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कपिलेश्वर मंदिर

शिव temple · Odisha, India

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कपिलेश्वर शिव मंदिर ओडिशा के खुर्दा (खोरधा) ज़िले में भुवनेश्वर के पुराने शहर (ओल्ड टाउन) के किनारे बसे कपिलेश्वर गाँव का एक जीवंत शिव मंदिर है, जहाँ अधिष्ठाता देवता गोलाकार योनिपीठ में स्थापित शिवलिंग हैं (IGNCA)। यहाँ शिव की पूजा कपिलेश्वर नाम से होती है (News24)। मंदिर कपिलेश्वर रोड के अंत में स्थित है, जो लिंगराज मंदिर से कपिलेश्वर गाँव तक जाती है (IGNCA; OdishaBytes), और यह लिंगराज मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर है (Outlook Traveller; News24)।

मंदिर ओडिशा की कलिंग शैली में बना है (IGNCA; Outlook Traveller)। मई 2023 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन लाने के लिए राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित की (OdishaTV; Outlook Traveller)।

Faith & Tradition

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Religious Significance of कपिलेश्वर मंदिर

यह मंदिर ओडिशा में महाशिवरात्रि मनाए जाने वाले प्रमुख स्थानों में से एक है, और हज़ारों श्रद्धालु रात में अनुष्ठानों के लिए आते हैं (OdishaBytes)। उस रात श्रद्धालु मंदिर परिसर में मिट्टी के दीये जलाकर जागर करते हैं (OdishaBytes), और मंदिर के विरासत दस्तावेज़ों में भी शीतलषष्ठी के साथ जागर को यहाँ के अनुष्ठानों में दर्ज किया गया है (IGNCA)।

मंदिर मणिकर्णिका कुंड के उत्तरी तट पर स्थित है (Outlook Traveller), जहाँ महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु प्रार्थना करते हैं और पवित्र डुबकी लगाते हैं (OdishaBytes)। विरासत दस्तावेज़ों के अनुसार मंदिर का उपयोग विवाह और सगाई के लिए भी होता है (IGNCA)।

Heritage

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History of कपिलेश्वर मंदिर

यह मंदिर गजपति कपिलेंद्र देव से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है। विरासत दस्तावेज़ीकरण अभिलेख के अनुसार मंदिर में स्थित एक शिलालेख इसे सूर्यवंशी गजपति राजवंश के राजा कपिलेंद्रदेव से जोड़ता है, और स्थानीय मान्यता भी इससे सहमत है, जो मंदिर को 14वीं शताब्दी ईसवी का मानती है (IGNCA)। समाचार रिपोर्टें मंदिर को इससे पुराना बताती हैं और कहती हैं कि माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में गजपति कपिलेंद्र देव ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था (Outlook Traveller; News24)।

मूल मंदिर की आयु निश्चित नहीं है। कुछ इतिहासकार मंदिर को कपिलेंद्र देव के शासनकाल का मानते हैं, जबकि कुछ शिलालेखों और मूर्तियों को 11वीं शताब्दी से पहले के काल की ओर संकेत करने वाला समझा गया है (OdishaBytes)। चूँकि स्रोतों में मतभेद है, इसलिए यहाँ कोई एक स्थापना-तिथि नहीं दी गई है (IGNCA; Outlook Traveller; OdishaBytes)।

विरासत दस्तावेज़ीकरण अभिलेख में जर्जरता के संकेत दर्ज किए गए, जिनमें नाटमंडप की छत की दरारों से बारिश का पानी रिसना शामिल था, और उपेक्षा तथा शहरी दबाव को ख़तरों के रूप में सूचीबद्ध किया गया (IGNCA)। मई 2023 में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण, कचरे और सीवेज को लेकर केंद्रीय संस्कृति मंत्री को पत्र लिखा (OdishaBytes)। उसी महीने संस्कृति मंत्रालय ने मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के अपने इरादे की राजपत्र अधिसूचना जारी की और दो महीने के भीतर आपत्तियाँ आमंत्रित कीं (OdishaTV), और बताया गया कि मंदिर को ASI की संरक्षित स्मारकों की सूची में जोड़ा गया (Outlook Traveller; News24)।

अगस्त 2026 तक मंदिर के रखरखाव और संरक्षण का दायित्व ASI को सौंप दिया गया था (OdishaTV; OdishaBytes), जिसने मंदिर परिसर के भीतर चरणबद्ध जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिया था (OdishaBytes)।

Architecture and sacred features

मंदिर पूर्वमुखी है और कलिंग शैली में बना है, जिसमें रेख शैली का विमान तथा पीढ़ शैली के जगमोहन, नाटमंडप और भोगमंडप हैं (IGNCA)। तल-योजना में एक आयताकार चबूतरे पर विमान, अंतराल, जगमोहन, नाटमंडप और भोगमंडप स्थित हैं; आयताकार नाटमंडप को छोड़कर सभी भाग वर्गाकार हैं (IGNCA)। मंदिर योजना में पंचरथ और ऊँचाई में पंचांगबाड़ है, इसकी बाहरी दीवारों पर खाखरामुंडी और पीढ़ामुंडी अलंकरण हैं, और यह धूसर बलुआ पत्थर से एश्लर चिनाई में बना है, जबकि नींव और चारदीवारी के लिए लैटेराइट का उपयोग हुआ है (IGNCA)।

मंदिर एक ऐसे परिसर में स्थित है जिसमें कई छोटे मंदिर हैं, जिनमें गुप्तेश्वर शिव मंदिर भी है, जिसे दस्तावेज़ीकरण अभिलेख कपिलेश्वर मंदिर परिसर के भीतर बताता है (IGNCA)।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

यह मंदिर एक सक्रिय उपासना स्थल है, और परिसर के भीतर ASI द्वारा जीर्णोद्धार कार्य की सूचना मिली है (IGNCA; OdishaBytes)। यात्रा से पहले दर्शन की वर्तमान व्यवस्थाओं की पुष्टि कपिलेश्वर मंदिर ट्रस्ट बोर्ड या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भुवनेश्वर मंडल से अवश्य कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with कपिलेश्वर मंदिर ट्रस्ट बोर्ड (IGNCA); रखरखाव और संरक्षण का दायित्व ASI को सौंपा गया (2026 की रिपोर्टें) before travelling. Last reviewed 11 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at कपिलेश्वर मंदिर

फ़रवरी–मार्च (फाल्गुन)

महाशिवरात्रि

हज़ारों श्रद्धालु रात में मंदिर आते हैं, मिट्टी के दीयों के साथ जागर करते हैं और मणिकर्णिका कुंड में स्नान करते हैं (OdishaBytes)।

तिथि बदलती रहती है (चंद्र पंचांग)

शीतलषष्ठी

विरासत दस्तावेज़ों के अनुसार शीतलषष्ठी इस मंदिर में दर्ज अनुष्ठानों में से एक है (IGNCA)।

Location

How to Reach कपिलेश्वर मंदिर

मंदिर कपिलेश्वर रोड के अंत में है, जो भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर से कपिलेश्वर गाँव तक जाती है (IGNCA; OdishaBytes)। निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, और निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर है (Outlook Traveller)।

अगस्त 2026 में ओडिशा सरकार ने मंदिर को सीधी सड़क पहुँच देने के लिए गंगुआ नहर पर एक पुल और लगभग दो किलोमीटर लंबी संपर्क सड़क को मंज़ूरी दी; निर्माण कार्य निर्माण विभाग (Works Department) द्वारा शुरू किए जाने की अपेक्षा थी (OdishaTV; OdishaBytes)।

Location: Odisha, India

Nearest airport: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर

Nearest railway station: भुवनेश्वर

Questions

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कपिलेश्वर मंदिर: Frequently Asked Questions

कपिलेश्वर शिव मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?

यहाँ शिव की पूजा गोलाकार योनिपीठ में स्थापित शिवलिंग के रूप में होती है (IGNCA), और उन्हें कपिलेश्वर नाम से पूजा जाता है (News24)।

भुवनेश्वर में कपिलेश्वर मंदिर कहाँ है?

यह खुर्दा ज़िले में भुवनेश्वर के पुराने शहर (ओल्ड टाउन) के कपिलेश्वर गाँव में, लिंगराज मंदिर से निकलने वाली कपिलेश्वर रोड के अंत में स्थित है (IGNCA; OdishaBytes)। यह लिंगराज मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर है (Outlook Traveller)।

कपिलेश्वर मंदिर का निर्माण किसने करवाया?

मंदिर में स्थित एक शिलालेख इसे सूर्यवंशी राजवंश के गजपति कपिलेंद्रदेव से जोड़ता है (IGNCA)। अन्य रिपोर्टों के अनुसार कपिलेंद्र देव ने 14वीं शताब्दी में एक पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था, और मूल निर्माण-काल अब भी विवादित है (Outlook Traveller; OdishaBytes)।

क्या कपिलेश्वर मंदिर ASI द्वारा संरक्षित है?

मई 2023 में संस्कृति मंत्रालय ने मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के अपने इरादे की अधिसूचना जारी की (OdishaTV), और बताया गया कि इसे ASI की संरक्षित सूची में जोड़ा गया (Outlook Traveller)। 2026 तक इसके रखरखाव और संरक्षण का दायित्व ASI को सौंप दिया गया था (OdishaTV; OdishaBytes)।

मंदिर के पास स्थित कुंड कौन-सा है?

मंदिर मणिकर्णिका कुंड के उत्तरी तट पर स्थित है (Outlook Traveller)। महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु इसमें स्नान करते हैं (OdishaBytes)।

मंदिर किस स्थापत्य शैली का है?

यह कलिंग शैली का है, जिसमें धूसर बलुआ पत्थर से बना रेख विमान और पीढ़-छत वाले जगमोहन, नाटमंडप और भोगमंडप हैं (IGNCA)।

मंदिर तक कैसे पहुँचें?

निकटतम हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है और निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर है (Outlook Traveller)। पहुँच सुगम बनाने के लिए 2026 में गंगुआ नहर पर एक नए पुल और दो किलोमीटर लंबी संपर्क सड़क को मंज़ूरी दी गई (OdishaTV)।