 2026 में ये 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर को हैं। ये श्रावण मास 2026 का हृदय हैं।
श्रावण सोमवार 2026 तिथियाँ
- सोमवार: 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर 2026
- देवता: भगवान शिव — रुद्राभिषेक, बिल्व, गंगाजल
- विदेश में: सोमवार विश्वभर में समान दिन
महत्व
श्रावण शिव का सर्वाधिक प्रिय मास है: समुद्र मंथन में हलाहल विष निकलने पर शिव ने उसे पीकर कंठ में धारण किया (नीलकंठ), देवताओं ने उन्हें शीतल करने हेतु गंगाजल अर्पित किया — इसीलिए श्रावण में शिवलिंग पर जल, दूध व बिल्व चढ़ाया जाता है। सोमवार शिव का दिन है; अतः श्रावण सोमवार दुगुना पवित्र।
व्रत व पूजा विधि
- सोमवार उपवास (सामर्थ्य अनुसार निर्जल/फलाहार)।
- शिवलिंग पर जल, दूध, मधु, दही व गंगाजल से अभिषेक।
- बिल्व-पत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा व घी-दीप।
- "ॐ नमः शिवाय" व महामृत्युंजय जप; संभव हो तो रुद्र पाठ।
मंत्र
शिव: ॐ नमः शिवाय · oṃ namaḥ śivāya।
महामृत्युंजय: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ · oṃ tryambakaṃ yajāmahe…
प्रवासी सावन सोमवार कैसे मनाते हैं
यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में शिव मंदिर श्रावण के हर सोमवार रुद्राभिषेक करते हैं। घर पर छोटे शिवलिंग पर जल व बिल्व से सरल अभिषेक, सोमवार उपवास व "ॐ नमः शिवाय" जप।
श्रावण सोमवार पूजा विधि — चरण-दर-चरण
प्रत्येक श्रावण सोमवार को भगवान शिव की एक सरल किंतु पूर्ण घरेलू पूजा की जाती है। प्रातः जल्दी उठें और इन चरणों का पालन करें:
- सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें, स्नान करें, और स्वच्छ श्वेत अथवा हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
- शिव लिंग अथवा भगवान शिव की प्रतिमा को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें और घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- संकल्प लें — अपने परिवार के कल्याण हेतु श्रावण सोमवार व्रत रखने का संकल्प करें।
- लिंग का पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) से 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए अभिषेक करें, और अंत में पुनः जल से स्नान कराएं।
- लिंग पर विभूति (पवित्र भस्म) और चंदन (चंदन का लेप) लगाएं।
- बिल्व (बेल) के पत्ते — तीन दल वाले और अखंडित — श्वेत पुष्प, अक्षत और जहां प्रथा हो वहां धतूरा अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाएं, नैवेद्य (फल, दूध अथवा व्रत का भोजन) अर्पित करें, और दीप की आरती करें।
- रुद्राक्ष की माला पर 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें, तत्पश्चात महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम् का पाठ करें।
- सोमवार व्रत कथा पढ़ें अथवा श्रवण करें।
- आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) और प्रदक्षिणा के साथ समापन करें, प्रसाद वितरित करें, और सायंकालीन पूजा के पश्चात व्रत का पारण करें।
श्रावण सोमवार के लिए शक्तिशाली मंत्र
श्रावण के सोमवार जप के लिए आदर्श हैं। इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक, यथासंभव रुद्राक्ष की माला पर जाप करें:
| मंत्र | अर्थ एवं जप का समय |
|---|---|
| ॐ नमः शिवाय | पंचाक्षरी पांच-अक्षरों वाला मंत्र — शिव के प्रति पूर्ण समर्पण; 108 बार जाप करें। |
| ॐ नमो भगवते रुद्राय | रुद्र को प्रणाम; अभिषेक के समय जप किया जाता है। |
| महामृत्युंजय — ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्… | स्वास्थ्य, रक्षा और दीर्घायु के लिए महान मृत्यु-विजयी मंत्र। |
| शिव गायत्री — ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि… | शिव की कृपा और ज्ञान का आवाहन करता है। |
| श्री रुद्रम् (नमकम्-चमकम्) | रुद्र को समर्पित वैदिक स्तोत्र, रुद्राभिषेक के समय पाठ किया जाता है। |
भगवान शिव को क्या अर्पित करें — और किससे बचें
शिव भोलेनाथ हैं, जो सरल एवं पवित्र अर्पणों से प्रसन्न होते हैं। परंपरा में स्पष्ट करने योग्य और वर्जित बातें हैं:
- अर्पित करें: बिल्व (बेल) के पत्ते, जल एवं दूध का अभिषेक, श्वेत पुष्प, विभूति, चंदन, अक्षत, और जहां प्रथा हो वहां धतूरा एवं भांग।
- इनसे बचें: तुलसी के पत्ते, केतकी (केवड़ा) के फूल, लिंग पर हल्दी और कुमकुम, तथा खंडित बिल्व पत्र।
- आधी (चंडी) प्रदक्षिणा करें — उस गौमुखी नाली को पार न करें जिससे अभिषेक का जल बहता है।
- आरंभ करने से पूर्व संकल्प लें और सायंकालीन पूजा के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
सोमवार व्रत — उपवास के नियम
- अपने स्वास्थ्य के अनुसार निर्जला (जल रहित) अथवा फलाहार (फल एवं दूध) व्रत रखें; अधिकांश भक्त सायंकालीन पूजा के पश्चात एक सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
- स्वीकार्य: फल, दूध, साबूदाना, समक चावल और सेंधा नमक।
- वर्जित: अनाज, साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन और मदिरा।
- सोलह सोमवार (Solah Somvar — 16 सोमवार) व्रत और श्रावण के चार से पांच सोमवार भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए विशेष रूप से पुण्यदायी माने जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण सोमवार 2026 की तिथियाँ क्या हैं?
2026 में श्रावण सोमवार — 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर — शिव के विशेष दिन।
श्रावण सोमवार इतने शुभ क्यों हैं?
श्रावण शिव का मास है, समुद्र मंथन (शिव का हलाहल पान, नीलकंठ) से जुड़ा; सोमवार शिव का दिन — अतः दोनों मिलकर शिव-आराधना का सर्वाधिक पवित्र समय।
श्रावण सोमवार कैसे मनाएँ?
सोमवार उपवास, रुद्राभिषेक — शिवलिंग पर जल, दूध, मधु व बिल्व; "ॐ नमः शिवाय" व महामृत्युंजय जप।
मुख्य बिंदु
- श्रावण सोमवार 2026: 17, 24, 31 अगस्त व 7 सितंबर।
- शिव के सर्वाधिक पवित्र सोमवार — रुद्राभिषेक, बिल्व, गंगाजल।
- "ॐ नमः शिवाय" व महामृत्युंजय जप।
देखें: श्रावण मास 2026 व वरलक्ष्मी व्रत 2026।



