बेंगलुरु के ब्यातरायणपुर में नारायणप्पा नाम के 70 वर्षीय एक रिटायर्ड बस कंडक्टर रहते थे। उनकी पत्नी लक्ष्मी का पाँच साल पहले देहांत हो चुका था। दो बच्चे थे — बेटा रमेश अमेरिका में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, और बेटी सुमा दुबई में नर्स।

नारायणप्पा अकेले रहते थे। हर महीने ₹18,000 पेंशन आती थी। उसमें से ₹8,000 किराए में चले जाते, और बचे ₹10,000 में दवाइयाँ, भोजन और बिजली का बिल बस किसी तरह पूरा होता।

हर रविवार वे बच्चों को वीडियो कॉल करते। "कैसे हो पापा?" वे पूछते, पर बच्चों का जवाब हमेशा एक ही होता…

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"Busy पापा… बाद में बात करते हैं।"

काश मेरी ज़िंदगी का भी रीचार्ज होता

दो साल से नारायणप्पा को किडनी की समस्या थी। हफ़्ते में दो बार डायलिसिस कराना पड़ता — हर बार लगभग ₹2,000, यानी महीने के ₹16,000।

एक दिन डॉक्टर ने कहा: "नारायणप्पा जी, किडनी ट्रांसप्लांट हो जाए तो जीने का मौका है। ख़र्च लगभग ₹10 लाख आएगा।"

नारायणप्पा मुस्कुराते हुए बोले: "डॉक्टर साहब, मेरा बेटा महीने के ₹5 लाख कमाता है। पर मुझसे पाँच मिनट बात करने का समय उसके पास नहीं। फिर मेरे लिए ₹10 लाख कहाँ से ख़र्च करेगा?"

उसी दिन से उन्होंने एक फ़ैसला किया। डायलिसिस बंद कर दिया। बच्चों को कुछ नहीं बताया।

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"प्रीपेड मृत्यु" नाम की डायरी

फिर उन्होंने एक डायरी ख़रीदी और उसे नाम दिया — "Prepaid Death" (प्रीपेड मृत्यु)। पहले ही पन्ने पर लिखा:

"जियो, एयरटेल की तरह मेरी ज़िंदगी को भी रीचार्ज चाहिए। पर कोई करेगा नहीं। इसलिए अपनी मृत्यु का भुगतान मैं ख़ुद, पहले ही कर रहा हूँ।"

हर दिन वे एक काम पूरा करते और उसके आगे लिख देते — "PAID"।

  • अपनी तस्वीर फ़्रेम करवाई — PAID
  • श्मशान में अपनी जगह चुनकर अग्रिम राशि दे दी — PAID
  • अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियाँ ख़रीद लीं — PAID
  • तेरहवीं के कर्मकांड के लिए दक्षिणा के लिफ़ाफ़े तैयार रखे — PAID
  • बच्चों के लिए आख़िरी पत्र लिख दिया — PAID

आख़िरी 48 घंटे

बीस दिन बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। पड़ोसी पापन्ना ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।

डॉक्टर ने रमेश को फ़ोन किया: "आपके पिता के पास सिर्फ़ 48 घंटे हैं। तुरंत आइए।"

रमेश: "डॉक्टर, मैं एक प्रोजेक्ट डिलीवरी में हूँ। तीन हफ़्ते लगेंगे। आप वीडियो कॉल कर दीजिए।"

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डॉक्टर हैरान रह गए। उन्होंने सुमा को फ़ोन किया। वह बोली: "टिकट एक लाख रुपये का पड़ेगा। अभी आना मुमकिन नहीं। पैसे भेज देती हूँ।"

नारायणप्पा यह सब सुनकर बस मुस्कुरा दिए। डायरी का आख़िरी पन्ना खोला। उस पर लिखा था:

डायलिसिस — बंद कर दिया। PAID. बच्चों से उम्मीदें — शून्य। PAID. ज़िंदगी — कल ख़त्म होगी। पहले ही PAID.

नीचे एक और वाक्य:

"अपनी मृत्यु का रीचार्ज मैंने ख़ुद कर लिया। मुझे एक मिस्ड कॉल देने वाला भी कोई नहीं। इसलिए अपना पूरा टॉक-टाइम मैंने ख़ुद ही इस्तेमाल कर लिया।"

उसी रात नारायणप्पा शांति से सदा के लिए सो गए।

दो पत्र

तीन हफ़्ते बाद बच्चे आए। पापन्ना ने उन्हें दो लिफ़ाफ़े दिए।

रमेश के नाम:

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"बेटा, अमेरिका से आने में एक लाख रुपये ख़र्च होते हैं न। मेरी लाश देखने के लिए इतना ख़र्च मत करना। यह ₹500 बस का किराया है। मेरी समाधि पर दो मिनट खड़े होकर चले जाना। तेरे समय का भुगतान मैंने ख़ुद, पहले ही PAID कर दिया है। — तेरा Prepaid Appa"

सुमा के नाम:

"बेटी, तू सैकड़ों लोगों की सेवा करती है। पर अपने पिता के डायलिसिस के समय नहीं आ सकी। कोई बात नहीं। इन ₹500 से एक फूलों की माला ख़रीदकर मेरी समाधि पर रख देना। मैं इंतज़ार नहीं करूँगा। पहले ही PAID करके चला गया हूँ। — तेरा Prepaid Appa"

आख़िरी पन्ना

डायरी के आख़िरी पन्ने पर, लाल अक्षरों में लिखा था:

"बच्चों… तुम्हारा प्यार Incoming Calls Free जैसा है। पर तुमने एक Missed Call तक नहीं दी। इसलिए मैं Outgoing हो गया। Balance Zero. Validity Over. Number Not Reachable — Forever."

सीख

माता-पिता प्रीपेड सिम की तरह होते हैं। समय, प्रेम और देखभाल का रीचार्ज न दिया जाए, तो एक दिन वे "Not Reachable" हो जाते हैं। उसके बाद कितना भी दुख मनाओ, कितना भी पैसा ख़र्च करो, कितने भी आँसू बहाओ — कोई फ़ायदा नहीं होता।

"Busy" कोई कारण नहीं है।

आज ही अपने माता-पिता को एक फ़ोन कॉल कीजिए। वे जब तक हैं, तब तक अपना प्रेम दिखाइए। क्योंकि उनके जाने के बाद… सिर्फ़ यही जवाब बचता है — "नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।"

माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है। 🙏