आज का पंचांग: 9 मई 2026 (शनिवार) — कालाष्टमी
आज का वैदिक पंचांग शनिवार 9 मई 2026 — कृष्ण अष्टमी तिथि, श्रवण नक्षत्र, कालाष्टमी, राहु काल, सूर्योदय और मुहूर्त (IST)।

आज का वैदिक पंचांग शनिवार 9 मई 2026 — कृष्ण अष्टमी तिथि, श्रवण नक्षत्र, कालाष्टमी, राहु काल, सूर्योदय और मुहूर्त (IST)।
आज, शनिवार 9 मई 2026 का वैदिक पंचांग — कृष्ण अष्टमी तिथि (10 मई सुबह 5:36 तक), श्रवण नक्षत्र (दोपहर 1:54 तक), कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का दिन। सर्वार्थ सिद्धि योग भी आज सक्रिय।
त्वरित जानकारी (हैदराबाद IST)
तिथि: कृष्ण अष्टमी (10 मई सुबह 5:36 तक)
नक्षत्र: श्रवण → धनिष्ठा (दोपहर 1:54 के बाद)
Advertisementयोग: शुक्ल → ब्रह्म (शाम 5:06 के बाद)
सूर्योदय: 5:45 AM IST · सूर्यास्त: 6:36 PM IST
राहु काल: 9:00 - 10:30 AM IST (इस दौरान शुभ कार्य न करें)
अभिजित मुहूर्त: 11:46 AM - 12:34 PM IST (शुभ)
त्योहार: कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, सर्वार्थ सिद्धि योग
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संपूर्ण विस्तृत पंचांग — Today Panchangam (English)।
कालाष्टमी क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्त्व क्यों है?
कालाष्टमी प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है और यह भगवान भैरव — जो शिव के उग्र स्वरूप हैं — की उपासना का पावन दिन है। 'काल' अर्थात् समय और मृत्यु के अधिपति, तथा 'अष्टमी' अर्थात् आठवीं तिथि — इन दोनों का संयोग इस दिन को तांत्रिक और वैदिक दोनों परंपराओं में विशेष बनाता है।
स्कन्द पुराण के काशी खण्ड में वर्णित है कि भगवान काल भैरव काशी विश्वनाथ के कोतवाल हैं और वाराणसी में उनका दर्शन मोक्षदायी माना जाता है। इस दिन भैरव अष्टकम् का पाठ, सरसों के तेल का दीपदान और काले तिल से हवन अत्यंत फलदायी बताया गया है।
श्रवण नक्षत्र का पंचांग में प्रभाव और शुभाशुभ विचार
श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा हैं और इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। ऋग्वेद में 'श्रवण' शब्द श्रवण अर्थात् सुनने की शक्ति से जोड़ा गया है — यह नक्षत्र विद्याभ्यास, यात्रा, और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। आज दोपहर 1:54 बजे तक श्रवण नक्षत्र सक्रिय रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को श्रवण नक्षत्र का संयोग 'सर्वार्थ सिद्धि योग' बनाता है, जो आज पंचांग में विशेष रूप से उल्लिखित है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, व्यापारिक अनुबंध और यात्राएँ सिद्धि को प्राप्त होती हैं — यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की मान्यता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन से व्रत और पूजा विधान करें?
वार्षिक जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) के अतिरिक्त, प्रत्येक मास की कृष्ण अष्टमी को 'मासिक जन्माष्टमी' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप में — लड्डू गोपाल के रूप में — पंचामृत से अभिषेक, तुलसी अर्पण और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।
भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जो भक्त प्रतिमास कृष्ण अष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें वार्षिक जन्माष्टमी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और वृन्दावन के बाँके बिहारी मंदिर में इस तिथि पर विशेष आरती और झाँकी का आयोजन होता है।
राहु काल और अभिजित मुहूर्त — आज के दिन इनका सदुपयोग कैसे करें?
आज हैदराबाद IST के अनुसार राहु काल प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक है। राहु काल में विवाह, गृह प्रवेश, नई व्यापारिक गतिविधि, वाहन क्रय जैसे मंगल कार्य वर्जित माने गए हैं — यह मान्यता मुहूर्त चिन्तामणि ग्रन्थ पर आधारित है। हालाँकि, इस काल में भैरव या शनि देव की उपासना विशेष रूप से फलदायी बताई गई है।
अभिजित मुहूर्त आज दोपहर 11:46 से 12:34 बजे IST तक रहेगा। यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त है जिसमें किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य का शुभारंभ किया जा सकता है — महाभारत में स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अभिजित मुहूर्त की महत्ता बताई है। जो लोग आज कालाष्टमी पूजा या मासिक जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लेना चाहते हैं, वे इस मुहूर्त का उपयोग करें।
शनिवार और कृष्ण अष्टमी का संयोग — किन देवताओं की उपासना विशेष फल देती है?
शनिवार शनि देव का दिन है और कृष्ण अष्टमी भगवान भैरव तथा श्रीकृष्ण दोनों की तिथि है। इन तीनों का एक साथ आना एक दुर्लभ त्रिसंयोग है। ज्योतिष शास्त्र में शनि और राहु की पीड़ा निवारण के लिए काल भैरव की उपासना सर्वाधिक प्रभावी मानी गई है — शनि स्तोत्र और भैरवाष्टकम् का एक साथ पाठ इस दिन विशेष रूप से लाभकारी है।
तिरुवनंतपुरम् के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर, और वाराणसी के काल भैरव मंदिर में आज विशेष अभिषेक होते हैं। शनि की साढ़े साती या ढैय्या से पीड़ित जातक आज काले तिल, सरसों का तेल और नीले फूल शनि देव को अर्पित करें तथा 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
ब्रह्म योग और उसके बाद का शुभ समय — सायंकाल की पूजा के लिए मार्गदर्शन
आज शाम 5:06 बजे के बाद योग शुक्ल से परिवर्तित होकर ब्रह्म योग में प्रवेश करेगा। ब्रह्म योग को ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है — इसमें किए गए धार्मिक अनुष्ठान, ध्यान और मंत्र जाप की सिद्धि शीघ्र होती है। सूर्यास्त 6:36 PM IST पर होगा, अतः सायंकाल 5:06 से 6:36 बजे के मध्य लगभग डेढ़ घंटे का शुभ संयोग उपलब्ध है।
इस समय में संध्यावंदन, भैरव आरती, तुलसी प्रदक्षिणा और दीपदान करना अत्यंत उत्तम है। घर में गाय के घी का दीपक जलाकर 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का पाठ — दोनों देवताओं की एकसाथ आराधना — आज की तिथि का सर्वोचित आध्यात्मिक समापन होगा।




