संक्षिप्त उत्तर: वरलक्ष्मी व्रतम 2026 पूजा विधि का केंद्र देवी वरलक्ष्मी रूप में कलशम स्थापना, तोरम बाँधना, और श्री सूक्त व अष्टोत्तर सहित 16-चरण षोडशोपचार है, इसके बाद व्रत कथा व नैवेद्य। यह अधिकांश पंचांगों में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को, स्थानीय पंचांग से पुष्ट प्रातः लग्न काल में रखा जाता है।

यह वरलक्ष्मी व्रतम पूजा की व्यावहारिक, चरण-दर-चरण गाइड है, ऐसे लिखी कि प्रथम-बार भक्त बिना पुरोहित घर पर कर सके। इस वर्ष तिथि हेतु देखें 21-या-28-अगस्त व्याख्या; पूर्ण पृष्ठभूमि हेतु वरलक्ष्मी व्रतम 2026 पूर्ण गाइड

आरंभ से पूर्व — एक दिन पहले तैयारी

  • पूजा स्थान व ईशान कोण, जहाँ कलशम रखेंगे, स्वच्छ करें।
  • कलशम पात्र, चावल, जल, सिक्के, आम के पत्ते, नारियल, व लक्ष्मी मुखम (यदि उपयोग करें) तैयार रखें।
  • तोरम धागे, हल्दी, कुमकुम, फूल व नैवेद्य सामग्री तैयार रखें।
  • ताज़ा वस्त्र व चावल-आटे के कोलम सहित पीठ (चौकी) तैयार करें।

चरण 1 — कलशम स्थापना

  1. पीठ पर छोटा चावल/कोलम आधार बनाकर कलशम पात्र रखें।
  2. पात्र आंशिक चावल या जल से भरें, कुछ सिक्के, हल्दी व सुपारी डालें।
  3. रिम के चारों ओर पाँच या सात आम पत्ते सजाएँ।
  4. हल्दी-लगा नारियल ऊपर रखें; लक्ष्मी मुखम लगाकर छोटी साड़ी, आभूषण व माला पहनाएँ।
  5. कलशम को ऐसे रखें कि भक्त यथासंभव पूर्वाभिमुख बैठे।

चरण 2 — तोरम

तोरम तैयार करें — नौ गाँठ व फूलों सहित हल्दी-रंगा धागा। यह देवी के साथ पूजित होकर पूजा के बाद दाहिनी कलाई पर बाँधा जाता है। व्रत रखने वाली प्रत्येक स्त्री हेतु एक तोरम रखें।

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चरण 3 — 16-चरण षोडशोपचार

उपचारअर्थक्रिया
आवाहनआमंत्रणकलशम में वरलक्ष्मी को आमंत्रित करें
आसनआसनअक्षत सहित आसन दें
पाद्य / अर्घ्यजलपैर व हाथ हेतु जल दें
स्नानस्नानप्रतीकात्मक अभिषेक / पंचामृत दें
वस्त्रवस्त्रसाड़ी/वस्त्र व ब्लाउज़ पीस दें
आभरणआभूषणआभूषण व चूड़ियाँ दें
गंधचंदनचंदन लगाएँ
पुष्पफूलफूल व अष्टोत्तर अर्पित करें
धूप / दीपधूप / दीपधूप व घी दीप दिखाएँ
नैवेद्यभोजनतैयार प्रसाद अर्पित करें
ताम्बूल / आरतीसमापनताम्बूलम दें व आरती करें

चरण 4 — अष्टोत्तर, श्री सूक्त व कथा

श्री वरलक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम) प्रत्येक नाम पर फूल/कुमकुम अर्पित करते हुए पढ़ें, फिर श्री सूक्त। वरलक्ष्मी व्रतम कथा पढ़ें — चारुमती की कथा, जिसे देवी स्वप्न में दिखीं। आरती से समापन करें।

चरण 5 — तोरम व ताम्बूलम

तोरम दाहिनी कलाई पर बाँधें। अवसर पर आमंत्रित सुहागिनों (मुत्तैदुव) को ताम्बूलम (पान, सुपारी, फल, ब्लाउज़ पीस व दक्षिणा) दें, व प्रसाद वितरित करें।

उपलब्ध समय अनुसार तीन संस्करण

  1. 30-मिनट कार्य-प्रातः: कलशम स्थापना, संक्षिप्त आवाहन, संक्षेप अष्टोत्तर, नैवेद्य, आरती, तोरम बाँधें।
  2. 60-मिनट मानक: पूर्ण षोडशोपचार, पूर्ण अष्टोत्तर, श्री सूक्त, कथा, आरती।
  3. 120-मिनट परंपरागत: विस्तृत कलशम सज्जा, लक्ष्मी अभिषेक, विस्तृत स्तोत्र व कई मुत्तैदुवों हेतु ताम्बूलम जोड़ें।

यदि त्रुटि हो जाए

यदि कोई चरण छूट जाए या क्रम-बाहर हो, बस जारी रखें — भक्ति व श्रद्धा सटीक क्रम से अधिक महत्वपूर्ण। किसी चूक के बावजूद देवी से पूजा स्वीकारने की संक्षिप्त प्रार्थना (अपचार क्षमा) परंपरागत समापन है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वरलक्ष्मी व्रतम 2026 पूजा विधि संक्षेप में?

देवी वरलक्ष्मी रूप में कलशम स्थापित करें, तोरम बाँधें, श्री सूक्त व अष्टोत्तर सहित 16-चरण षोडशोपचार करें, चारुमती कथा पढ़ें, नैवेद्य व आरती अर्पित करें, फिर तोरम बाँधें व ताम्बूलम दें। यह अधिकांश पंचांगों में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को।

क्या बिना पुरोहित वरलक्ष्मी व्रतम कर सकते हैं?

हाँ। व्रत परंपरागत रूप से स्त्रियों द्वारा घर पर बिना पुरोहित किया जाता है। कलशम स्थापना, षोडशोपचार, अष्टोत्तर, कथा व आरती क्रम में करें; संस्कृत शुद्धता से अधिक श्रद्धा महत्वपूर्ण।

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कलशम कैसे स्थापित करें?

चावल-रेखांकित पीठ पर सिक्के व हल्दी सहित चावल/जल पात्र रखें, रिम पर आम पत्ते सजाएँ, ऊपर हल्दी-लगा नारियल रखें, लक्ष्मी मुखम लगाएँ, व साड़ी, आभूषण व माला पहनाएँ।

तोरम क्या है व किस हाथ पर बाँधते हैं?

तोरम नौ गाँठ व फूलों सहित हल्दी-रंगा धागा है, देवी के साथ पूजित होकर पूजा के बाद दाहिनी कलाई पर बाँधा जाता है। व्रत रखने वाली प्रत्येक स्त्री अपना तोरम रखती है।

वरलक्ष्मी व्रतम हेतु कौन-सा नैवेद्य?

सामान्य अर्पण में पुलिहोर, पायसम, गारेलु/वड़ा, कुडुमुलु, सुंडल व चक्कर पोंगल शामिल। परिवार परंपरा अनुसार अर्पित करें; श्रद्धा सहित सरल मिठाई भी स्वीकार्य।

उद्यापन से पूर्व कलशम कितनी देर रखें?

कई परिवार कलशम दिनभर रखकर उसी संध्या या अगली प्रातः उद्यापन (सम्मानपूर्वक विसर्जन) करते हैं, जल पौधे या स्वच्छ स्थान पर लौटाते हैं। परिवार परंपरा मानें।

क्या अविवाहित या प्रथम-बार स्त्रियाँ कर सकती हैं?

परंपरागत रूप से सुहागिनें वरलक्ष्मी व्रतम करती हैं, पर अविवाहित व प्रथम-बार स्त्रियाँ सम्मिलित हो सकती हैं। प्रथम वर्ष सरल, श्रद्धामय संस्करण पूर्णतः स्वीकार्य।

21 अगस्त 2026 को पूजा किस समय करें?

प्रातः सिंह लग्न काल सर्वाधिक श्रेष्ठ, पर सटीक समय स्थान-विशिष्ट। अपने शहर के लग्न समय स्थानीय पंचांग से पुष्ट करें, अन्य शहर का मुहूर्त न लें।