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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 — तिथियाँ, दस महाविद्या साधना व महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 — 14 से 22 जुलाई। दस महाविद्या साधना का गुप्त-नवरात्रि काल। दिन-वार देवियाँ, मंत्र व तंत्र-साधना का महत्व।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 — 14 से 22 जुलाई। दस महाविद्या साधना का गुप्त-नवरात्रि काल।
गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है — माघ शुक्ल व आषाढ़ शुक्ल — और यह तंत्र-साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसमें दस महाविद्या (दस तांत्रिक देवियों) की साधना की जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 — तिथियाँ
- आरंभ: 14 जुलाई 2026 (मंगलवार) — प्रतिपदा
- समाप्ति: 22 जुलाई 2026 (बुधवार) — नवमी
- घटस्थापना मुहूर्त: 14 जुलाई प्रातः 06:00 से 09:30 बजे
दस महाविद्या साधना
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के नौ दिन दस महाविद्याओं की साधना का काल है। प्रत्येक दिन एक महाविद्या की पूजा होती है (कुछ साधक एक दिन में दो महाविद्या भी समर्पित करते हैं)।
| दिन | महाविद्या | मंत्र-बीज |
|---|---|---|
| 1 | काली | क्रीं |
| 2 | तारा | ह्रीं ट्रीं हूं |
| 3 | षोडशी / त्रिपुर सुंदरी | ऐं ह्रीं श्रीं |
| 4 | भुवनेश्वरी | ह्रीं |
| 5 | भैरवी | ह्रीं भैं |
| 6 | छिन्नमस्ता | श्रीं ह्रीं क्लीं |
| 7 | धूमावती | धूं धूं |
| 8 | बगलामुखी | ह्रीं ह्रीं |
| 9 | मातंगी | ऐं ह्रीं श्रीं |
| विशेष | कमला | श्रीं |
गुप्त साधना के नियम
- साधना गोपनीय (गुप्त) रखी जाती है — इसी से नाम "गुप्त नवरात्रि"
- ब्रह्मचर्य व सात्विक आहार
- रात्रि-साधना का विशेष महत्व
- गुरु-दीक्षा के बिना उग्र महाविद्या-साधना न करें
- सात्विक उपासक केवल दुर्गा-सप्तशती या ललिता-सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं
सरल उपासना (बिना दीक्षा)
यदि गुरु-दीक्षा नहीं है, तो ये सरल विधियाँ अपनाएँ:
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- दुर्गा-सप्तशती का दैनिक पाठ
- ललिता-सहस्रनाम स्तोत्र
- श्री-सूक्त व देवी-कवच
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 108 बार जप
संबंधित: आषाढ़ मास 2026 — पूर्ण कैलेंडर।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे




