संक्षिप्त उत्तर: मार्गशीर्ष (अगहन) मास 2026 में अमांत गणना के अनुसार लगभग 9 दिसंबर से 23 दिसंबर 2026 तक चलता है। गीता में श्रीकृष्ण इसे 'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्' कहते हैं। इस माह विवाह पंचमी, गीता जयंती और दत्तात्रेय जयंती जैसे पर्व आते हैं। सटीक तिथि के लिए अपने पंचांग की पुष्टि करें [VERIFY]।

मार्गशीर्ष मास, जिसे उत्तर भारत में 'अगहन' और शास्त्रों में 'मार्गशीर्ष' या 'सहस्य' भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का अत्यंत पवित्र महीना माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विभूति बताते हुए कहा है—'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्', अर्थात् महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसी कारण यह माह भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा और साधना का समय है।

इस लेख में हम मार्गशीर्ष मास 2026 की प्रमुख तिथियों, इस माह में आने वाले व्रत-पर्वों, पूजा-विधि, नियम, क्षेत्रीय परंपराओं और इससे जुड़े धार्मिक महत्व को परंपरा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। तिथियाँ पंचांग के अनुसार स्थान और गणना-पद्धति के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अंतिम निर्णय के लिए अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय मंदिर के पंचांग का अनुसरण करें।

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मार्गशीर्ष मास 2026 की मुख्य तिथियाँ (Quick Facts)

  • मास का नाममार्गशीर्ष / अगहन (हिंदू पंचांग का 9वाँ मास)
  • अमांत गणना अवधिलगभग 9 दिसंबर से 23 दिसंबर 2026 तक [VERIFY]
  • अमावस्या (मास आरंभ के निकट)8/9 दिसंबर 2026 [VERIFY]
  • पूर्णिमा23/24 दिसंबर 2026 [VERIFY]
  • आराध्य देवभगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी
  • विशेष उक्ति'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्' — भगवद्गीता (10.35)

ध्यान दें: उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार) में प्रचलित पूर्णिमांत गणना और महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र आदि में प्रचलित अमांत गणना में मास आरंभ-समाप्ति की तिथियाँ भिन्न होती हैं। दोनों ही पद्धतियाँ शास्त्र-सम्मत हैं; किसी एक को श्रेष्ठ या ग़लत नहीं कहा जा सकता। अपने परिवार व मंदिर की परंपरा के अनुसार तिथि तय करें।

मार्गशीर्ष मास 2026 के प्रमुख व्रत-पर्व

पर्वसंभावित तिथि (2026)
विवाह पंचमी (श्रीराम-सीता विवाहोत्सव)13/14 दिसंबर 2026 [VERIFY]
चंपा षष्ठी / स्कंद षष्ठी15 दिसंबर 2026 [VERIFY]
मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती20 दिसंबर 2026 [VERIFY]
मार्गशीर्ष पूर्णिमा23/24 दिसंबर 2026 [VERIFY]
दत्तात्रेय जयंती / अन्नपूर्णा जयंती23 दिसंबर 2026 [VERIFY]

मार्गशीर्ष मास का धार्मिक महत्व

परंपरा के अनुसार मार्गशीर्ष मास को सत्ययुग का आरंभ-मास और श्रीकृष्ण की विभूति माना जाता है। इसी माह में भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था, इसलिए गीता जयंती का इस माह विशेष स्थान है। दक्षिण भारत में इस माह को 'मार्गळि' कहते हैं और इसमें प्रातःकालीन भजन, तिरुप्पावै तथा तिरुवेम्बावै का पाठ भक्ति-भाव से किया जाता है।

पूजा-विधि: सामान्य क्रम

  1. प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा-स्थल को स्वच्छ कर भगवान श्रीकृष्ण अथवा विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
  3. दीप और धूप प्रज्वलित कर तुलसी दल, पुष्प, चंदन व नैवेद्य अर्पित करें।
  4. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप अथवा विष्णु सहस्रनाम/गीता के श्लोकों का पाठ श्रद्धानुसार करें।
  5. यथासंभव गीता के किसी अध्याय का पठन-मनन करें; गीता जयंती पर यह विशेष रूप से किया जाता है।
  6. अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें और सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या द्रव्य का दान करें।

उपवास और नियम

मार्गशीर्ष मास में अनेक भक्त एकादशी, चंपा षष्ठी या पूर्णिमा पर उपवास रखते हैं। उपवास फलाहार, जल-उपवास या नियमित सात्त्विक आहार के रूप में—परंपरा के अनुसार अलग-अलग रीति से किया जाता है।

  • उपवास के दिन तामसिक भोजन, मांस-मदिरा से परहेज़ और सत्संग-भजन को प्रधानता दी जाती है।
  • किसी भी व्यक्ति को जो किसी रोग से ग्रस्त हो, गर्भवती हो, या जिसे चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता हो, उपवास से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
  • उपवास श्रद्धा और सामर्थ्य का विषय है; इसे किसी वज़न या आहार-योजना से न जोड़ें।

कौन रख सकता है व्रत और कैसे करें उपासना

मार्गशीर्ष मास की उपासना और व्रत सभी श्रद्धालु—स्त्री, पुरुष, विवाहित या अविवाहित—अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कर सकते हैं। कुछ पारंपरिक मत विशेष व्रतों को स्त्रियों या विशेष वर्ग से जोड़ते हैं, जबकि समकालीन व्यवहार में इनमें व्यापक सहभागिता दिखाई देती है। किसी को व्रत के लिए न तो बाध्य किया जाना चाहिए और न ही वंचित; पात्रता व रीति का अंतिम निर्णय अपने परिवार और मंदिर की परंपरा के अनुसार करें।

सरल रूप में इस माह की उपासना इस प्रकार की जा सकती है: प्रातः स्नान, श्रीकृष्ण-विष्णु का स्मरण, तुलसी-सेवा, गीता-पाठ, यथाशक्ति दान और संध्या-दीपदान। घर के सभी सदस्य भजन-कीर्तन में सम्मिलित हो सकते हैं।

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क्षेत्रीय परंपराएँ

  • तमिलनाडु व दक्षिण भारत: इस माह को 'मार्गळि' कहते हैं; प्रातःकालीन तिरुप्पावै और तिरुवेम्बावै पाठ तथा मंदिरों में विशेष भजन-सत्र होते हैं।
  • उत्तर भारत: 'अगहन' मास में विष्णु-लक्ष्मी पूजा, तुलसी-सेवा और गुरुवार व्रत की परंपरा प्रचलित है।
  • महाराष्ट्र व कर्नाटक: मार्गशीर्ष के गुरुवार को लक्ष्मी-व्रत (महालक्ष्मी व्रत) श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
  • मिथिला व अयोध्या क्षेत्र: विवाह पंचमी पर श्रीराम-सीता विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
  • दत्त संप्रदाय क्षेत्र: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दत्तात्रेय जयंती के विशेष उत्सव और पारायण होते हैं।

गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है और इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है—यह भगवद्गीता के प्राकट्य का पर्व माना जाता है। 2026 में यह लगभग 20 दिसंबर को पड़ रहा है [VERIFY]; एकादशी तिथि का आरंभ-समापन स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है। इस दिन भक्त गीता-पाठ, विष्णु-उपासना और उपवास परंपरा के अनुसार करते हैं।

मंत्र व स्तोत्र केवल पारंपरिक व सार्वजनिक-प्रचलित पाठ के रूप में ग्रहण करें। विष्णु सहस्रनाम जैसे दीर्घ स्तोत्रों को यहाँ पूर्ण रूप में उद्धृत करने के बजाय केवल उनके पाठ की परंपरा बताई गई है; पूर्ण पाठ के लिए प्रामाणिक ग्रंथ का सहारा लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्गशीर्ष मास 2026 में कब से कब तक है?

अमांत गणना के अनुसार मार्गशीर्ष मास 2026 में लगभग 9 दिसंबर से 23 दिसंबर तक रहता है [VERIFY]। पूर्णिमांत गणना में यह इससे कुछ पहले आरंभ हो जाता है। सटीक तिथि के लिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

मार्गशीर्ष और अगहन में क्या अंतर है?

दोनों एक ही मास के नाम हैं। शास्त्रीय व दक्षिण भारतीय परंपरा में इसे 'मार्गशीर्ष' और उत्तर भारत की लोक-भाषा में 'अगहन' कहा जाता है। यह हिंदू पंचांग का 9वाँ मास है।

इस माह को श्रीकृष्ण का महीना क्यों कहते हैं?

भगवद्गीता (10.35) में श्रीकृष्ण अपनी विभूति बताते हुए कहते हैं—'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्', अर्थात् महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसी कारण यह माह श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय व पावन माना जाता है।

मार्गशीर्ष मास 2026 के प्रमुख पर्व कौन-से हैं?

इस माह विवाह पंचमी (13/14 दिसंबर), चंपा षष्ठी (15 दिसंबर), मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती (20 दिसंबर), मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती (23 दिसंबर) प्रमुख हैं [VERIFY]।

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अमांत और पूर्णिमांत पंचांग में तिथियाँ अलग क्यों हैं?

अमांत पद्धति में मास अमावस्या पर समाप्त होता है, जबकि पूर्णिमांत में पूर्णिमा पर। इसी कारण मास आरंभ-समाप्ति की तिथियाँ भिन्न होती हैं। दोनों शास्त्र-सम्मत हैं; अपने कुल व मंदिर की परंपरा का अनुसरण करें।

मार्गशीर्ष मास का व्रत कौन रख सकता है?

स्त्री-पुरुष, विवाहित-अविवाहित सभी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार व्रत व उपासना कर सकते हैं। पात्रता व रीति पर पारंपरिक मत भिन्न हैं, इसलिए अंतिम निर्णय अपने परिवार और मंदिर की परंपरा के अनुसार करें।

क्या उपवास रखते समय कोई सावधानी आवश्यक है?

हाँ। जो व्यक्ति किसी रोग से ग्रस्त हो, गर्भवती हो या चिकित्सकीय देखभाल में हो, उसे उपवास से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए। उपवास श्रद्धा का विषय है, इसे आहार-योजना से न जोड़ें।

गीता जयंती 2026 कब है?

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) को गीता जयंती मनाई जाती है, जो 2026 में लगभग 20 दिसंबर को पड़ रही है [VERIFY]। एकादशी तिथि का आरंभ-समापन स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है।