साप्ताहिक राशिफल 18-24 मई 2026: सभी 12 राशियों के लिए
18-24 मई 2026 के सप्ताह का वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार, शुभ रंग और मंत्र।

18-24 मई 2026 के सप्ताह का वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार, शुभ रंग और मंत्र।
18-24 मई 2026 के सप्ताह का वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए विस्तृत साप्ताहिक भविष्यवाणी, जिसमें करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार, शुभ रंग, अंक और प्रत्येक राशि के लिए मंत्र शामिल हैं।
सप्ताह की मुख्य बातें
17 मई से अधिक मास प्रारंभ — सभी आध्यात्मिक कार्यों का फल दस गुना
प्रत्येक राशि के लिए ब्रह्म मुहूर्त में मंत्र जप अनुशंसित
Advertisementशुभ कार्यों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग देखें
संपूर्ण लेख — Weekly Horoscope May 18-24, 2026।
अधिक मास का ज्योतिषीय महत्व इस सप्ताह क्यों विशेष है?
17 मई 2026 से प्रारंभ हुआ अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) इस सप्ताह के समस्त ग्रहीय फलों को गहरे रूप से प्रभावित करता है। भविष्योत्तर पुराण में वर्णित है कि अधिक मास में किया गया प्रत्येक जप, दान और उपवास सामान्य मास की तुलना में दस गुना फलदायी होता है, क्योंकि इस मास के अधिदेवता स्वयं भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप हैं।
वैदिक ज्योतिष में अधिक मास को 'शुद्ध लग्न' के लिए अनुपयुक्त माना जाता है — अर्थात विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यापार के शुभारंभ इस काल में सामान्यतः वर्जित हैं। किंतु साधना, तीर्थ यात्रा, श्रीमद्भागवत पाठ और दान-पुण्य के लिए यह सप्ताह अत्यंत उत्तम है। अतः राशिफल पढ़ते समय भौतिक निर्णयों में सावधानी और आध्यात्मिक क्रियाओं में उत्साह रखें।
सप्ताह के प्रमुख ग्रह योग — सर्वार्थ सिद्धि और अन्य शुभ संयोग
सर्वार्थ सिद्धि योग तब बनता है जब वार और नक्षत्र का विशेष संयोग होता है — जैसे रविवार को हस्त नक्षत्र, सोमवार को श्रवण नक्षत्र आदि। इस सप्ताह जब भी ऐसा योग बने, उस दिन नए कार्य आरंभ करना, यात्रा पर निकलना और महत्वपूर्ण निर्णय लेना शास्त्रसम्मत माना जाता है। मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ में इस योग को 'सिद्धिदायक' कहा गया है।
इसके अतिरिक्त अमृत सिद्धि योग — जो वार और नक्षत्र के अत्यंत विशिष्ट मेल से उत्पन्न होता है — इस सप्ताह व्यापारिक संधियों और स्वास्थ्य-संबंधी उपायों के लिए विशेष लाभकारी रहेगा। पाठकों को सलाह दी जाती है कि स्थानीय पंचांग (जैसे विक्रम संवत पंचांग या दृक पंचांग) से प्रतिदिन के शुभ मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।
ब्रह्म मुहूर्त में मंत्र जप — किस राशि को कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व का काल होता है। मनुस्मृति और योगसूत्र दोनों इस बेला को साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ बताते हैं, क्योंकि इस समय वातावरण में सत्त्वगुण की प्रधानता रहती है और मन सहजतः एकाग्र होता है। इस सप्ताह अधिक मास होने के कारण ब्रह्म मुहूर्त का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अग्नि तत्व राशियों (मेष, सिंह, धनु) के लिए 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' का 108 बार जप लाभकारी रहेगा। जल तत्व राशियों (कर्क, वृश्चिक, मीन) के लिए 'ॐ सों सोमाय नमः' उपयुक्त है। पृथ्वी तत्व राशियों (वृष, कन्या, मकर) को 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं' का जप करना चाहिए, जबकि वायु तत्व राशियों (मिथुन, तुला, कुंभ) के लिए 'ॐ बुं बुधाय नमः' अथवा 'ॐ शं शनिश्चराय नमः' — ग्रह स्वामी के अनुसार — उचित रहेगा।
इस सप्ताह किन राशियों के लिए ग्रह गोचर विशेष रूप से प्रभावशाली है?
वैदिक ज्योतिष में गोचर (ग्रहों की वर्तमान स्थिति) और जन्मकालीन राशि का सम्बन्ध फल निर्धारण का आधार है। 18-24 मई 2026 के सप्ताह में शनि का कुंभ राशि में गोचर उन जातकों के लिए दीर्घकालिक परिणाम दे रहा है जिनकी जन्म राशि वृष, सिंह अथवा वृश्चिक है — क्योंकि ये राशियाँ शनि से क्रमशः दसवें, सातवें और चौथे भाव में पड़ती हैं।
बृहस्पति (गुरु) का गोचर मिथुन राशि में इस सप्ताह मिथुन, तुला और कुंभ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ है — विद्या, संतान और धन के क्षेत्र में। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार गुरु जब लग्न, पंचम या नवम भाव से गोचर करे तो जातक को मान, यश और अध्यात्म में उन्नति मिलती है।
सप्ताह के दौरान कौन से उपाय सभी राशियों के लिए सार्वभौमिक रूप से लाभकारी हैं?
अधिक मास में प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल अर्पण और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप सभी बारह राशियों के लिए शास्त्रसम्मत उपाय है। पद्म पुराण में वर्णित है कि तुलसी सेवन और विष्णु स्मरण का संयोग ग्रहजनित पीड़ा को शांत करता है।
शुक्रवार को किसी भी शक्तिपीठ — चाहे वह काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी) हो, तिरुपति बालाजी (आंध्र प्रदेश) हो या महाकालेश्वर (उज्जैन) — में दीप दान करना इस सप्ताह विशेष फलदायी रहेगा। यदि मंदिर जाना संभव न हो तो घर में ही पूर्व दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाएं और 'ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी' स्तोत्र का पाठ करें।
इस सप्ताह शनिवार को सरसों के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष में अर्पित करना शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित सभी राशियों के लिए लाभकारी माना जाता है — यह उपाय स्कंद पुराण की परंपरा पर आधारित है।
वैदिक ज्योतिष में साप्ताहिक राशिफल कैसे पढ़ें — एक व्यावहारिक मार्गदर्शन
वैदिक ज्योतिष में राशि का अर्थ केवल सूर्य राशि नहीं, बल्कि चंद्र राशि (जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो) है। अतः पाठकों को अपनी जन्मपत्रिका में चंद्र राशि की पहचान कर उस राशि का फल पढ़ना चाहिए — केवल जन्म माह के आधार पर नहीं।
यदि जन्मपत्रिका उपलब्ध न हो, तो लग्न राशि (जन्म के समय का उदय लग्न) का फल भी उतना ही प्रासंगिक होता है। बृहज्जातक ग्रंथ में भी यह स्पष्ट किया गया है कि चंद्र लग्न और सूर्य लग्न दोनों को मिलाकर देखने से राशिफल का सटीक अर्थ निकलता है। किसी विशेष ग्रहीय दशा या महादशा के काल में किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत कुंडली का अध्ययन करवाना सदैव अधिक विश्वसनीय रहता है।




