देवशयनी एकादशी — आषाढ़ शुक्ल एकादशी — वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु क्षीर-सागर में योग-निद्रा (शयन) में जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो चार मास तक चलता है।

देवशयनी एकादशी 2026 — तिथि

  • दिनांक: 15 जुलाई 2026 (बुधवार)
  • एकादशी तिथि आरंभ: 14 जुलाई 2026 रात्रि
  • एकादशी तिथि समाप्ति: 15 जुलाई 2026 रात्रि
  • पारणा: 16 जुलाई 2026 प्रातः

पौराणिक कथा

जब राजा बलि ने तीनों लोकों को जीत लिया, भगवान विष्णु ने वामन अवतार से उसका अहंकार दूर किया। बलि की भक्ति देखकर विष्णु ने वर माँगने को कहा। बलि ने माँगा कि विष्णु पाताल-लोक में उसके साथ रहें। तब लक्ष्मी जी ने राखी बाँधकर अपने पति को मुक्त कराया, परंतु विष्णु ने वचन दिया कि चार मास वे क्षीर-सागर में योग-निद्रा करेंगे और चार मास बलि के पाताल में निवास करेंगे। यही चातुर्मास है।

व्रत-पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।
  2. विष्णु जी की प्रतिमा या चित्र को पंचामृत से स्नान कराएँ।
  3. पीले फूल, तुलसी-दल, धूप-दीप अर्पित करें।
  4. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  5. दिन भर निराहार या फलाहार रहें (व्रती को अन्न त्यागना चाहिए)।
  6. रात्रि-जागरण कर कीर्तन करें।
  7. अगले दिन प्रातः पारणा करें।

मुख्य मंत्र

विष्णु शयन मंत्र:

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सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम् ।

विबुद्धे त्वयि बुद्धं स्यात् सर्वमेव चराचरम् ॥

इसके अतिरिक्त ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जप करें।

चातुर्मास नियम

चातुर्मास में विवाह, उपनयन, मुंडन व अन्य शुभ संस्कार नहीं किए जाते। तुलसी-विवाह (कार्तिक मास) पर देव-उत्थान एकादशी के साथ चातुर्मास समाप्त होता है। विस्तृत नियम: चातुर्मास 2026 — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

संबंधित: आषाढ़ मास 2026 — पूर्ण कैलेंडर

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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय