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अनंत बसुदेव मंदिर

विष्णु temple · Odisha, India

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अनंत वासुदेव (अनंत बासुदेब) मंदिर ओडिशा के भुवनेश्वर के पुराने शहर (ओल्ड टाउन) में स्थित एक वैष्णव मंदिर है, जो बिंदुसागर सरोवर के पास और लिंगराज मंदिर से लगभग 0.2 km दूर है। ओडिशा पर्यटन (Odisha Tourism) इसे भुवनेश्वर के सबसे प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक बताता है।

इसका निर्माण 13वीं शताब्दी ईस्वी में पूर्वी गंग वंश की रानी चंद्रिका देवी ने करवाया था। ओडिशा पर्यटन के अनुसार यहाँ के देवता विष्णु के अनंत (बलभद्र) और वासुदेव (जगन्नाथ) रूप हैं, और उनके बीच देवी एकानंशा (सुभद्रा) स्थापित हैं।

Faith & Tradition

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Religious Significance of अनंत बसुदेव मंदिर

यह मंदिर अपने दैनिक भोग के लिए जाना जाता है। ओडिशा पर्यटन बताता है कि यहाँ पारंपरिक ओड़िया मंदिर भोजन अभड़ा (प्रसाद) के रूप में परोसा जाता है, जिसमें चावल, दाल और सब्ज़ियों की करी होती है; यह इस विश्वास को दर्शाता है कि प्रभु का भोग सभी भक्तों में बाँटा जाता है।

मंदिर से जुड़े एक शिलालेख, जिसे अनंतवासुदेव शिलालेख कहा जाता है, का उल्लेख ओडिशा रिव्यू (Orissa Review) में किया गया है, क्योंकि इसमें पुराने भुवनेश्वर के पवित्र क्षेत्र एकाम्र क्षेत्र का प्रारंभिक वर्णन मिलता है — एक पवित्र स्थान के रूप में जो 'सैकड़ों आम्र-कुंजों से सुशोभित' है और अनेक मंदिरों से घिरा हुआ है।

Heritage

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History of अनंत बसुदेव मंदिर

ओडिशा पर्यटन इस मंदिर को 13वीं शताब्दी ईस्वी का बताता है और इसके निर्माण का श्रेय पूर्वी गंग वंश की रानी चंद्रिका देवी को देता है। ओडिशा सरकार की पत्रिका ओडिशा रिव्यू (अप्रैल 2011) में दिया गया एक ऐतिहासिक कालक्रम इसे 1278 में रखता है और चंद्रिका देवी को पूर्वी गंग राजा अनंगभीम देव तृतीय की पुत्री बताता है।

यह मंदिर ओडिशा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में 'अनंत बासुदेव मंदिर' (Ananta Basudeva temple), भुवनेश्वर नाम से शामिल है।

Architecture and sacred features

ओडिशा पर्यटन के अनुसार यह परिसर कलिंग स्थापत्य का पूर्ण विकसित उदाहरण है। इसके चार मुख्य भाग हैं: देउल (गर्भगृह का शिखर), जगमोहन (सभा मंडप), नट-मंडप (नृत्य मंडप, जहाँ कभी अनुष्ठानिक प्रस्तुतियाँ होती थीं) और भोग-मंडप (नैवेद्य मंडप), जो आज भी मंदिर के भोग से जुड़ा हुआ है।

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Darshan and Visitor Information

ओडिशा पर्यटन की सूची के अनुसार (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया), कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। वेशभूषा के नियम और प्रवेश संबंधी नियम बदल सकते हैं, इसलिए यात्रा से पहले ओडिशा पर्यटन या मंदिर कार्यालय से वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with the temple administration before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Location

How to Reach अनंत बसुदेव मंदिर

यह मंदिर भुवनेश्वर के पुराने शहर (ओल्ड टाउन) में, बिंदुसागर और लिंगराज मंदिर के पास है। ओडिशा पर्यटन के अनुसार निकटतम हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर है और निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन है।

Location: Odisha, India

Nearest airport: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर

Nearest railway station: भुवनेश्वर

Questions

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अनंत बसुदेव मंदिर: Frequently Asked Questions

अनंत वासुदेव मंदिर किसने बनवाया?

पूर्वी गंग वंश की रानी चंद्रिका देवी ने, 13वीं शताब्दी ईस्वी में। ओडिशा रिव्यू (Orissa Review) उन्हें राजा अनंगभीम देव तृतीय की पुत्री बताता है और मंदिर का समय 1278 मानता है।

अनंत वासुदेव मंदिर में किन देवताओं की पूजा होती है?

ओडिशा पर्यटन (Odisha Tourism) के अनुसार यहाँ के देवता विष्णु के अनंत (बलभद्र) और वासुदेव (जगन्नाथ) रूप हैं, और उनके बीच देवी एकानंशा (सुभद्रा) विराजमान हैं।

अनंत वासुदेव मंदिर में परोसा जाने वाला अभड़ा क्या है?

यह मंदिर का भोग (प्रसाद) है। ओडिशा पर्यटन इसे चावल, दाल और सब्ज़ियों की करी वाला पारंपरिक ओड़िया भोजन बताता है।

अनंत वासुदेव मंदिर लिंगराज मंदिर से कितनी दूर है?

ओडिशा पर्यटन के अनुसार लगभग 0.2 km। दोनों मंदिर भुवनेश्वर के पुराने शहर (ओल्ड टाउन) में, बिंदुसागर सरोवर के पास हैं।

क्या अनंत वासुदेव मंदिर एक संरक्षित स्मारक है?

हाँ। यह ओडिशा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल है।

क्या प्रवेश शुल्क है?

ओडिशा पर्यटन के अनुसार कोई प्रवेश शुल्क नहीं है (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया)। यात्रा से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।