कोकिला व्रत — मुख्यतः स्त्रियों द्वारा रखा जाने वाला मासव्यापी व्रत; देवी पार्वती (सती) को कोकिला रूप में, शिव के साथ पूजा जाता है। यह परंपरा से आषाढ़ पूर्णिमा (~29 जुलाई 2026) से श्रावण तक है। यह आषाढ़ मास 2026 से जुड़े भक्ति-व्रतों में से एक है।

कोकिला व्रत 2026 तिथियाँ

  • आरंभ: आषाढ़ पूर्णिमा, ~29 जुलाई 2026
  • अवधि: श्रावण पूर्णिमा तक चांद्र मास (कुछ आषाढ़ अमावस्या को रखते हैं)
  • पुष्टि: क्षेत्र व परंपरा अनुसार भिन्न — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें

महत्व

कोकिला व्रत देवी पार्वती व शिव को समर्पित है; दांपत्य-सुख हेतु विवाहित स्त्रियाँ व अच्छे वर हेतु कन्याएँ रखती हैं। यह भक्ति व संयम का कठिन व्रत है — सती की दीर्घ तपस्या व शिव से पुनर्मिलन का स्मरण।

कथा

प्रसिद्ध कथा में, सती शिव के साथ प्रवचन में न जाने के कारण (कुछ कथाओं में ऋषि-शाप से) लंबे समय कोकिला रूप में तीव्र तप कर, पार्वती रूप में जन्म लेकर शिव से मिलीं। व्रत इस तप व भक्ति का सम्मान करता है; आचरण व कथा क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।

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अनुष्ठान व पूजा विधि

  1. व्रत आरंभ में संकल्प।
  2. नित्य गौरी-शंकर मूर्ति (या कोकिला/मिट्टी प्रतिमा) की पुष्प, बिल्व व दीप से पूजा।
  3. सामर्थ्य अनुसार संयम व एक सात्विक भोजन।
  4. गौरी/शिव मंत्र जप व छोटे उद्यापन से समापन।

मंत्र

गौरी: ॐ गौर्यै नमः · oṃ gauryai namaḥ।

शिव: ॐ नमः शिवाय · oṃ namaḥ śivāya।

प्रवासियों हेतु

व्रत के दिनों घर पर सरल गौरी-शंकर पूजा, दीप व दिनचर्या अनुसार एक सात्विक भोजन; गौरी व शिव मंत्र जपें। भक्ति-भाव बनाए रखते हुए परिस्थिति अनुसार सहजता से आचरण किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोकिला व्रत 2026 कब है?

कोकिला व्रत परंपरा से आषाढ़ पूर्णिमा (~29 जुलाई 2026) से श्रावण पूर्णिमा तक; कुछ आषाढ़ अमावस्या को रखते हैं। समय पंचांग/परंपरा से पुष्टि करें।

कोकिला व्रत में किसकी पूजा होती है?

देवी पार्वती (सती) को कोकिला रूप में, शिव के साथ (गौरी-शंकर) पूजा जाता है।

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इसे कोकिला व्रत क्यों कहते हैं?

कथा अनुसार सती शिव से मिलने से पूर्व लंबे समय कोकिला रूप में तप करती रहीं; उस भक्ति का स्मरण करते हुए स्त्रियाँ दांपत्य-सुख हेतु रखती हैं।

मुख्य बिंदु

  • कोकिला व्रत 2026: आषाढ़ पूर्णिमा (~29 जुलाई) से श्रावण।
  • पार्वती (कोकिला) व शिव; दांपत्य-सुख हेतु स्त्रियाँ।
  • समय स्थानीय पुष्टि करें; नित्य गौरी-शंकर पूजा।

देखें: आषाढ़ मास 2026 गाइडगुरु पूर्णिमा 2026