संक्षिप्त उत्तर: झारखंड में दशहरा (विजयादशमी) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। विजय मुहूर्त: रांची 1:28 से 2:14 PM, जमशेदपुर 1:25 से 2:11 PM, धनबाद 1:24 से 2:10 PM और देवघर 1:22 से 2:08 PM (स्थानीय समय, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना)। नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर को आरंभ होती है, और दुर्गा अष्टमी तथा महानवमी एक साथ सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पड़ रही हैं।

झारखंड शरद ऋतु के इस पर्व को एक साथ कई स्वरों में मनाता है। शहरों में दुर्गा पूजा की धूम रहती है—पंडाल, ढाक की थाप और शाम की भीड़, जिसका बहुत कुछ श्रेय बंगाल से राज्य के गहरे संबंधों को जाता है। विजयादशमी की शाम रांची और अन्य शहरों में उत्तर भारतीय शैली में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। और गाँवों में संथाल जैसे आदिवासी समुदाय गीत और नृत्य की अपनी दसाय परंपराएँ निभाते हैं।

दशहरा 2026 की मुख्य तिथियाँ (भारत)

पर्वतिथि (2026)
नवरात्रि आरंभ (घटस्थापना)रविवार, 11 अक्टूबर
दुर्गा अष्टमी और महानवमीसोमवार, 19 अक्टूबर
दशहरा / विजयादशमी (बिजया दशमी)मंगलवार, 20 अक्टूबर
दशमी तिथि20 अक्टूबर 12:50 PM IST से 21 अक्टूबर 2:11 PM IST तक
दीवालीरविवार, 8 नवंबर

तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर के कुछ ही बाद आरंभ होकर पूरी दोपहर रहती है, जिसमें विजय मुहूर्त भी शामिल है, इसीलिए विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। झारखंड की दुर्गा पूजा समितियाँ सप्तमी, अष्टमी, संधि पूजा, नवमी और दशमी के अनुष्ठानों के सटीक समय के लिए बंगाली पंजिका का पालन करती हैं, इसलिए उनकी अपनी घोषणाएँ अवश्य देखें।

Advertisement

झारखंड के शहरों के लिए विजय मुहूर्त 2026

विजय मुहूर्त विजयादशमी की दोपहर का सबसे शुभ समय होता है। परंपरागत रूप से यही शमी पूजा, अपराजिता पूजा, शस्त्र पूजा (हथियारों, औज़ारों और वाहनों की पूजा), नए कार्य की शुरुआत या यात्रा पर निकलने का समय है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 के लिए स्थानीय समय में, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किया गया समय:

शहरविजय मुहूर्त (20 अक्टूबर 2026)
रांची1:28 से 2:14 PM
जमशेदपुर1:25 से 2:11 PM
धनबाद1:24 से 2:10 PM
देवघर1:22 से 2:08 PM

बोकारो, हज़ारीबाग या दुमका जैसे अन्य शहरों के लिए उसी शहर के अनुसार बने पंचांग को देखें। चारों समय-खंड 12:50 PM IST पर दशमी तिथि आरंभ होने के बाद पड़ते हैं।

झारखंड में नवरात्रि और दशहरा कैसे मनाया जाता है

दुर्गा पूजा: पर्व का हृदय

शहरी झारखंड के अधिकांश लोगों के लिए यह पर्व दुर्गा पूजा का ही दूसरा नाम है। रांची, जमशेदपुर और धनबाद में बड़े बंगाली समुदाय हैं, जिनमें से कई पीढ़ियों से यहीं बसे हैं, और उनकी पूजाएँ पूरे मौसम का माहौल तय करती हैं। मोहल्लों, कॉलोनियों और औद्योगिक टाउनशिप में पंडाल सजते हैं, और पर्व के मुख्य दिनों के लिए लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

षष्ठी से दशमी तक के दिन परिचित बंगाली क्रम का पालन करते हैं: देवी का अनावरण, सप्तमी की भोर में कोला बौ का स्नान, अष्टमी की सुबह पुष्पांजलि, अष्टमी और नवमी के संधिकाल में संधि पूजा, और शामों को धुनुची नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा खाने-पीने के स्टॉल। देर रात तक पंडाल घूमना परिवारों की एक परंपरा है। हर समिति अपना कार्यक्रम स्वयं तय करती है, इसलिए 2026 के लिए स्थानीय घोषणाएँ देखें।

बिजया दशमी और विसर्जन

दशमी के दिन, जो विजयादशमी के साथ ही पड़ती है, विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला में भाग लेती हैं—देवी की विदाई से पहले वे माँ को और एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसके बाद प्रतिमाओं को शोभायात्रा के साथ नदियों, तालाबों या निर्धारित कुंडों में विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। परिवार बिजया की शुभकामनाएँ देते हैं, बड़ों के पैर छूते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। विसर्जन की व्यवस्था हर वर्ष स्थानीय प्रशासन और पूजा समितियाँ तय करती हैं।

Advertisement

रांची और अन्य शहरों में रावण दहन

झारखंड में रावण दहन की भी मज़बूत परंपरा है, जिसे राज्य में बसे उत्तर भारतीय समुदाय लाए और पोषित किया। विजयादशमी की शाम सूर्यास्त के बाद रावण के, और कुछ स्थानों पर कुंभकर्ण और मेघनाद के भी, ऊँचे पुतले जलाए जाते हैं, जो अधर्म पर राम की विजय का प्रतीक है। रांची में मुख्य पुतला दहन आम तौर पर मोरहाबादी जैसे बड़े खुले मैदानों में होता है, और जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो तथा अन्य शहरों में छोटे आयोजन होते हैं। समय और व्यवस्थाओं की घोषणा हर वर्ष स्थानीय स्तर पर होती है। पटाखों से भरे पुतलों से पर्याप्त दूरी पर खड़े रहें और बच्चों को पास रखें।

दसाय: इस मौसम की आदिवासी परंपराएँ

झारखंड संथाल, मुंडा, उरांव और हो सहित अनेक आदिवासी समुदायों का घर है, और शरद ऋतु के पर्वों का मौसम उनके बीच अपने विशेष अर्थ रखता है। संथालों में यह मौसम दसाय (जिसे Dasae या Dansai भी लिखा जाता है) से जुड़ा है, एक नृत्य परंपरा जिसमें उत्सवी वेशभूषा में, कभी-कभी पंखों से सजे, पुरुषों की टोलियाँ गाँव-गाँव घूमती हैं और पारंपरिक वाद्यों पर गाती-नाचती हैं। लौकी से बने अनुनादक वाला एक वाद्य, जिसे भुआंग कहा जाता है, इस नृत्य से व्यापक रूप से जुड़ा है।

दसाय की उत्पत्ति और अर्थ के बारे में अलग-अलग समुदायों और लेखकों के विवरण भिन्न हैं, और यह परंपरा केवल दुर्गा पूजा का कोई रूप नहीं है। यदि आप पर्व के दौरान ग्रामीण झारखंड जा रहे हैं, तो इन उत्सवों को जीवंत सामुदायिक परंपराओं के रूप में सम्मान दें: तस्वीरें लेने से पहले अनुमति लें और स्थानीय मेज़बानों के मार्गदर्शन का पालन करें।

घरों और मंदिरों में नवरात्रि

झारखंड के कई हिंदू परिवार, विशेषकर जिनकी जड़ें बिहार और उत्तर प्रदेश में हैं, पहले दिन घटस्थापना, कलश और जौ बोकर, नौ दिनों के उपवास और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन के साथ नवरात्रि मनाते हैं। 2026 में दोनों सोमवार, 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं, इसलिए किसी भी परंपरा के लिए कन्या पूजन उसी दिन है। रजरप्पा का छिन्नमस्ता मंदिर झारखंड में देवी के सबसे प्रसिद्ध धामों में से एक है और नवरात्रि में यहाँ श्रद्धालु उमड़ते हैं। वर्तमान समय के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

बैद्यनाथ धाम, देवघर

देवघर के बैद्यनाथ धाम के बिना झारखंड के पवित्र स्थलों की कोई भी मार्गदर्शिका पूरी नहीं होती। दिव्य वैद्य, वैद्यनाथ के रूप में भगवान शिव का यह मंदिर कई परंपराओं में बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है, और परंपरा इसे शक्तिपीठ भी मानती है जहाँ सती का हृदय गिरा था। इसकी कथा शिवलिंग को रावण से जोड़ती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह इसे कैलाश से ले जा रहा था, और यह देवघर में आकर स्थापित हो गया।

मंदिर में सबसे अधिक भीड़ श्रावण मास में होती है, जब कांवड़िये बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आते हैं, पर श्रद्धालु पूरे वर्ष आते हैं, और पूजा की छुट्टियों में झारखंड आने वाले कई लोग यहाँ दर्शन भी करते हैं। पर्वों के समय भीड़ बहुत अधिक हो सकती है। यात्रा से पहले वर्तमान समय और व्यवस्थाओं के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

Advertisement

विजयादशमी पर क्या करें

  • अपराजिता और शमी पूजा: दोपहर में, संभव हो तो विजय मुहूर्त के दौरान, विजय की देवी और शमी वृक्ष की पूजा करें।
  • शस्त्र पूजा: औज़ारों, वाहनों, बही-खातों और लैपटॉप को साफ़ करके उनकी पूजा करें।
  • बिजया की शुभकामनाएँ: बड़ों से मिलें, उनका आशीर्वाद लें और रसगुल्ला, संदेश और नारकेल नाड़ू जैसी मिठाइयाँ बाँटें।
  • कुछ नया आरंभ करें: विजयादशमी नए कार्यों, खरीदारी और पढ़ाई की शुरुआत के लिए वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक है।
  • रावण दहन: सूर्यास्त के बाद सामुदायिक पुतला दहन में शामिल हों, जो याद दिलाता है कि अहंकार और अधर्म की अंततः हार होती है।

विदेश में बसे झारखंडी परिवारों के लिए

  • अपने शहर के लिए गणना किए गए पंचांग का उपयोग करें। रांची या जमशेदपुर के विजय मुहूर्त को अपने स्थानीय टाइम ज़ोन में न बदलें।
  • मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 अधिकांश देशों में कार्य-दिवस है। विदेश में कई बंगाली संघ और मंदिर निकटतम सप्ताहांत पर दुर्गा पूजा करते हैं, इसलिए उनकी घोषणाएँ देखें।
  • कन्या पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को करें, या यदि अधिक सुविधाजनक हो तो सप्ताहांत पर।
  • पुष्पांजलि या सिंदूर खेला के समय घर पर परिवार को वीडियो कॉल करें, ताकि बच्चे भी उस पल में शामिल हो सकें।

NRI परिवारों के लिए विस्तृत मार्गदर्शिका के लिए देखें नवरात्रि 2026: NRI परिवारों के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका। दशहरा के महत्व, इसकी कथाओं और संपूर्ण पूजा विधि के लिए हमारी दशहरा / विजयादशमी 2026 मुख्य मार्गदर्शिका देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में दशहरा 2026 कब है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026। भारत के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर को आरंभ होती है, और दुर्गा अष्टमी तथा महानवमी दोनों सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को हैं।

दशहरा 2026 पर रांची में विजय मुहूर्त कब है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को रांची में दोपहर 1:28 से 2:14 PM तक, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना के अनुसार। जमशेदपुर में 1:25 से 2:11 PM, धनबाद में 1:24 से 2:10 PM और देवघर में 1:22 से 2:08 PM, सभी स्थानीय समय।

झारखंड में दुर्गा पूजा बड़ी होती है या रावण दहन?

झारखंड के अधिकांश भागों में, विशेषकर रांची, जमशेदपुर और धनबाद में, दुर्गा पूजा ही इस पर्व का मुख्य रूप है, जो गहरे बंगाली सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है। विजयादशमी की शाम रांची और अन्य शहरों में रावण दहन भी होता है, इसलिए कई परिवार दोनों का आनंद लेते हैं।

दसाय नृत्य क्या है?

दसाय (जिसे Dasae या Dansai भी लिखा जाता है) संथाल समुदाय की एक नृत्य परंपरा है, जो दुर्गा पूजा के मौसम से जुड़ी है। उत्सवी वेशभूषा में पुरुषों की टोलियाँ गाँव-गाँव घूमती हैं और पारंपरिक वाद्यों पर गाती-नाचती हैं। इसकी उत्पत्ति और अर्थ के बारे में अलग-अलग समुदायों में भिन्न मान्यताएँ हैं, इसलिए स्थानीय बुज़ुर्ग ही सबसे अच्छे मार्गदर्शक हैं।

क्या नवरात्रि में बैद्यनाथ धाम में भीड़ रहती है?

देवघर का बैद्यनाथ धाम झारखंड के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और पूरे वर्ष श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जबकि सबसे अधिक भीड़ श्रावण मास में होती है। किसी भी समय दर्शन के लिए जाने से पहले वर्तमान समय और व्यवस्थाओं के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

क्या मैं USA या UK में रांची का विजय मुहूर्त उपयोग कर सकता हूँ?

नहीं। मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं, इसलिए उन्हें किसी दूसरे टाइम ज़ोन में बदला नहीं जा सकता। अपने शहर के पंचांग का उपयोग करें या अपने स्थानीय मंदिर के कैलेंडर का पालन करें।

संपादक की टिप्पणी

संपादक की टिप्पणी (5 अक्टूबर 2026): पिछला संस्करण खो जाने के बाद इस पृष्ठ को उसके मूल पते पर पुनः स्थापित किया गया है। तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं, और विजय मुहूर्त का समय प्रत्येक शहर के लिए द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किया गया है। हमने पूजा समितियों, पंडालों की थीम, रावण दहन के समय या विसर्जन कार्यक्रमों की सूची नहीं दी है, क्योंकि इनकी घोषणा हर वर्ष स्थानीय स्तर पर होती है; जाने से पहले कृपया आधिकारिक स्रोत देखें। आदिवासी परंपराओं का वर्णन सामान्य है, और व्यवहार समुदायों के बीच भिन्न होता है। मंदिरों का समय बदलता रहता है, इसलिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ