Holika Dahan 2026: होलिका दहन की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आध्यात्मिक महत्व

होलिका दहन, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भक्ति की शक्ति, अधर्म पर धर्म की विजय और अहंकार के नाश का प्रतीक है। वर्ष 2026 में होलिका दहन अत्यंत शुभ योग में मनाया जाएगा।
Holika Dahan 2026 की तिथि
होलिका दहन: मंगलवार, 3 मार्च 2026
रंग वाली होली (धुलेंडी): बुधवार, 4 मार्च 2026
होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त: शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 2 मार्च 2026, शाम 5:55 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 3 मार्च 2026, शाम 5:07 बजे
इस दिन भद्रा काल का दोष नहीं है, इसलिए होलिका दहन पूर्ण रूप से शुभ माना गया है।
होलिका दहन का पौराणिक महत्व
होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह से जुड़ी है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, भक्त प्रह्लाद को जलाने बैठी।
लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई।
यह कथा सिखाती है:
- सच्ची भक्ति की हमेशा विजय होती है
- अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है
- ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं
होलिका दहन पूजा विधि (Puja Vidhi)
तैयारी
- होलिका स्थल को गंगाजल व गोबर से शुद्ध करें
- लकड़ी, उपले, सूखी घास से होलिका सजाएं
- पूजा सामग्री रखें: नारियल, गेहूं, जौ, तिल, फूल, धूप, दीप
होलिका दहन विधि
- शुभ मुहूर्त में होलिका की 3 या 7 परिक्रमा करें
- नारियल, अन्न, फूल अग्नि में अर्पित करें
- प्रदोष काल में अग्नि प्रज्वलित करें
- भगवान नरसिंह और भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें
होलिका दहन मंत्र
होलिका दहन मंत्र
ॐ होलिका दहनं करिष्ये नमः
भगवान नरसिंह मंत्र
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमः
सुरक्षा व शांति मंत्र
असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥होलिका दहन के आध्यात्मिक लाभ
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
पुराने कर्म दोषों का नाश
मानसिक व आध्यात्मिक शुद्धि
परिवार में सुख-शांति
नए कार्यों की शुभ शुरुआत
भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति
होलिका दहन के बाद क्या करें
होलिका की भस्म (राख) मस्तक पर लगाएं
घर में दीपक जलाएं
जरूरतमंदों को दान करें
मन से द्वेष, क्रोध और अहंकार का त्याग करें
महत्वपूर्ण नियम
होलिका दहन केवल प्रदोष काल में करें
भद्रा काल में दहन वर्जित होता है
पूर्णिमा तिथि का ध्यान रखें
निष्कर्ष
होलिका दहन 2026 हमें यह स्मरण कराता है कि
“जहाँ सच्ची भक्ति होती है, वहाँ ईश्वर स्वयं रक्षा करते हैं।”
यह पर्व हमें अहंकार, नकारात्मकता और पुराने कष्टों को अग्नि में समर्पित कर, जीवन में नई ऊर्जा और आनंद का स्वागत करने की प्रेरणा देता है।
होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं 
