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राजरानी मंदिर

Odisha, India

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राजारानी मंदिर ओडिशा के खुर्दा (खोर्धा) ज़िले में भुवनेश्वर के ओल्ड टाउन में स्थित एक पाषाण मंदिर है (IGNCA)। अब यह पूजा-स्थल नहीं है: धरोहर प्रलेखन अभिलेख इसे एक ऐसा अजीवित मंदिर बताता है जिसके अधिष्ठाता देवता की मूर्ति अब लुप्त है (IGNCA)। गर्भगृह में किसी देवता की प्रतिमा नहीं है, और मंदिर को शैव के रूप में वर्गीकृत किया जाता है (Incredible India), जबकि एक अन्य विवरण के अनुसार यह किसी विशेष देवता को समर्पित नहीं है (Outlook Traveller)।

यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के भुवनेश्वर मंडल के अंतर्गत एक संरक्षित स्मारक है (IGNCA), और पर्यटन मंत्रालय के अनुसार ASI ने इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया है (Incredible India)। यह अपनी बाहरी दीवारों को ढकने वाली नक्काशीदार आकृतियों के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है (Incredible India)।

Faith & Tradition

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Religious Significance of राजरानी मंदिर

पर्यटन मंत्रालय राजारानी को मंदिर स्थापत्य की कलिंग शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताता है (Incredible India), और एक यात्रा लेख के अनुसार इसमें उस शैली की बारीकी दिखाई देती है (Outlook Traveller)। धरोहर अभिलेख में उल्लेख है कि मंदिर अपनी स्थापत्य सुंदरता के लिए जाना जाता है (IGNCA)।

मंदिर परिसर में राजारानी संगीत महोत्सव आयोजित होता है, जो शास्त्रीय संगीत का तीन दिवसीय कार्यक्रम है और जिसका आयोजन राज्य पर्यटन विभाग करता है (Orissa Post)।

Heritage

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History of राजरानी मंदिर

यहाँ प्रयुक्त स्रोतों में किसी स्थापना-शिलालेख का उल्लेख नहीं है। स्थापत्य और मूर्तिकला के आधार पर धरोहर प्रलेखन अभिलेख मंदिर को सोमवंशी शासनकाल, यानी 10वीं शताब्दी ईस्वी के अंत या 11वीं शताब्दी ईस्वी के आरंभ का मानता है (IGNCA)। पर्यटन मंत्रालय इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में बताता है (Incredible India), और शहर के प्राचीन मंदिरों पर एक यात्रा लेख भी यही कहता है (Outlook Traveller)।

राजारानी नाम की व्याख्या सामान्यतः मंदिर निर्माण में प्रयुक्त लाल और पीले बलुआ पत्थर से की जाती है (Incredible India; Outlook Traveller)। प्रलेखन प्रपत्र में मंदिर से जुड़े किसी अनुष्ठान या ऐतिहासिक घटना का कोई अभिलेख नहीं है, और उसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इसका वर्तमान संरक्षक बताया गया है (IGNCA)।

Architecture and sacred features

मंदिर पूर्वमुखी है और इसके दो भाग हैं—कलिंग शैली का रेखा विमान (गर्भगृह के ऊपर वक्र शिखर) और पीढ़ा जगमोहन (सीढ़ीनुमा पिरामिडाकार छत वाला मंडप), जो एक अनियमित परकोटे के भीतर स्थित हैं (IGNCA)। यह बलुआ पत्थर से शुष्क आश्लर चिनाई में बना है, जबकि परकोटा लैटेराइट पत्थर का है (IGNCA)। दीवारें तीन ऊर्ध्वाधर खंडों (त्रिअंगबाड़) में विभाजित हैं, और जगमोहन के कोनों पर रेखा शैली के छोटे मंदिर जुड़े हैं; अभिलेख के अनुसार यह व्यवस्था संभवतः पंचायतन योजना पर आधारित हो सकती है (IGNCA)।

बाहरी भाग पर बेल-बूटे, चैत्य अलंकरण, जालीदार काम, हाथी और सिंह हैं, साथ ही सूर्य, नटराज, अर्धनारीश्वर, लकुलीश, हरिहर और पार्वती की प्रतिमाएँ तथा विद्याधरों, नायिकाओं और युगलों की आकृतियाँ हैं (IGNCA)। भीतरी भाग सादा है (IGNCA)। यात्रा लेखक विशेष रूप से इसकी दीवारों पर बनी दिव्य नारी आकृतियों और अलंकारिक नमूनों का उल्लेख करते हैं (Outlook Traveller)।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

राजारानी एक संरक्षित स्मारक है, सक्रिय देवालय नहीं, इसलिए यहाँ दैनिक पूजा नहीं होती (IGNCA)। दर्शन का समय और प्रवेश व्यवस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा निर्धारित की जाती है; यात्रा से पहले ASI भुवनेश्वर मंडल से वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भुवनेश्वर मंडल before travelling. Last reviewed 11 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at राजरानी मंदिर

तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं

राजारानी संगीत महोत्सव

मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय शास्त्रीय संगीत महोत्सव, जिसमें हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की प्रस्तुतियाँ होती हैं और जिसका आयोजन राज्य पर्यटन विभाग करता है (Orissa Post)।

Location

How to Reach राजरानी मंदिर

मंदिर भुवनेश्वर के ओल्ड टाउन में टंकपाणि रोड के दाहिनी ओर है, जो रवि टॉकीज़ चौक से निकलती है (IGNCA)। निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है और निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर है (Incredible India)। लिंगराज, मुक्तेश्वर और अनंत वासुदेव मंदिर आसपास के दर्शनीय स्थलों में सूचीबद्ध हैं (Incredible India)।

Location: Odisha, India

Nearest airport: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर

Nearest railway station: भुवनेश्वर

Questions

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राजरानी मंदिर: Frequently Asked Questions

राजारानी मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?

किसी की नहीं। मंदिर में पूजा नहीं होती और इसके अधिष्ठाता देवता की मूर्ति लुप्त है (IGNCA)। गर्भगृह में कोई प्रतिमा न होने पर भी इसे शैव मंदिर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है (Incredible India)।

इसे राजारानी क्यों कहा जाता है?

यह नाम प्रायः उस लाल और पीले बलुआ पत्थर से जोड़ा जाता है जिससे मंदिर बना है (Incredible India; Outlook Traveller)।

राजारानी मंदिर कितना पुराना है?

धरोहर प्रलेखन अभिलेख इसकी शैली के आधार पर इसे सोमवंशी काल, यानी 10वीं शताब्दी ईस्वी के अंत या 11वीं शताब्दी के आरंभ का बताता है (IGNCA)। पर्यटन मंत्रालय इसे 11वीं शताब्दी का बताता है (Incredible India)।

मंदिर की देखरेख कौन करता है?

यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षित स्मारक है, जो भुवनेश्वर मंडल के अंतर्गत आता है (IGNCA)।

यह किस स्थापत्य शैली का है?

इसमें कलिंग शैली का रेखा विमान और पीढ़ा जगमोहन है, जो बलुआ पत्थर से शुष्क आश्लर चिनाई (बिना गारे की तराशी पत्थर की चिनाई) में बना है (IGNCA)।

राजारानी संगीत महोत्सव क्या है?

यह मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय शास्त्रीय संगीत महोत्सव है, जिसका आयोजन राज्य पर्यटन विभाग करता है (Orissa Post)।

मंदिर कहाँ स्थित है?

यह खुर्दा ज़िले के भुवनेश्वर ओल्ड टाउन में, टंकपाणि रोड के दाहिनी ओर स्थित है (IGNCA)।