महाशिवरात्रि 2026: इस साल शिवरात्रि कब है? मुहूर्त, निशिता काल समय और दक्षिण भारत पंचांग विवरण

नमस्कार, आध्यात्मिक प्रेमियों!
मैं एक आध्यात्मिक पत्रकार के रूप में आपको बताना चाहता हूं कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे पवित्र रात्रि है। यह वह रात है जब शिव और शक्ति का मिलन होता है, अज्ञान का नाश होता है और आत्मा जागृत होती है। दक्षिण भारत में यह त्योहार विशेष रूप से श्रद्धा, उपवास, रुद्राभिषेक, जगरण और प्रादोष पूजा के साथ मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर यह पर्व आता है।
2026 में महाशिवरात्रि कब है?
महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।
मुख्य पूजा और रात्रि जागरण रविवार रात (15 फरवरी) से शुरू होकर सोमवार सुबह (16 फरवरी) तक चलेगा।
दक्षिण भारत (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल) में यह तिथि चतुर्दशी रात्रि भर प्रभावी रहने के कारण 15 फरवरी को ही निर्धारित है।
शिवरात्रि 2026 तिथि विवरण (दक्षिण भारत – IST)
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026 शाम को (लगभग 5:04 PM से)
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026 शाम को (लगभग 5:34 PM तक)
चूंकि चतुर्दशी पूरी रात विद्यमान रहती है, इसलिए व्रत और पूजा 15 फरवरी को ही की जाती है। (स्रोत: Drik Panchang और प्रमुख पंचांग)
निशिता काल पूजा मुहूर्त – महाशिवरात्रि 2026
निशिता काल भगवान शिव की सबसे शक्तिशाली पूजा का समय है – यह ब्रह्मांड की जागृति का प्रतीक है।
- निशिता काल पूजा समय: रात 12:09 AM से 1:01 AM तक (सोमवार, 16 फरवरी 2026 – IST)
यह मुहूर्त रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप, बिल्व पत्र अर्पण और पवित्र जलाभिषेक के लिए सर्वोत्तम है।
चार प्रहर पूजा समय (रात्रि जागरण)
दक्षिण भारत में शिवरात्रि रात को चार प्रहरों में बांटा जाता है, प्रत्येक का अपना आध्यात्मिक महत्व है:
| प्रहर | समय (IST) | आध्यात्मिक महत्व |
|---|---|---|
| प्रथम प्रहर | शाम 6:10 PM – 9:20 PM (15 फरवरी) | संकल्प, अभिषेक |
| द्वितीय प्रहर | 9:20 PM – 12:30 AM | मंत्र जाप |
| तृतीय प्रहर | 12:30 AM – 3:45 AM | निशिता काल पूजा |
| चतुर्थ प्रहर | 3:45 AM – 6:55 AM | ध्यान और अंतिम अभिषेक |
(समय स्थानानुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है; हैदराबाद/दक्षिण भारत के लिए Drik Panchang आधारित)
महाशिवरात्रि 2026 पंचांग विवरण (दक्षिण भारत)
- मास: माघ मास
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: चतुर्दशी
- वार: रविवार
- चंद्रमा: क्षीण चंद्रमा (Waning Moon)
- योग एवं नक्षत्र: स्थानीय द्रिक पंचांग के अनुसार (स्थान-विशेष में थोड़ा अंतर संभव)
तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक और केरल के मंदिर स्थानीय कैलेंडर के अनुसार इन समयों का पालन करते हैं।
पराना (व्रत खोलने) का समय
- पराना तिथि: सोमवार, 16 फरवरी 2026
- आदर्श समय: सूर्योदय के बाद, सुबह की पूजा और अभिषेक पूरा होने पर
व्रत फल, दूध, तीर्थ या सात्विक भोजन से खोला जाता है।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन, अहंकार-विनाश और आंतरिक जागरण का प्रतीक है। शैव परंपरा के अनुसार, इस रात शिव ने अनंत ज्योतिर्लिंग रूप धारण किया था। मध्यरात्रि पूजा अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है – इससे मोक्ष, शांति और शिव कृपा प्राप्त होती है।
दक्षिण भारत में महाशिवरात्रि पूजा विधि
- अभिषेक: जल, दूध, शहद, दही, विभूति से
- अर्पण: बिल्व पत्र (बेल पत्र)
- जाप: ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र
- रात्रि जागरण: भक्ति भजन, ध्यान और पूजा
महाशिवरात्रि 2026 – त्वरित सारांश
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| त्योहार तिथि | रविवार, 15 फरवरी 2026 |
| निशिता काल | 12:09 AM – 1:01 AM (16 फरवरी) |
| पराना दिन | सोमवार, 16 फरवरी 2026 |
| मास | माघ मास |
| क्षेत्र फोकस | दक्षिण भारत (IST) |
अंतिम संदेश
पूर्ण श्रद्धा, संयम और जागरूकता से महाशिवरात्रि मनाने से आत्मिक मुक्ति, मन की शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय।
