मई 2026 मासिक राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए
मई 2026 मासिक वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार और अधिक मास का प्रभाव।

मई 2026 मासिक वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए करियर, प्रेम, स्वास्थ्य, परिवार और अधिक मास का प्रभाव।
मई 2026 का संपूर्ण मासिक वैदिक राशिफल — सभी 12 राशियों के लिए महीने भर की विस्तृत भविष्यवाणी। यह महीना अधिक मास (17 मई - 15 जून) के कारण विशेष रूप से शक्तिशाली है।
मई 2026 के मुख्य ज्योतिषीय बिंदु
1 मई: बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयंती
15 मई: वृषभ संक्रांति — सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश
Advertisement16 मई: वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या
17 मई: अधिक मास प्रारंभ — सभी कार्यों का फल दस गुना
25 मई: गंगा दशहरा
26-27 मई: पद्मिनी एकादशी (अधिक एकादशी)
संपूर्ण मासिक राशिफल — May 2026 Monthly Horoscope (English)।
अधिक मास 2026 का ज्योतिषीय महत्त्व क्या है?
अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहते हैं, वह अतिरिक्त चंद्र मास है जो लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है। 2026 में यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष में यह मास सूर्य-संक्रांति-रहित होता है, अर्थात इस पूरे महीने में सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता — इसीलिए इसे विशेष रूप से आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम माना जाता है।
पद्म पुराण के अनुसार अधिक मास में किया गया जप, दान, और विष्णु-पूजन सामान्य मासों की अपेक्षा दस गुना अधिक फलदायी होता है। इस मास के अधिपति स्वयं भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इसे 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की गति इस काल में सूक्ष्म रूप से धीमी प्रतीत होती है, जिससे शुभ ग्रहों के प्रभाव दीर्घकाल तक स्थिर रहते हैं।
मई 2026 में प्रमुख ग्रह-स्थितियाँ और उनका राशियों पर प्रभाव
मई 2026 में शनि देव कुंभ राशि में विचरण कर रहे होंगे, जो वायु तत्त्व की राशि है। इसका सीधा प्रभाव मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों पर अनुकूल रूप से पड़ेगा, जबकि वृश्चिक और सिंह राशि के जातकों को धैर्य रखने की आवश्यकता होगी। गुरु (बृहस्पति) का वृषभ राशि में गोचर मेष और मिथुन राशि के जातकों के लिए करियर तथा आर्थिक उन्नति का संकेत देता है।
15 मई को वृषभ संक्रांति पर सूर्य मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। वृषभ पृथ्वी तत्त्व की राशि है, जो स्थिरता, संपदा और भौतिक सुख का प्रतीक है। इस संक्रांति के आसपास कोई भी नया व्यापारिक निर्णय या भूमि-संपत्ति से जुड़ा कार्य शुभ फल देने वाला माना जाता है। बुध का शीघ्रगामी होना मई के उत्तरार्ध में संचार, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोलेगा।
बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती — 1 मई 2026 का विशेष महत्त्व
1 मई 2026 को एक साथ दो महत्त्वपूर्ण तिथियाँ पड़ रही हैं — बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती। कूर्म जयंती भगवान विष्णु के दूसरे अवतार कूर्म (कछुए) के प्रकट होने का पर्व है। श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में वर्णित है कि समुद्र-मंथन के समय भगवान विष्णु ने मंदराचल पर्वत का भार धारण करने के लिए कूर्म रूप धारण किया था।
ज्योतिष की दृष्टि से पूर्णिमा तिथि चंद्रमा की पूर्ण शक्ति का दिन होती है। वैशाख पूर्णिमा पर चंद्रमा विशेष रूप से तेजस्वी होता है और मन, भावनाएँ एवं संबंधों को प्रभावित करता है। इस दिन प्रयागराज के संगम, उज्जैन के सिप्रा तट और हरिद्वार के हर की पौड़ी पर स्नान एवं दान को असाधारण पुण्यकारी माना जाता है। कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए यह दिन विशेष रूप से आत्मिक उन्नति का अवसर लेकर आता है।
वट सावित्री व्रत और शनि जयंती — 16 मई 2026 को क्या करें?
16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या है, जिस दिन एक साथ वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का संयोग बन रहा है। वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों द्वारा वटवृक्ष (बरगद) की पूजा के माध्यम से पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है। महाभारत के वन पर्व में सत्यवान-सावित्री की कथा इस व्रत का मूल आधार है — जहाँ सावित्री ने यमराज से तर्क करके अपने पति के प्राण वापस लिए थे।
उसी दिन शनि जयंती पड़ने से कर्म और न्याय के देवता शनि देव की उपासना का विशेष महत्त्व है। शनि के प्रकोप से मुक्ति के लिए इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाना, काली उड़द का दान और शनि स्त्रोत्र का पाठ अत्यंत लाभदायक माना जाता है। मकर और कुंभ राशि के जातक, जिनके राशीश शनि हैं, उन्हें इस दिन विशेष रूप से शनि महाराज की आराधना करनी चाहिए।
गंगा दशहरा 2026 — पापों के नाश और ज्योतिषीय शुद्धि का पर्व
25 मई 2026 को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। पद्म पुराण और देवी भागवत में उल्लेख है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। 'दशहरा' शब्द का अर्थ है 'दश' (दस) प्रकार के पापों का हरण — जिनमें तीन मानसिक, चार वाणी-जनित और तीन कर्म-जनित पाप सम्मिलित हैं। इस दिन हरिद्वार, वाराणसी और इलाहाबाद में गंगा स्नान का विशेष महात्म्य है।
ज्योतिषीय दृष्टि से गंगा दशहरा के आसपास चंद्रमा की वृद्धि तिथियाँ होती हैं, जो शुद्धि और नवीनीकरण के लिए उत्तम होती हैं। इस वर्ष अधिक मास की छाया में यह पर्व आ रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा। जिन राशियों के जातकों पर केतु या राहु की साढ़ेसाती चल रही हो, उनके लिए इस दिन गंगा जल से स्नान और दान विशेष रूप से लाभकारी रहेगा।
अधिक एकादशी (पद्मिनी एकादशी) 2026 — उपवास और विष्णु-भक्ति का सर्वश्रेष्ठ दिन
26-27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी, जिसे अधिक एकादशी भी कहते हैं, अधिक मास की एकादशी होने के कारण अत्यंत विशिष्ट है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि अधिक मास की एकादशी का व्रत अन्य सभी एकादशियों में श्रेष्ठ है और यह व्रत करने वाले को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की कमल-पुष्पों से पूजा का विशेष विधान है, इसीलिए इसे 'पद्मिनी' कहा जाता है।
सभी 12 राशियों के जातकों के लिए इस एकादशी पर निर्जला या फलाहार उपवास, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और तुलसी-अर्पण अत्यंत शुभ फल देते हैं। विशेष रूप से मेष, सिंह और धनु राशि के जातक, जो अग्नि तत्त्व के हैं, उन्हें इस दिन धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। तिरुपति बालाजी, पंढरपुर के विठ्ठल मंदिर और मथुरा-वृंदावन के वैष्णव मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।




