नासिक ज़िले के वाणी के पास, सह्याद्रि पहाड़ियों में 4,600 फुट की ऊँचाई पर विराजमान सप्तश्रृंगी माता — सात शिखरों की दिव्य माँ — महाराष्ट्र के सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक हैं। सप्त (सात) श्रृंगी (शिखर) — चारों ओर के सात शिखरों से यह नाम पड़ा।

शक्तिपीठ महात्म्य

यहाँ देवी सती का दाहिना भुजा गिरा माना जाता है — यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, एवं महाराष्ट्र के "साढ़े तीन शक्तिपीठों" में अर्ध-पीठ के रूप में गिना जाता है। यहाँ देवी सप्तश्रृंगी निवासिनी रूप में पूजी जाती हैं।

स्वयंभू मूर्ति

गुफा-सदृश गर्भगृह में चट्टान में स्वयंभू रूप में प्रकट यह मूर्ति लगभग 8 फुट ऊँची, 18 भुजाओं (अष्टादश भुज) वाली महिषासुर-मर्दिनी का रूप है। सिंदूर से अलंकृत, चाँदी की नथ एवं मुकुट से सुशोभित। मूर्ति के चरणों में महिषासुर — धर्म की विजय का प्रतीक।

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आध्यात्मिक महत्व एवं उत्सव

मान्यता है कि देवी भक्तों को बल, साहस एवं रक्षा प्रदान करती हैं। चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि एवं चैत्र पूर्णिमा पर विशेष अभिषेक, अलंकरण एवं आरती से अद्भुत वातावरण बनता है।

कैसे पहुँचें एवं रोपवे / सीढ़ियाँ

  • स्थान: सप्तश्रृंगी गड़, नांदुरी के पास, कलवण तालुका, नासिक ज़िला (नासिक से ≈60–65 कि.मी.)।
  • वायुयान: नासिक (≈70–80 कि.मी.) / मुंबई हवाई अड्डा। रेल: नासिक रोड; आगे टैक्सी/बस।
  • रोपवे (अनुशंसित): फ्यूनिक्युलर लगभग 3 मिनट में ऊपर पहुँचाता है — वृद्धों एवं परिवारों हेतु उपयुक्त।
  • सीढ़ियाँ: 500+ सीढ़ियाँ; पारंपरिक यात्रा रूप में भक्त चढ़ते हैं (ऊपर 20–25 सीढ़ियाँ शेष)।
  • दर्शन समय: सामान्यतः प्रातः 6:00 – रात्रि 9:00 (उत्सवों पर विस्तार); प्रवेश निःशुल्क।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सामान्य प्रश्न

क्या सप्तश्रृंगी शक्तिपीठ है?

हाँ — 51 शक्तिपीठों में से एक, जहाँ देवी सती का दाहिना भुजा गिरा; महाराष्ट्र के साढ़े तीन पीठों में अर्ध-पीठ।

क्या रोपवे उपलब्ध है?

हाँ — फ्यूनिक्युलर रोपवे लगभग 3 मिनट में ऊपर पहुँचाता है; वृद्धों एवं परिवारों हेतु उपयुक्त।

दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय?

अक्टूबर–मार्च सुहावना; नवरात्रि अत्यंत शक्तिशाली।

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जय सप्तश्रृंगी माता! 🙏

महाराष्ट्र शक्तिपीठ शृंखला — तुलजा भवानी (तुलजापुर) एवं रेणुका माता (माहूर) भी देखें।