संक्षिप्त उत्तर: पोंगल 2027 का मुख्य पर्व थाई पोंगल 14 जनवरी 2027 [VERIFY] को मकर संक्रांति के साथ मनाया जाएगा। यह चार-दिवसीय तमिल फसल उत्सव 14 जनवरी (भोगी से पूर्व) से 17 जनवरी 2027 [VERIFY] तक भोगी, थाई पोंगल, मट्टु पोंगल और कानुम पोंगल के रूप में मनाया जाता है।

पोंगल तमिलनाडु और आसपास के दक्षिण भारतीय क्षेत्रों का सबसे बड़ा फसल उत्सव है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व सूर्य देव, प्रकृति और खेती में सहायक पशुओं के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर है। 'पोंगल' शब्द का अर्थ है 'उबलना' या 'उफान आना' — नए चावल, दूध और गुड़ को मिट्टी की हांडी में तब तक पकाया जाता है जब तक वह उफनकर बाहर न आ जाए, जिसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

यह पर्व तमिल महीने 'थाई' के पहले दिन आरंभ होता है और सामान्यतः उत्तर भारत की मकर संक्रांति के साथ ही पड़ता है, क्योंकि दोनों ही सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण) से जुड़े हैं। पोंगल 2027 में मुख्य दिन थाई पोंगल 14 जनवरी 2027 [VERIFY] को मनाए जाने की संभावना है।

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पोंगल 2027 की तिथियाँ

पोंगल चार दिनों का पर्व है। नीचे दी गई तिथियाँ प्रचलित पंचांग के अनुसार हैं; अपने परिवार, कुल-परंपरा और स्थानीय मंदिर/पंचांग के अनुसार पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि सूर्य-संक्रमण के समय के आधार पर स्थानीय पंचांगों में एक दिन का अंतर संभव है।

  • उत्सव का नामपोंगल (थाई पोंगल)
  • अवधि4 दिन
  • आरंभ (भोगी)13 जनवरी 2027 [VERIFY]
  • मुख्य दिन (थाई पोंगल)14 जनवरी 2027 [VERIFY]
  • तीसरा दिन (मट्टु पोंगल)15 जनवरी 2027 [VERIFY]
  • चौथा दिन (कानुम पोंगल)16 जनवरी 2027 [VERIFY]
  • संबंधित पर्वमकर संक्रांति
  • मुख्य क्षेत्रतमिलनाडु, पुद्दुचेरी व दक्षिण भारत

नोट: कुछ पंचांगों में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय के अनुसार थाई पोंगल 15 जनवरी 2027 [VERIFY] को भी माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में चारों दिन एक दिन आगे खिसक जाते हैं। किसी भी तिथि को अंतिम मानने से पहले अपने स्थानीय तमिल पंचांग या मंदिर से पुष्टि करें।

पोंगल के चार दिन और उनका महत्व

पहला दिन — भोगी पोंगल

भोगी पोंगल पुराने को त्यागकर नए का स्वागत करने का दिन है। इस दिन घर की सफाई की जाती है, पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाया जाता है, और परंपरागत रूप से 'भोगी मंटालु' (अलाव) जलाया जाता है। इस दिन को इंद्र देव और वर्षा के प्रति आभार से भी जोड़ा जाता है। ध्यान रहे कि अलाव व किसी भी खुली आग के संबंध में स्थानीय नियमों और वायु-गुणवत्ता संबंधी निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

दूसरा दिन — थाई पोंगल (मुख्य दिन)

यह पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। सूर्योदय के बाद आँगन में मिट्टी की नई हांडी में नए चावल, दूध और गुड़ से 'पोंगल' पकाया जाता है। जब यह उफनकर बाहर आता है तो परिवार 'पोंगलो पोंगल!' का उद्घोष करता है। यह प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। यह दिन प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

तीसरा दिन — मट्टु पोंगल

'मट्टु' का अर्थ है बैल/पशु। यह दिन खेती में सहायक गाय, बैल और अन्य पशुओं के प्रति आभार को समर्पित है। पशुओं को नहलाकर, सजाकर, सींगों को रंगकर उनकी पूजा की जाती है और विशेष भोजन दिया जाता है। तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में इसी दिन पारंपरिक 'जल्लिकट्टु' जैसे आयोजन भी होते हैं, जो स्थानीय नियमों व न्यायालयी निर्देशों के अधीन होते हैं।

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चौथा दिन — कानुम पोंगल

'कानुम' का अर्थ है 'देखना/मिलना'। यह दिन परिवार और सामाजिक मेल-मिलाप का है। लोग रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने जाते हैं, सैर-सपाटे पर निकलते हैं और भाई-बहन के स्नेह-संबंध को याद करते हैं। यह पर्व का समापन दिन है।

पोंगल पूजा एवं पकाने की विधि

  1. सूर्योदय के बाद घर के आँगन या रसोई के स्वच्छ स्थान को गोबर/जल से लीपकर कोलम (रंगोली) बनाएँ।
  2. मिट्टी की नई हांडी लें और उसकी गर्दन पर हल्दी की गाँठ व ताजे अदरक/हल्दी के पत्ते बाँधें।
  3. हांडी में नया चावल, दूध, जल और गुड़ डालकर खुली आँच पर पकाएँ।
  4. जब मिश्रण उफनकर बाहर आने लगे तो 'पोंगलो पोंगल' कहते हुए इसे शुभ मानें।
  5. तैयार पोंगल में गुड़, काजू, किशमिश व घी मिलाकर मीठा 'सक्करै पोंगल' या नमकीन 'वेन पोंगल' बनाएँ।
  6. सूर्य देव को केला, गन्ना, नारियल व पोंगल का भोग अर्पित करें और आभार व्यक्त करें।
  7. प्रसाद परिवार व अतिथियों में बाँटें।

पूजा विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती है; ऊपर दी गई विधि सामान्य परंपरा पर आधारित है। अपने कुल और स्थानीय मंदिर की परंपरा का अनुसरण करें।

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • तमिलनाडु: चारों दिन विस्तार से मनाए जाते हैं; थाई पोंगल मुख्य दिन है।
  • आंध्र प्रदेश व तेलंगाना: इसी अवधि में संक्रांति तीन दिन (भोगी, संक्रांति, कनुमा) के रूप में मनाई जाती है।
  • कर्नाटक: 'मकर संक्रांति' के रूप में एळ्ळु-बेल्ल (तिल-गुड़) बाँटकर मनाई जाती है।
  • उत्तर व पश्चिम भारत: यही सूर्य-संक्रमण मकर संक्रांति, लोहड़ी व उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है।
  • प्रवासी तमिल समुदाय: सिंगापुर, मलेशिया, श्रीलंका, अमेरिका व यूरोप में मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों में सामूहिक पोंगल आयोजित होता है।

पोंगल कौन और कैसे मनाता है

पोंगल किसी एक वर्ग तक सीमित व्रत या उपवास नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय का सामूहिक फसल-उत्सव है। इसे स्त्री-पुरुष, बच्चे-बुजुर्ग सभी मिलकर मनाते हैं। यह मुख्यतः तमिल हिन्दू परिवारों का पर्व है, पर कृषि-आधारित समाज में यह सभी के लिए आभार और आनंद का अवसर है।

कैसे मनाएँक्या करें
घर की तैयारीसफाई, कोलम/रंगोली, नए वस्त्र
पूजासूर्य देव को पोंगल, गन्ना, केला व नारियल का भोग
भोजनसक्करै पोंगल, वेन पोंगल व पारंपरिक व्यंजन
पशु-सम्मानमट्टु पोंगल पर गाय-बैल की पूजा
मेल-मिलापकानुम पोंगल पर परिजनों से मिलना

यदि पर्व के दौरान कोई सामूहिक व्रत या उपवास रखना चाहें तो यह वैकल्पिक व पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है। किसी भी चिकित्सा-स्थिति वाले, गर्भवती अथवा अस्वस्थ व्यक्ति को उपवास से पूर्व चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोंगल 2027 कब है?

पोंगल 2027 का मुख्य पर्व थाई पोंगल 14 जनवरी 2027 [VERIFY] को मनाए जाने की संभावना है। चार-दिवसीय उत्सव भोगी से आरंभ होकर कानुम पोंगल तक, लगभग 13 से 16 जनवरी 2027 [VERIFY] तक चलता है। तिथि की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।

पोंगल कितने दिन का पर्व है?

पोंगल चार दिनों का उत्सव है — भोगी पोंगल, थाई पोंगल, मट्टु पोंगल और कानुम पोंगल। प्रत्येक दिन का अलग महत्व है, जिसमें थाई पोंगल मुख्य दिन माना जाता है।

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पोंगल और मकर संक्रांति में क्या संबंध है?

दोनों पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण) से जुड़े हैं और सामान्यतः एक ही दिन पड़ते हैं। तमिलनाडु में इसे थाई पोंगल और उत्तर भारत में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।

पोंगल में क्या पकाया जाता है?

मुख्य रूप से नए चावल, दूध और गुड़ से मिट्टी की नई हांडी में 'पोंगल' पकाया जाता है। मीठा रूप 'सक्करै पोंगल' और नमकीन रूप 'वेन पोंगल' कहलाता है। इसे सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

मट्टु पोंगल क्यों मनाया जाता है?

मट्टु पोंगल खेती में सहायक पशुओं — विशेषकर गाय और बैल — के प्रति आभार का दिन है। इस दिन पशुओं को नहलाकर, सजाकर उनकी पूजा की जाती है और विशेष भोजन कराया जाता है।

क्या पोंगल में उपवास रखा जाता है?

पोंगल मुख्यतः फसल-उत्सव और आभार का पर्व है, अनिवार्य उपवास का नहीं। यदि कोई पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपवास रखे, तो चिकित्सा-स्थिति वाले, गर्भवती या अस्वस्थ व्यक्ति को पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

पोंगल कौन मना सकता है?

पोंगल पूरे परिवार और समुदाय का सामूहिक पर्व है — स्त्री, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी इसे मिलकर मनाते हैं। यह मुख्यतः तमिल परंपरा का पर्व है, पर सभी इसमें सम्मिलित हो सकते हैं। अपने परिवार व मंदिर की परंपरा का अनुसरण करें।

भोगी पर अलाव जलाने में क्या सावधानी रखें?

भोगी पर पारंपरिक रूप से अलाव जलाया जाता है, पर खुली आग व अलाव के संबंध में स्थानीय नियमों और वायु-गुणवत्ता संबंधी निर्देशों का पालन आवश्यक है। सुरक्षा को प्राथमिकता दें और अनधिकृत या असुरक्षित तरीके से आग न जलाएँ।