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मुक्तेश्वर मंदिर

शिव temple · Odisha, India

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मुक्तेश्वर मंदिर ओडिशा के खुर्दा (खोरधा) ज़िले में भुवनेश्वर के ओल्ड टाउन में स्थित एक जीवंत शिव मंदिर है, जहाँ देवता गोलाकार योनिपीठ में स्थापित शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं (IGNCA)। यहाँ शिव की पूजा मुक्तेश्वर के रूप में होती है, जिस नाम का अर्थ पर्यटन मंत्रालय 'आध्यात्मिक मुक्ति के स्वामी' बताता है (Incredible India)। मंदिर भुवनेश्वर से पुरी की ओर जाने वाली सड़क के दाईं ओर स्थित है (IGNCA)।

यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षित स्मारक है, जो इसका रखरखाव करता है (IGNCA; Swarajya)। यह अपने पत्थर के मेहराबदार द्वार, अर्थात् तोरण, के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है, जिसे पर्यटन मंत्रालय मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान बताता है (Incredible India)।

Faith & Tradition

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Religious Significance of मुक्तेश्वर मंदिर

विद्वान इस मंदिर को ओडिशा की मंदिर-निर्माण परंपरा के एक संक्रमणकालीन चरण का मानते हैं, और प्रलेखन अभिलेख में उल्लेख है कि जेम्स फर्ग्यूसन ने इसे ओडिशा स्थापत्य के रत्नों में गिना, जबकि आर. एल. मित्र ने इसे उस शैली का एक मनोहर सार कहकर सराहा (IGNCA)। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार इतिहासकारों ने इसे एक 'लघु रत्न' कहा है (Incredible India)।

मंदिर में शिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा और जलशयन मनाए जाते हैं (IGNCA)। मंदिर का प्रांगण मुक्तेश्वर नृत्य महोत्सव का भी स्थल है, जो ओडिसी नृत्य का उत्सव है (Incredible India)।

Heritage

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History of मुक्तेश्वर मंदिर

मंदिर में कोई शिलालेख नहीं है, इसलिए इसकी तिथि कला-इतिहास के आकलन पर आधारित है (Swarajya)। धरोहर प्रलेखन अभिलेख इसे 10वीं शताब्दी ईस्वी के सोमवंशी शासनकाल का बताता है (IGNCA), और कला इतिहासकार सामान्यतः इसे सोमवंशी युग का, संभवतः राजा ययाति प्रथम के काल का मानते हैं (Swarajya)।

पर्यटन मंत्रालय 875 से 904 ईस्वी की एक संकरी अवधि बताता है और मंदिर का श्रेय ययाति प्रथम को देता है (Incredible India)। चूँकि मंदिर में कोई शिलालेख नहीं है, ये तिथियाँ विद्वानों के अनुमान हैं, कोई अभिलिखित स्थापना-तिथि नहीं, और स्रोत किसी एक निश्चित अवधि पर सहमत नहीं हैं (Swarajya; Incredible India)।

Architecture and sacred features

मंदिर पश्चिममुखी है और इसके दो भाग हैं: वक्ररेखीय रेखा शिखर वाला एक वर्गाकार विमान और सीढ़ीदार पिरामिडनुमा पीढ़ा छत वाला एक आयताकार जगमोहन, जो गेरुए बलुआ पत्थर से बिना गारे की चिनाई (ड्राई ऐशलर) में बने हैं (IGNCA)। इसकी योजना पंचरथ है, यह एक नीचे चबूतरे पर खड़ा है, और इसकी दीवारों पर नायिका आकृतियाँ, बेल-बूटे, चैत्य अलंकरण और नाग-नागी स्तंभ हैं (IGNCA)। जगमोहन की छत पर आठ पंखुड़ियों वाला कमल है, जिसकी पंखुड़ियों पर मातृदेवियों की प्रतिमाएँ हैं (IGNCA; Swarajya), और मंदिर के चारों ओर छोटे फलकों पर लकुलीश, सरस्वती, कार्तिकेय, सूर्य तथा अन्य आकृतियाँ अंकित हैं (Swarajya)।

सामने तोरण खड़ा है, जो कीर्तिमुखों से सुशोभित सोलह-पहलू स्तंभों पर टिका एक मेहराब है और जिसके दोनों ओर छरहरी स्त्री आकृतियाँ हैं (Swarajya)। टेढ़े-मेढ़े (ज़िग-ज़ैग) अलंकरण वाली एक नीची सजावटी चारदीवारी मंदिर को घेरती है, जो अपना परिसर सिद्धेश्वर मंदिर के साथ साझा करता है (Swarajya)। मंदिर परिसर के भीतर का कुंड, मरीचि कुंड, पूर्व दिशा में स्थित है (Incredible India; Orissa Post)।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

यह मंदिर एक सक्रिय उपासना स्थल होने के साथ-साथ ASI द्वारा संरक्षित स्मारक भी है (IGNCA)। यात्रा से पहले वर्तमान दर्शन-समय और व्यवस्थाओं की पुष्टि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भुवनेश्वर मंडल से कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भुवनेश्वर मंडल) द्वारा संरक्षित before travelling. Last reviewed 11 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at मुक्तेश्वर मंदिर

फ़रवरी–मार्च (फाल्गुन)

महाशिवरात्रि

शिवरात्रि मुक्तेश्वर मंदिर में दर्ज अनुष्ठानों में से एक है (IGNCA)।

अक्टूबर–नवंबर (कार्तिक)

कार्तिक पूर्णिमा

मंदिर के धरोहर प्रलेखन के अनुसार यहाँ कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है (IGNCA)।

वार्षिक (तिथियाँ बदलती रहती हैं)

मुक्तेश्वर नृत्य महोत्सव

मंदिर में आयोजित होने वाला ओडिसी नृत्य महोत्सव, जिसे पर्यटन मंत्रालय के अनुसार ओडिशा पर्यटन प्रस्तुत करता है (Incredible India)।

तिथि बदलती रहती है (चंद्र पंचांग)

रुकुण रथ

भगवान लिंगराज के रुकुण रथ उत्सव की पूर्व संध्या पर लिंगराज मंदिर के सेवकों का एक समूह मंदिर के मरीचि कुंड के जल की नीलामी करता है, क्योंकि भक्तों का विश्वास है कि इसमें स्नान करने से संतान-प्राप्ति में सहायता मिलती है (Orissa Post)।

Location

How to Reach मुक्तेश्वर मंदिर

मंदिर भुवनेश्वर के ओल्ड टाउन में, भुवनेश्वर से पुरी जाने वाली सड़क के किनारे स्थित है (IGNCA)। निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है और निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर है (Incredible India)। केदार गौरी मंदिर सड़क के ठीक सामने है, और राजारानी मंदिर थोड़ी ही दूरी पर है (Swarajya)।

Location: Odisha, India

Nearest airport: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर

Nearest railway station: भुवनेश्वर

Questions

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मुक्तेश्वर मंदिर: Frequently Asked Questions

मुक्तेश्वर मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?

यहाँ शिव की पूजा गोलाकार योनिपीठ में स्थापित शिवलिंग के रूप में (IGNCA), मुक्तेश्वर नाम से होती है (Incredible India)।

मुक्तेश्वर मंदिर कितना पुराना है?

मंदिर में कोई शिलालेख नहीं है, इसलिए इसकी तिथि का अनुमान इसकी स्थापत्य शैली से लगाया जाता है (Swarajya)। धरोहर अभिलेख इसे सोमवंशियों के अधीन 10वीं शताब्दी ईस्वी का बताता है (IGNCA), जबकि पर्यटन मंत्रालय 875–904 ईस्वी बताता है (Incredible India)।

मुक्तेश्वर तोरण क्या है?

यह मंदिर के सामने स्थित पत्थर का मेहराबदार द्वार है, जो कीर्तिमुख शीर्षों वाले सोलह-पहलू स्तंभों पर टिका है और जिसके दोनों ओर स्त्री आकृतियाँ हैं (Swarajya)। पर्यटन मंत्रालय इसे मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान बताता है (Incredible India)।

मंदिर की देखरेख कौन करता है?

यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षित स्मारक है (IGNCA), जो इसका रखरखाव करता है (Swarajya)।

मरीचि कुंड क्या है?

यह मुक्तेश्वर मंदिर परिसर के भीतर स्थित एक कुंड है (Orissa Post)। भक्तों का विश्वास है कि इसके जल में स्नान करने से संतान-प्राप्ति में सहायता मिलती है, और रुकुण रथ उत्सव की पूर्व संध्या पर इसके जल की नीलामी होती है (Orissa Post)।

मंदिर ठीक-ठीक कहाँ स्थित है?

यह ओडिशा के खुर्दा (खोरधा) ज़िले में भुवनेश्वर के ओल्ड टाउन में, भुवनेश्वर से पुरी की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित है (IGNCA)। केदार गौरी मंदिर सड़क के ठीक सामने है (Swarajya)।

मुक्तेश्वर नृत्य महोत्सव क्या है?

यह मंदिर में आयोजित होने वाला ओडिसी नृत्य का महोत्सव है, जिसे ओडिशा पर्यटन प्रस्तुत करता है (Incredible India)।