कर्क संक्रांति वह पावन क्षण है जब सूर्य देव मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करते हैं। इसी क्षण से दक्षिणायन का आरंभ होता है — सूर्य की दक्षिण-दिशा की यात्रा।

कर्क संक्रांति 2026 — तिथि

  • दिनांक: 16 जुलाई 2026 (गुरुवार)
  • संक्रांति काल: प्रातः लगभग 06:35 बजे (IST)
  • पुण्य काल: संक्रांति के 6 घंटे पहले व 6 घंटे बाद (16 घंटे का पुण्य काल)
  • महा-पुण्य काल: संक्रांति के 30 मिनट पहले व 30 मिनट बाद

दक्षिणायन का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सूर्य का दक्षिणायन काल पितरों का दिन और देवताओं की रात्रि होता है। इस काल में पितर तर्पण, श्राद्ध व पुण्य-कर्म विशेष फल देते हैं।

महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा करके अपने प्राण छोड़े — क्योंकि उत्तरायण देवताओं का दिन है, जिसमें मृत्यु से मोक्ष की प्राप्ति होती है। दक्षिणायन कर्म-काल है, साधना-काल है।

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पूजा व दान विधि

  1. पुण्य काल में पवित्र नदी, कुंड या घर पर गंगा-जल मिश्रित स्नान करें।
  2. सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें (तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, रोली)।
  3. पितरों के लिए तर्पण (दक्षिणायन तर्पण का विशेष फल है)।
  4. गायत्री मंत्र व आदित्य-हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  5. अन्न, वस्त्र, छाता व जल-पात्र का दान करें।
  6. विशेष रूप से तिल-दान व गुड़-दान करें।

क्षेत्रीय परम्पराएँ

  • केरल: "कर्किडकम 1" — आदि महीने का प्रारंभ, आयुर्वेद-चिकित्सा का काल।
  • तमिलनाडु: "आदी 1" — मंदिरों में विशेष पूजा।
  • उत्तर भारत: गंगा स्नान व तर्पण।

मुख्य मंत्र

सूर्य मंत्र: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

आदित्य मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः

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ॐ घृणि सूर्याय नमः