संक्षिप्त उत्तर: दिवाली 2026 पर समृद्धि और शांति के लिए भक्तगण मुख्यतः गणेश मंत्र से आरंभ कर, लक्ष्मी मंत्र और विष्णु मंत्र जपते हैं। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को है, जब स्वच्छ मन और श्रद्धा से मंत्र जप सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।

दिवाली प्रकाश, समृद्धि और आंतरिक शांति का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इन पावन दिनों में श्रद्धापूर्वक किया गया मंत्र जप मन को स्थिर करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। दिवाली 2026 पर लक्ष्मी, गणेश और विष्णु के प्रामाणिक मंत्रों के जप से भक्त धन-धान्य, विघ्न-नाश और दिव्य आशीर्वाद की कामना करते हैं।

दिवाली 2026 की मुख्य तिथियाँ

मंत्र जप की योजना बनाने से पहले दिवाली 2026 के पाँच दिनों की तिथियाँ जान लेना उपयोगी है। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार होने के कारण इस वर्ष विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है।

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पर्वतिथि
धनतेरसशुक्रवार 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवालीशनिवार 7 नवंबर 2026
दिवाली / लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिन)रविवार 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार 10 नवंबर 2026

मंत्र जप क्यों करें?

मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि ध्वनि-कंपन हैं जो मन को एकाग्र करते हैं और वातावरण को पवित्र बनाते हैं। परंपरा के अनुसार दिवाली के दिनों में देवी-देवताओं की उपासना और मंत्र जप से घर में शुभता, स्थिरता और शांति का वास होता है। नियमित जप श्रद्धा, धैर्य और आंतरिक संतुलन को भी बढ़ाता है।

श्रीगणेश मंत्र — शुभारंभ और विघ्न-नाश

किसी भी शुभ कार्य और पूजा का आरंभ भगवान गणेश की वंदना से किया जाता है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता और बुद्धि-प्रदाता माने जाते हैं। दिवाली पूजा से पूर्व गणेश जी का सरल बीज मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' जपना अत्यंत प्रचलित है, जो बाधाओं को दूर कर मार्ग प्रशस्त करने की भावना से जपा जाता है।

  • 'ॐ गं गणपतये नमः' — यह प्रसिद्ध गणेश बीज मंत्र सरल और प्रभावशाली माना जाता है।
  • पूजा आरंभ करने से पहले इसका 11 या 21 बार जप करने की परंपरा है।
  • जप के समय मन को शांत रखें और गणेश जी के स्वरूप का ध्यान करें।

माँ लक्ष्मी मंत्र — समृद्धि और धन-वैभव

दिवाली की रात्रि मुख्यतः धन और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित है। रविवार 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा के अवसर पर भक्त 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' जैसे प्रसिद्ध मंत्र का जप कर घर में स्थायी समृद्धि और शुभता की कामना करते हैं। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ किया गया जप सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।

  • 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — महालक्ष्मी का प्रसिद्ध बीज मंत्र, समृद्धि हेतु जपा जाता है।
  • श्री सूक्त का पाठ भी दिवाली पर विशेष रूप से किया जाता है; इसे किसी प्रामाणिक स्रोत से पढ़ें।
  • जप से पहले दीप प्रज्वलित करें और स्थान को स्वच्छ व सुगंधित रखें।

भगवान विष्णु मंत्र — शांति और रक्षा

माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए विष्णु उपासना समृद्धि के साथ शांति और सुरक्षा भी प्रदान करने वाली मानी जाती है। दिवाली पर 'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे प्रसिद्ध विष्णु मंत्रों का जप मन में शांति और घर में सामंजस्य लाने की भावना से किया जाता है।

सरल जप विधि

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें।
  2. दीप या घी का दीया प्रज्वलित करें और मन को शांत करें।
  3. सबसे पहले गणेश मंत्र से आरंभ करें, फिर लक्ष्मी और विष्णु मंत्र जपें।
  4. रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जप करने की परंपरा है; न हो तो श्रद्धा से जितना संभव हो जपें।
  5. जप समाप्ति पर देवी-देवताओं को धन्यवाद देकर सबके कल्याण की प्रार्थना करें।

जप के समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • उच्चारण स्पष्ट और शांत रखें; गति से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठना शुभ माना जाता है।
  • मन में एकाग्रता बनाए रखें और बीच में बातचीत से बचें।
  • सटीक 2026 मुहूर्त समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की घोषणा देखें।
  • सर्वोत्तम दिनरविवार 8 नवंबर 2026 (लक्ष्मी पूजा)
  • आरंभ मंत्रश्रीगणेश मंत्र
  • मुख्य भावसमृद्धि, शांति व कृतज्ञता

याद रखें, मंत्र जप का वास्तविक फल श्रद्धा, पवित्रता और निरंतरता में निहित है। दिवाली 2026 पर इन प्रामाणिक मंत्रों को प्रेम और भक्ति से जपें और अपने घर में प्रकाश, समृद्धि तथा शांति का आह्वान करें। सटीक तिथि-समय व स्थानीय आयोजनों के लिए अपने निकटतम मंदिर या समुदाय की घोषणाओं की पुष्टि अवश्य करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 की मुख्य लक्ष्मी पूजा किस दिन है?

दिवाली 2026 की मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को है। रविवार होने के कारण इस दिन को विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है और मंत्र जप के लिए उत्तम माना जाता है।

दिवाली पर सबसे पहले किस मंत्र का जप करना चाहिए?

परंपरा के अनुसार किसी भी पूजा का आरंभ भगवान गणेश की वंदना से किया जाता है। इसलिए दिवाली पर सबसे पहले 'ॐ गं गणपतये नमः' जैसे गणेश मंत्र का जप कर विघ्नों के नाश की कामना की जाती है।

समृद्धि के लिए कौन-सा लक्ष्मी मंत्र प्रसिद्ध है?

समृद्धि के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' महालक्ष्मी का एक प्रसिद्ध और सरल बीज मंत्र है। इसके साथ श्री सूक्त का पाठ भी दिवाली पर श्रद्धापूर्वक किया जाता है।

क्या दिवाली पर विष्णु मंत्र जपना उचित है?

हाँ, माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी मानी जाती हैं, इसलिए 'ॐ नमो नारायणाय' जैसे विष्णु मंत्र दिवाली पर शांति और सुरक्षा की भावना से जपे जाते हैं।

मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

परंपरागत रूप से माला से 108 बार जप करने की प्रथा है। यदि इतना संभव न हो तो 11, 21 या 27 बार श्रद्धापूर्वक जप भी उत्तम माना जाता है। भाव और एकाग्रता संख्या से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

जप के लिए दिशा का क्या महत्व है?

जप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठना शुभ माना जाता है। हालांकि, स्वच्छ मन और शांत वातावरण दिशा से भी अधिक महत्वपूर्ण है।

सटीक पूजा मुहूर्त कहाँ से देखें?

दिवाली 2026 के सटीक पूजा मुहूर्त समय के लिए अपने क्षेत्र के प्रामाणिक पंचांग या निकटतम मंदिर की घोषणाओं की पुष्टि करें, क्योंकि समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

क्या मंत्र जप से केवल धन ही मिलता है?

नहीं, मंत्र जप का उद्देश्य केवल भौतिक धन नहीं, बल्कि मन की शांति, एकाग्रता और आंतरिक संतुलन भी है। श्रद्धा से किया गया जप समृद्धि के साथ शांति और सकारात्मकता का संचार करता है।