4-10 मई 2026 के सप्ताह का वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए विस्तृत साप्ताहिक भविष्यवाणी, जिसमें करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार, शुभ रंग, अंक और प्रत्येक राशि के लिए मंत्र शामिल हैं।

सप्ताह की मुख्य बातें

  • 17 मई से अधिक मास प्रारंभ — सभी आध्यात्मिक कार्यों का फल दस गुना

  • प्रत्येक राशि के लिए ब्रह्म मुहूर्त में मंत्र जप अनुशंसित

    Advertisement
  • शुभ कार्यों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग देखें


संपूर्ण लेख — Weekly Horoscope May 4-10, 2026

4-10 मई 2026 सप्ताह में ग्रहों की स्थिति कैसी है?

इस सप्ताह सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे वैदिक ज्योतिष में 'सूर्य का वृषभ संक्रमण' कहते हैं। यह परिवर्तन भौतिक सुख, धन और स्थिरता से जुड़े विषयों को प्रभावित करता है। शुक्र — जो वृषभ और तुला राशि के स्वामी ग्रह हैं — इस काल में अपना प्रभाव और गहरा करते हैं।

बुध ग्रह इस सप्ताह मेष राशि में विचरण कर रहे हैं, जो वाणी, व्यापार और संचार को तीव्र करता है। मंगल और शनि का परस्पर दृष्टि संबंध कुछ राशियों के लिए परिश्रम की मांग करता है, जबकि गुरु (बृहस्पति) वृषभ राशि में स्थित होकर विद्या और धर्म के कार्यों को बल देते हैं। ब्रहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार गुरु जब स्वराशि या मित्र राशि में हो, तो उनकी महादशा और अंतर्दशा में जातक को विशेष लाभ प्राप्त होता है।

इस सप्ताह कौन-कौन से शुभ मुहूर्त और योग विशेष महत्वपूर्ण हैं?

सर्वार्थ सिद्धि योग वह काल होता है जब तिथि, वार और नक्षत्र का संयोग विशेष फलदायी होता है। इस सप्ताह सोमवार 4 मई और गुरुवार 7 मई को सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की संभावना है, जो नए व्यापार आरम्भ, विवाह वार्ता और महत्वपूर्ण यात्राओं के लिए उत्तम माना जाता है। मुहूर्त चिन्तामणि ग्रंथ में इस योग को 'कार्यसिद्धिकर' — अर्थात् हर कार्य को सिद्ध करने वाला — बताया गया है।

Advertisement

ब्रह्म मुहूर्त — सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले का काल — इस सप्ताह विशेष रूप से मंत्र जप और ध्यान के लिए अनुशंसित है। मंडूकोपनिषद् में ब्रह्म मुहूर्त को 'सत्त्वप्रधान काल' कहा गया है, जब मन सबसे अधिक ग्रहणशील होता है। अपनी राशि के अनुसार निर्धारित मंत्र का इस काल में 108 बार जप करने से ग्रहदोष शांत होते हैं।

अमावस्या और पूर्णिमा के निकटवर्ती दिनों में पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व होता है। इस सप्ताह यदि कृष्णपक्ष की त्रयोदशी या चतुर्दशी पड़े, तो शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे तिल और जल का अर्पण करना शनि दोष को शान्त करता है।

अधिक मास का आध्यात्मिक महत्व और राशिफल पर प्रभाव क्या है?

17 मई 2026 से प्रारंभ होने वाला अधिक मास (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) इस सप्ताह के ठीक बाद आरंभ होगा, इसलिए इस सप्ताह किए गए धार्मिक संकल्प और आध्यात्मिक तैयारी का विशेष महत्व है। स्कन्द पुराण के पुरुषोत्तम माहात्म्य खंड में कहा गया है कि अधिक मास में किए गए दान, व्रत और भगवन्नाम जप का फल सामान्य मासों की तुलना में दस गुना अधिक होता है।

इस सप्ताह यदि आप अपनी राशि के अनुसार किसी देवता का व्रत या पूजन आरंभ करना चाहते हैं, तो उसका संकल्प इसी सप्ताह ले लेना उत्तम रहेगा। मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों को सूर्य उपासना, वृषभ, कन्या और मकर राशि के जातकों को शिव अभिषेक, और मिथुन, तुला व कुंभ राशि के जातकों को विष्णु सहस्रनाम पाठ विशेष लाभकारी रहेगा।

राशि अनुसार इस सप्ताह किन उपायों से ग्रहदोष शान्त होंगे?

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है और उस ग्रह की शान्ति के लिए विशिष्ट रत्न, मंत्र और दान का विधान है। मेष और वृश्चिक राशि (मंगल स्वामी) के जातक इस सप्ताह लाल मसूर की दाल का दान करें और 'ॐ अं अंगारकाय नमः' मंत्र का जप करें। वृषभ और तुला राशि (शुक्र स्वामी) के जातकों के लिए शुक्रवार को सफेद वस्त्र और मिश्री का दान शुभ रहेगा।

मिथुन और कन्या राशि (बुध स्वामी) के जातक हरे मूंग का दान करें और 'ॐ बुं बुधाय नमः' का 108 बार जप करें। कर्क राशि (चंद्र स्वामी) के जातकों के लिए सोमवार को शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाना अत्यंत लाभकारी है। सिंह राशि (सूर्य स्वामी) के जातक रविवार को गेहूं और गुड़ का दान करें तथा आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें।

Advertisement

धनु और मीन राशि (बृहस्पति स्वामी) के जातकों के लिए गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना, चने की दाल का दान और 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र जप विशेष फलदायी है। मकर और कुंभ राशि (शनि स्वामी) के जातक शनिवार को काले तिल और सरसों के तेल का दान हनुमान मंदिर या शनि मंदिर — जैसे शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र) या तिरुनल्लार (तमिलनाडु) — में करें।

करियर और धन के लिए इस सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से क्या विशेष सावधानियां रखें?

इस सप्ताह बुध का मेष राशि में भ्रमण व्यापार और वार्ता के लिए अनुकूल है, परन्तु मंगल की तीव्र दृष्टि के कारण आवेश में लिए गए वित्तीय निर्णय हानिकारक हो सकते हैं। अर्थशास्त्र और व्यावहारिक जीवन में भी यह सत्य है कि आवेगपूर्ण निवेश प्रायः घाटे में रहते हैं। अतः बड़े व्यापारिक अनुबंध या शेयर निवेश के निर्णय इस सप्ताह सावधानी से लें।

जो जातक नौकरी परिवर्तन या नए व्यवसाय आरंभ करने पर विचार कर रहे हैं, उनके लिए गुरुवार 7 मई का सर्वार्थ सिद्धि योग सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है। विष्णु पुराण में कहा गया है — 'उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः' — अर्थात् कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। अतः ग्रहों की अनुकूलता के साथ-साथ व्यक्तिगत परिश्रम अनिवार्य है।

स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए इस सप्ताह वैदिक परंपरा क्या सुझाती है?

अथर्ववेद में स्वास्थ्य रक्षा के लिए नियमित प्राणायाम और सूर्य नमस्कार को आयुवर्धक बताया गया है। इस सप्ताह सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश के साथ पाचन तंत्र और गले से संबंधित समस्याएं कुछ राशियों को प्रभावित कर सकती हैं — विशेषकर वृषभ, सिंह और वृश्चिक राशि के जातकों को। इन जातकों को मसालेदार और तले हुए भोजन से परहेज रखना चाहिए।

मानसिक शांति के लिए इस सप्ताह प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट ध्यान (ध्यान-योग) का अभ्यास करें। मांडूक्योपनिषद् में ओंकार को 'सर्वस्य वाचकः' — समस्त ब्रह्मांड का प्रतीक — बताया गया है; अतः 'ॐ' का दीर्घ उच्चारण मन की चंचलता को शांत करता है। जो जातक किसी पुराने रोग से जूझ रहे हैं, वे इस सप्ताह वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर या तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में मनोकामना पूर्ति हेतु विशेष प्रार्थना का संकल्प ले सकते हैं।