तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर — शक्तिपीठ एवं शिवाजी की कुलदेवी
तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर — पूर्ण शक्तिपीठ एवं छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी: 8 भुजाओं वाली स्वयंभू मूर्ति, इतिहास, उत्सव एवं कैसे पहुँचें।

तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर — पूर्ण शक्तिपीठ एवं छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी: 8 भुजाओं वाली स्वयंभू मूर्ति, इतिहास, उत्सव एवं कैसे पहुँचें।
महाराष्ट्र के धाराशिव ज़िले के तुलजापुर में यमुनाचल पहाड़ी पर विराजमान श्री तुलजा भवानी मंदिर — दिव्य शक्ति-स्वरूपिणी, छत्रपति शिवाजी महाराज एवं अनेक मराठा परिवारों की कुलदेवी।
पूर्ण शक्तिपीठ
तुलजा भवानी 51 शक्तिपीठों में से एक हैं; महाराष्ट्र के "साढ़े तीन शक्तिपीठों" में पूर्ण-पीठ का स्थान रखती हैं (सप्तश्रृंगी अर्ध-पीठ)। अन्य पीठ महालक्ष्मी (कोल्हापुर) एवं रेणुका माता (माहूर) हैं। देवी तुलजा भवानी, अंबाबाई, जगदंबा रूपों में पूजी जाती हैं।
स्वयंभू मूर्ति
लगभग 3 फुट ऊँची ग्रेनाइट स्वयंभू मूर्ति — 8 भुजाओं वाली महिषासुर-मर्दिनी का रूप, खड्ग-त्रिशूल धारण किए, महिषासुर के शीश सहित। छोटी होने पर भी अपार आध्यात्मिक शक्ति प्रसारित करती है।
ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व
स्कंद पुराण, पद्म पुराण एवं देवी भागवत में उल्लेख है; वर्तमान संरचना 12वीं शताब्दी की मानी जाती है। शिवाजी महाराज ने युद्धों से पूर्व देवी का आशीर्वाद पाया, ऐसी मान्यता है। भक्त शत्रु-बाधाओं से रक्षा, साहस एवं विजय हेतु प्रार्थना करते हैं।
उत्सव एवं कैसे पहुँचें
- नवरात्रि (चैत्र एवं शारदीय), चैत्र पूर्णिमा तुलजापुर यात्रा।
- स्थान: तुलजापुर, धाराशिव ज़िला (सोलापुर से ≈45 कि.मी.)।
- वायुयान: सोलापुर/पुणे। रेल: सोलापुर; आगे टैक्सी/बस।
- दर्शन: सामान्यतः प्रातः 4:00 – रात्रि 10:00; गोमुख तीर्थ एवं कल्लोल तीर्थ परिसर में।
मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सामान्य प्रश्न
क्या तुलजा भवानी शक्तिपीठ है?
हाँ — 51 शक्तिपीठों में से एक; महाराष्ट्र के साढ़े तीन पीठों में पूर्ण-पीठ।
विशेषता क्या है?
छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी; भारत के सबसे शक्तिशाली भवानी रूपों में से एक।
जय तुलजा भवानी! जय भवानी माता! 🙏
महाराष्ट्र शक्तिपीठ शृंखला — सप्तश्रृंगी माता (वाणी) एवं रेणुका माता (माहूर) भी देखें।




