क्षीराब्दि द्वादशी — तुलसी विवाह का दिन — तुलसी का भगवान विष्णु से पवित्र विवाह मनाता है व चातुर्मास के समापन का प्रतीक है। 2026 में यह लगभग 21 नवंबर (कार्तिक शुक्ल द्वादशी), कार्तिक मास 2026 में।

क्षीराब्दि द्वादशी / तुलसी विवाह 2026 तिथि

  • तिथि: ~21 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल द्वादशी) — स्थानीय पुष्टि करें
  • अन्य नाम: चिल्कुल द्वादशी; प्रबोधिनी (उत्थान) एकादशी के अगले दिन
  • प्रतीक: चातुर्मास का समापन — शुभ कार्य पुनः आरंभ

महत्व

"क्षीराब्दि" अर्थात् क्षीर सागर; यह द्वादशी समुद्र मंथन व विष्णु-लक्ष्मी के शाश्वत मिलन का स्मरण है। तुलसी विवाह रूप में — दिव्य वृंदा बनी तुलसी का सालिग्राम/दामोदर रूप विष्णु से विवाह — मनाया जाता है। चातुर्मास समाप्त होने पर विवाह व नए आरंभ पुनः आरंभ होते हैं।

कथा

पद्म पुराण वृंदा की कथा बताता है — असुर जलंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा के पातिव्रत्य ने उसे अजेय बनाया। धर्म-संस्थापना हेतु विष्णु के हस्तक्षेप से जलंधर का अंत हुआ; वृंदा शोक व कृपा में तुलसी पौधा बनीं, व भगवान के आशीर्वाद से सभी नैवेद्य से पूर्व पूजित हुईं। तुलसी विवाह इसी शाश्वत बंधन का सम्मान है।

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अनुष्ठान व पूजा विधि

  1. संध्या में तुलसी पौधे को स्वच्छ कर सजाएँ व चारों ओर दीप जलाएँ।
  2. तुलसी–सालिग्राम (विष्णु) विवाह छोटे समारोह रूप में; तुलसी के पास आँवला रखें।
  3. नैवेद्य, आरती व तुलसी प्रदक्षिणा।
  4. "ॐ नमो नारायणाय" जप; इस काल में कई लोग आँवला वृक्ष के नीचे वन भोजन आरंभ करते हैं।

मंत्र

विष्णु: ॐ नमो नारायणाय · oṃ namo nārāyaṇāya।

तुलसी: ॐ तुलस्यै नमः · oṃ tulasyai namaḥ।

प्रवासी तुलसी विवाह कैसे मनाते हैं

यूएसए, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व जर्मनी में इस्कॉन व विष्णु मंदिर दीप व कीर्तन के साथ तुलसी विवाह करते हैं। घर पर तुलसी पौधा (या गमले में), संध्या में दीप, सरल तुलसी–सालिग्राम पूजा व नारायण मंत्र।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्षीराब्दि द्वादशी / तुलसी विवाह 2026 कब है?

लगभग 2026 21 नवंबर (कार्तिक शुक्ल द्वादशी), प्रबोधिनी एकादशी के अगले दिन। पंचांग से पुष्टि करें।

तुलसी विवाह क्या है?

पवित्र तुलसी (वृंदा) का भगवान विष्णु के सालिग्राम / दामोदर रूप से विधिवत विवाह। यह चातुर्मास के समापन का प्रतीक है; इसके बाद शुभ कार्य (विवाह) पुनः आरंभ होते हैं।

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क्षीराब्दि द्वादशी क्या है?

"क्षीराब्दि" अर्थात् क्षीर सागर; यह द्वादशी समुद्र मंथन व विष्णु-लक्ष्मी मिलन का स्मरण है; संध्या में तुलसी व विष्णु आराधना का परम शुभ दिन।

कैसे रखें?

संध्या में तुलसी की दीपों से पूजा कर तुलसी–सालिग्राम विवाह करें, तुलसी के पास आँवला रखें, नैवेद्य अर्पित कर "ॐ नमो नारायणाय" जपें।

मुख्य बिंदु

  • क्षीराब्दि द्वादशी / तुलसी विवाह 2026: ~21 नवंबर।
  • तुलसी का विष्णु से विवाह; चातुर्मास समाप्त, विवाह पुनः आरंभ।
  • संध्या में दीपों से तुलसी पूजा; ॐ नमो नारायणाय।

देखें: कार्तिक मास 2026कार्तिक पूर्णिमा 2026