पश्चिमी घाटों के घने जंगलों में, पेरियार बाघ अभयारण्य से घिरे, 1,800 फीट की ऊँचाई पर सबरीमाला — शिव और मोहिनी की संतान भगवान अयप्पा का निवास है। यहाँ जाति-भेद नहीं, धर्म-भेद नहीं, लिंग-प्रधानता नहीं। अनुशासन ही देव है।

महिषी का वरदान और अयप्पा का जन्म

महिषी, महिषासुर की बहन, ने ब्रह्मा से वरदान पाया कि वह केवल शिव और विष्णु की संतान से मारी जा सकती है — दो पुरुष देवताओं की संतान असंभव। इस गतिरोध को हल करने के लिए विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया, और शिव से उनके मिलन से मणिकंठ जन्मे। पांड्य वंशी राजा राजशेखर ने उन्हें पुत्र की भाँति पाला।

41 दिनों का मंडल व्रत

  • 41 दिन काले या भगवा वस्त्र। अन्य कुछ नहीं, जूते नहीं।
  • तुलसी माला पहले दिन धारण; सबरीमाला से लौटने तक नहीं उतरती।
  • कठोर ब्रह्मचर्य, धरती पर शयन।
  • शुद्ध शाकाहार — प्याज, लहसुन, कैफीन वर्जित।
  • प्रतिदिन भोर का स्नान, पूजा, भागवत पाठ।
  • वाणी संयम। हर अन्य व्यक्ति को "स्वामी" कहकर संबोधित करें।

अठारह पवित्र सोपान

गर्भगृह के आगे अठारह स्वर्ण सोपान — पतिनेट्टम पडि। केवल पूर्ण व्रत और इरुमुडि (पवित्र पोटली) धारण करने वाला भक्त चढ़ सकता है। हर सोपान एक परत: पंचभूत (1-5), आठ वृत्तियाँ (6-13), तीन गुण (14-16), विद्या-अविद्या (17-18)।

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मकरज्योति का चमत्कार

मकर संक्रांति की रात (14 जनवरी), सन्निधि के सामने पोन्नंबलमेडु पहाड़ी पर एक दिव्य प्रकाश प्रकट होता है — यह करोड़ों भक्तों का अनुभव है। पृथ्वी, देवता और भक्ति के बीच जीवंत संबंध का प्रत्यक्ष चिह्न।

वन यात्रा

एरुमेली से यात्रा पेट्टा थुल्लल — रंगों में ढंका नृत्य — से शुरू होती है, जहाँ हर सामाजिक पहचान घुलकर बह जाती है। 65 किमी जंगल मार्ग। पंबा नदी पर शुद्धि स्नान। अंतिम पर्वतारोहण नंगे पैर।

  • व्रत को पूरी निष्ठा से पालन करें — आधा अनुशासन कोई परिवर्तन नहीं देता।
  • इरुमुडि सिर पर ले जाएँ — पंबा से सन्निधि तक।
  • हर अन्य यात्री को "स्वामिये शरणं अयप्पा" से नमन करें।
  • पर्वतारोहण से पूर्व पंबा स्नान करें।

स्वामिये शरणं अयप्पा।