एकलव्य ने कुरुक्षेत्र युद्ध में भाग नहीं लिया। कारण — युद्ध आरंभ होने से पहले ही श्रीकृष्ण के हाथों उसकी मृत्यु हो चुकी थी।


1. एकलव्य की मृत्यु

द्रोणाचार्य को अपना अंगूठा गुरु-दक्षिणा में देने के बाद भी एकलव्य ने दृढ़ता से शेष अंगुलियों से धनुर्विद्या सिद्ध की। किंतु वह मगध के राजा जरासंध का मित्र बन गया — और जरासंध कृष्ण का शत्रु था। जरासंध ने जब मथुरा पर आक्रमण किया, एकलव्य ने उसकी सहायता की।

2. श्रीकृष्ण से युद्ध

यादवों व जरासंध की सेना के बीच एक युद्ध में एकलव्य ने कृष्ण का सामना किया। उसकी असाधारण युद्ध-कुशलता देखकर तथा यह जानकर कि वह भविष्य में धर्म (पांडवों) के विरुद्ध खड़ा होगा, कृष्ण ने उसका वध किया। (कुछ ग्रंथों अनुसार सुदर्शन चक्र से, कुछ में शिला से।)

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3. कृष्ण का अर्जुन से कथन

“अर्जुन! तुम्हारे हित हेतु मैंने पहले ही जरासंध, शिशुपाल व एकलव्य का अंत कर दिया। यदि एकलव्य जीवित रहता तो वह कौरवों की ओर से लड़ता। अंगूठे के बिना भी वह युद्ध में अजेय था; उसे जीतना किसी के लिए संभव न था।”

4. एकलव्य का पुत्र

यद्यपि एकलव्य स्वयं नहीं लड़ा, उसका पुत्र केतुमान कुरुक्षेत्र युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ा — और भीम के हाथों मारा गया।


निष्कर्ष

यह जानकर कि एकलव्य की अद्वितीय प्रतिभा अर्जुन से भी आगे निकल जाएगी और वह अधर्म का साथ देगा, कृष्ण ने युद्ध से पहले ही उसका अंत कर दिया। अतः वह कुरुक्षेत्र युद्ध में उपस्थित नहीं था।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकलव्य को किसने मारा?

श्रीकृष्ण ने। यादव-जरासंध संघर्ष में, यह जानकर कि एकलव्य भविष्य में अधर्म का साथ देगा, कृष्ण ने उसका वध किया।

क्या एकलव्य का पुत्र युद्ध में लड़ा?

हाँ। एकलव्य का पुत्र केतुमान कौरवों की ओर से लड़ा और भीम के हाथों मारा गया।

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