कार्तिक मास हिंदू पंचांग के सर्वाधिक पवित्र मासों में से एक है — प्रायः अक्टूबर–नवंबर में आता है। विशेषकर भगवान शिव को (एवं विष्णु को भी प्रिय) समर्पित यह मास आध्यात्मिक साधना हेतु अत्यंत शुभ है। अनेक NRI इसे घर पर मनाते हैं।

कार्तिक मास का महत्व

  • भगवान शिव को विशेष प्रिय माना जाता है।
  • मासभर प्रतिदिन दीप जलाना अत्यंत पुण्यप्रद।
  • शिव पूजा, तुलसी पूजा एवं कार्तिक दीपम् शांति एवं विघ्न-निवारण देते हैं।
  • इस मास के सत्कर्मों का बहुगुणित पुण्य माना जाता है।

कार्तिक व्रत — NRI हेतु सरल विकल्प

  • दीप व्रत — तुलसी/शिव के समक्ष प्रतिदिन दीप (सरल एवं श्रेष्ठ)।
  • फलाहार व्रत — केवल फल, दूध एवं मेवे।
  • सरल व्रत — मांसाहार, प्याज-लहसुन त्यागकर प्रतिदिन दीप।
  • कठोर उपवास केवल स्वास्थ्य अनुमति दे तो।

घर पर सरल पूजाएँ

  • नित्य दीप पूजा: प्रत्येक संध्या शिव/तुलसी के समक्ष घी या तिल-तेल का दीप।
  • शिव अभिषेक: जल, दूध, दही, शहद, घी से "ॐ नमः शिवाय" जपते हुए।
  • तुलसी पूजा: प्रतिदिन तुलसी को जल अर्पित कर समीप दीप।
  • कार्तिक दीपम्: पूर्णिमा पर घर में एवं चारों ओर अनेक दीप।

व्यस्त NRI हेतु सरल दिनचर्या

  • प्रातः: "ॐ नमः शिवाय" 11/21 बार।
  • संध्या: दीप जलाकर तुलसी को जल।
  • सोने से पूर्व: शिव पुराण का अंश/शिव भजन।

सूचना: रीति क्षेत्र एवं पारिवारिक परंपरा अनुसार बदलती है; बड़ों/पुरोहित की विधि अपनाएँ। तिथियाँ प्रतिवर्ष पंचांग में देखें।