उमा महेश्वर व्रत भाद्रपद पूर्णिमा को किया जाता है, जिसमें भगवान शिव और देवी पार्वती को एक साथ उमा-महेश्वर — आदर्श दिव्य दंपति — के रूप में पूजा जाता है। यह शिव और शक्ति के ऐक्य तथा दिव्य दांपत्य का प्रतीक है।

व्रत का महत्त्व

भाद्रपद की पूर्णिमा पर शिव-पार्वती की उमा-महेश्वर रूप में आराधना होती है। व्रत में अभिषेक, अलंकरण, दीपाराधना, नैवेद्य, शिवनाम स्मरण और मंत्रजप किए जाते हैं। भक्त उपवास या नियम के साथ व्रत करते हैं और सामर्थ्य अनुसार दान-धर्म करते हैं।

दांपत्य सुख और पारिवारिक कल्याण

उमा-महेश्वर को आदर्श दंपति मानकर — पति-पत्नी के बीच परस्पर प्रेम, पारिवारिक एकता, सुख-शांति, संतान वृद्धि, सौभाग्य और शुभ संपदा के लिए यह व्रत किया जाता है।

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आध्यात्मिक दृष्टि से शिव चैतन्य के और उमा शक्ति के प्रतीक हैं। शिव-शक्ति के ऐक्य का स्मरण करते हुए भक्ति से यह व्रत करने में यह संदेश निहित है — भक्ति, धर्ममय जीवन, और परिवार में प्रेम-एकता का संवर्धन।

🙏 उमा-महेश्वर की कृपा से हर परिवार में सुख-शांति, एकता, आरोग्य, सौभाग्य और शुभ फल प्राप्त हों।

ॐ श्री उमामहेश्वराभ्यां नमः।

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