श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् – संस्कृत श्लोक, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व
शृंगेरी शारदा पीठम् द्वारा शृंगेरी जगद्गुरु की रचना के रूप में प्रकाशित श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम्: माँ के रूप में देवी से प्रार्थना करने वाले पाँच संस्कृत श्लोक, IAST, सरल अर्थ, पाठ के नियम और FAQ।

ॐ श्री मात्रे नमः
संक्षेप में: श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् पाँच संस्कृत श्लोकों की प्रार्थना है, जिसमें देवी को माँ के रूप में पुकारा गया है। शृंगेरी शारदा पीठम् ने इसे शृंगेरी जगद्गुरु (श्री भारती तीर्थ महास्वामी) की रचना के रूप में प्रकाशित किया। नीचे पाँचों श्लोक संस्कृत और IAST में, सरल अर्थ, पाठ के अवसर और FAQ दिए हैं।
जगन्माता श्री दुर्गा परमेश्वरी समस्त जगत् की माता हैं। वे भक्तों को आपदाओं से बचाने वाली, उनके कष्ट दूर करने वाली और धर्म के मार्ग पर चलाने वाली करुणामयी हैं।
हमारी आध्यात्मिक परंपरा सिखाती है कि जैसे माँ अपने बच्चों की गलतियाँ क्षमा करती है और संकट में उन्हें सँभालती है, वैसे ही जगन्माता अपने भक्तों पर अपार करुणा बरसाती हैं।
शृंगेरी जगद्गुरु श्री श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामी से जुड़ा श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् देवी को अपनी सगी माँ मानकर की गई हृदय से निकली प्रार्थना है।
इस स्तोत्र में प्रार्थना की जाती है कि देश और लोगों पर कोई आपदा न आए, रोग और कष्ट दूर हों, और जगन्माता अपनी करुणा बरसाएँ।
चित्र-परिचय: जगन्माता श्री दुर्गा परमेश्वरी की कृपा समस्त लोक पर बनी रहे।
आइए, इस स्तोत्र के पाँच श्लोकों और उनके अर्थ को भक्ति से जानें।
स्रोत और संदर्भ
नीचे का संस्कृत पाठ शृंगेरी शारदा पीठम् द्वारा स्वयं प्रकाशित पाठ के अनुसार है। संस्कृत, IAST लिप्यंतरण और अंग्रेज़ी अनुवाद वाली यह PDF मार्च 2020 में पीठम् की वेबसाइट पर रखी गई थी। उस पर शीर्षक है “शृंगेरी जगद्गुरु-विरचितम्” (शृंगेरी जगद्गुरु द्वारा रचित), और वह उस समय दुनिया भर में फैल रही “कोरोना” नामक बीमारी के निवारण के लिए इस स्तोत्र के पाठ के संकल्प से शुरू होती है। श्लोक स्वयं माँ से देश को रोग आदि आपदाओं से बचाने की प्रार्थना करते हैं।
शृंगेरी की PDF रचयिता को केवल “शृंगेरी जगद्गुरु” कहती है। उस समय जगद्गुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामी थे, इसलिए यह स्तोत्र उन्हीं से जुड़ा माना जाता है।
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् – पाँचों श्लोक
॥ श्रीदुर्गापरमेश्वरीस्तोत्रम् ॥
श्लोक 1: देश की रक्षा के लिए जगन्माता से प्रार्थना
श्लोक 1
एतावन्तं समयं सर्वापद्भ्योऽपि रक्षणं कृत्वा ।
देशस्य परमिदानीं ताटस्थ्यं केन वहसि दुर्गाम्ब ॥ १ ॥
etāvantaṃ samayaṃ sarvāpadbhyo'pi rakṣaṇaṃ kṛtvā |
deśasya paramidānīṃ tāṭasthyaṃ kena vahasi durgāmba || 1 ||
अर्थ: हे दुर्गाम्बा! अब तक आपने देश की सभी आपदाओं से रक्षा की है। अब आप देश के प्रति उदासीन क्यों हैं?
हे जगन्माता! अपनी कृपादृष्टि हम पर डालिए और देश को सभी कष्टों से बचाइए।
श्लोक 2: माँ की करुणा का स्मरण
श्लोक 2
अपराधा बहुशः खलु पुत्राणां प्रतिपदं भवन्त्येव ।
को वा सहते लोके सर्वांस्तान्मातरं विहायैकाम् ॥ २ ॥
aparādhā bahuśaḥ khalu putrāṇāṃ pratipadaṃ bhavantyeva |
ko vā sahate loke sarvāṃstānmātaraṃ vihāyaikām || 2 ||
अर्थ: बच्चे बहुत-सी गलतियाँ करते हैं, लगभग हर क़दम पर। पर माँ को छोड़कर इस संसार में उन सबको और कौन सहन कर सकता है?
इसलिए हे माँ! अपने बच्चों को हमारी गलतियों के साथ ही करुणा से अपनाइए।
श्लोक 3: दीनों की उपेक्षा न करने की विनती
श्लोक 3
मा भज मा भज दुर्गे ताटस्थ्यं पुत्रकेषु दीनेषु ।
के वा गृह्णन्ति सुतान्मात्रा त्यक्तान् वदाम्बिके लोके ॥ ३ ॥
mā bhaja mā bhaja durge tāṭasthyaṃ putrakeṣu dīneṣu |
ke vā gṛhṇanti sutānmātrā tyaktān vadāmbike loke || 3 ||
अर्थ: हे देवी दुर्गा! अपने दीन-दशा में पड़े बच्चों के प्रति उदासीन न होइए।
जिन बच्चों को माँ ने ही छोड़ दिया हो, उन्हें इस संसार में कौन अपनाएगा? हे अम्बिके! हमें न छोड़िए, अपनी करुणा से हमारी रक्षा कीजिए।
श्लोक 4: देश के स्वास्थ्य और शांति की प्रार्थना
श्लोक 4
इतः परं वा जगदम्ब जातु देशस्य रोगप्रमुखापदोऽस्य ।
न स्युस्तथा कुर्वचलां कृपामित्यभ्यर्थनां मे सफलीकुरुष्व ॥ ४ ॥
itaḥ paraṃ vā jagadamba jātu deśasya rogapramukhāpado'sya |
na syustathā kurvacalāṃ kṛpāmityabhyarthanāṃ me saphalīkuruṣva || 4 ||
अर्थ: हे जगदम्बा! अब से इस देश पर रोग आदि आपदाएँ न आएँ, इसके लिए अपनी अचल कृपा बरसाइए।
देश के लोग स्वस्थ, शांत और सुखी रहें, ऐसा अनुग्रह कीजिए। हे माँ! मेरी इस प्रार्थना को सफल कीजिए।
श्लोक 5: पापियों की भी रक्षा करने वाली करुणामयी
श्लोक 5
पापहीनजनतावनदक्षाः सन्ति निर्जरवरा न कियन्तः ।
पापपूर्णजनरक्षणदक्षां त्वां विना भुवि परां न विलोके ॥ ५ ॥
pāpahīnajanatāvanadakṣāḥ santi nirjaravarā na kiyantaḥ |
pāpapūrṇajanarakṣaṇadakṣāṃ tvāṃ vinā bhuvi parāṃ na viloke || 5 ||
अर्थ: निष्पाप लोगों की रक्षा करने वाले देवता तो बहुत हो सकते हैं।
पर दोषों से भरे लोगों की भी रक्षा कर सकने वाली आपके सिवा मैं इस संसार में किसी को नहीं देखता। हे जगन्माता! आपकी करुणा योग्यता पर निर्भर नहीं है। सभी बच्चों को अपनाने वाली माँ आप ही हैं।
॥ इति श्रीदुर्गापरमेश्वरीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
माता श्री दुर्गायै नमः
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् का आध्यात्मिक संदेश
यहाँ विशेष बात यह है कि देवी की प्रार्थना केवल सर्वशक्तिमान देवता के रूप में नहीं, बल्कि अपने बच्चों के कष्ट समझने वाली माँ के रूप में की गई है।
मुख्य संदेश ये हैं:
- मातृ-करुणा: बच्चे गलतियाँ करें तब भी माँ उन्हें नहीं छोड़ती।
- शरणागति: कठिन समय में देवी पर भरोसा रखकर प्रार्थना करना।
- लोक-कल्याण: केवल निजी सुख के लिए नहीं, देश और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना करना।
- स्वास्थ्य और शांति: लोग रोग और आपदा से दूर रहकर सुख-शांति से जीवें, यह प्रार्थना।
- अहैतुकी करुणा: दोषों से भरे लोगों की भी रक्षा कर सकने वाली माँ की असीम दया का गुणगान।
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् का पाठ कब करें?
भक्त अपनी सुविधा के किसी भी समय इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
विशेष रूप से:
- प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद।
- शुक्रवार को देवी की पूजा के समय।
- मंगलवार को दुर्गा देवी की आराधना में।
- नवरात्रि के दौरान।
- परिवार के कल्याण और देश की शांति की प्रार्थना के समय।
किसी स्वच्छ स्थान पर देवी के चित्र के सामने दीपक जलाकर शांत मन से श्लोकों का पाठ किया जा सकता है।
विशेष: स्तोत्र-पाठ भक्ति, मन की शांति और आध्यात्मिक चिंतन का एक मार्ग है। यह किसी विशेष फल का वचन नहीं देता। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हों तो प्रार्थना के साथ उचित चिकित्सा भी अवश्य लें।
श्री दुर्गा देवी की कृपा: देवी को अपनी माँ मानकर प्रार्थना करें
जीवन में हर किसी के सामने कष्ट, पीड़ा और आपदाएँ आती हैं।
ऐसे समय में हमें साहस देने वाली चीज़ ईश्वर पर विश्वास है।
बच्चे ने कितनी भी बड़ी गलती की हो, उसे पीड़ा में देखकर माँ उसे अपनाए बिना नहीं रह सकती। उसी तरह भक्त मानते हैं कि जगन्माता अपने भक्तों पर करुणा करती हैं।
इस स्तोत्र का पाँचवाँ श्लोक इस भाव को सबसे मार्मिक ढंग से व्यक्त करता है।
आइए, अपनी गलतियाँ सुधारें, सही मार्ग पर चलें और केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं, समस्त संसार के कल्याण के लिए भी देवी से प्रार्थना करें।
जगन्माता श्री दुर्गा परमेश्वरी हम सब पर सदा कृपा करें, यही प्रार्थना है।
ॐ श्री दुर्गायै नमः
श्री मात्रे नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् की रचना किसने की?
शृंगेरी शारदा पीठम् ने मार्च 2020 में इस पाठ को शृंगेरी जगद्गुरु की रचना (“शृंगेरी जगद्गुरु-विरचितम्”) के रूप में प्रकाशित किया। उस समय जगद्गुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामी थे, इसलिए यह स्तोत्र उन्हीं से जुड़ा माना जाता है। आधिकारिक PDF का लिंक नीचे संपादकीय टिप्पणी में है।
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् में कितने श्लोक हैं?
इसमें पाँच श्लोक हैं, संस्कृत में।
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् का पाठ क्यों किया जाता है?
भक्त इसका पाठ जगन्माता के प्रति भक्ति और शरणागति के साथ, देश के कल्याण तथा लोगों के स्वास्थ्य, शांति और सुख की प्रार्थना के लिए करते हैं।
क्या दुर्गा स्तोत्र रोज़ पढ़ सकते हैं?
हाँ। भक्त शांत मन से प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
श्री दुर्गा परमेश्वरी स्तोत्रम् किस भाषा में है?
यह स्तोत्र संस्कृत में है। इसके अर्थ को समझते हुए पाठ करने से श्लोकों का प्रार्थना-भाव अधिक स्पष्ट होता है।
यह स्तोत्र क्यों रचा गया?
शृंगेरी शारदा पीठम् की अपनी PDF मार्च 2020 में दुनिया भर में फैल रही “कोरोना” नामक बीमारी के निवारण के लिए इसके पाठ के संकल्प से शुरू होती है। श्लोक स्वयं और व्यापक हैं: वे माँ से देश को रोग आदि आपदाओं से बचाने की प्रार्थना करते हैं।
संपादकीय टिप्पणी
यह लेख उस तेलुगु लेखक का है जिन्होंने इसे HinduTone को भेजा (तेलुगु मूल है; अंग्रेज़ी और हिंदी विश्वसनीय अनुवाद हैं)। प्रकाशन से पहले हमने इसके संस्कृत पाठ का मिलान शृंगेरी शारदा पीठम् की अपनी PDF से किया: (आधिकारिक PDF)। इस पृष्ठ के श्लोक उसी पाठ का अनुसरण करते हैं। भेजे गए मसौदे के तीन छोटे अंतर उसके अनुसार सुधारे गए: श्लोक 2 में सर्वांस्तान्, श्लोक 4 में जुड़ा रूप कृपामित्यभ्यर्थनां, और श्लोक 5 में निर्जरवरा (निर्जरवरो नहीं)। देवनागरी और तेलुगु लिपि के रूप शृंगेरी के IAST से सॉफ़्टवेयर द्वारा बनाए गए हैं, हाथ से दोबारा टाइप नहीं किए गए, और देवनागरी PDF की अपनी देवनागरी से मेल खाती है।
शृंगेरी की PDF रचयिता को “शृंगेरी जगद्गुरु” कहती है; श्री भारती तीर्थ महास्वामी का नाम इसलिए दिया गया है कि उस समय वही जगद्गुरु थे। शीर्षक में “लाभ” जैसे शब्द भक्ति और आध्यात्मिक महत्व के लिए हैं; किसी विशेष परिणाम का वचन नहीं है। अर्थ का हिंदी अनुवाद हमारा है और तेलुगु पाठ का अनुसरण करता है।
अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
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