कार्तिक सोमवार 2026: तिथियाँ, शिव पूजा विधि और महत्व
कार्तिक मास 2026 के सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। जानिए कार्तिक सोमवार की तिथियाँ, पूजा विधि, व्रत नियम और क्षेत्रीय परंपराएँ।

कार्तिक मास 2026 के सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। जानिए कार्तिक सोमवार की तिथियाँ, पूजा विधि, व्रत नियम और क्षेत्रीय परंपराएँ।
संक्षिप्त उत्तर: अमांत (दक्षिण भारतीय) पंचांग के अनुसार कार्तिक मास 2026 में 10 नवंबर से 8 दिसंबर के बीच पड़ने वाले सोमवार — 16, 23 और 30 नवंबर तथा 7 दिसंबर 2026 — कार्तिक सोमवार के रूप में भगवान शिव की पूजा और व्रत के लिए मनाए जाते हैं।
कार्तिक मास हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है, और इस मास के प्रत्येक सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इन्हीं सोमवारों को कार्तिक सोमवार (या कार्तिक सोमवारम) कहा जाता है। परंपरा के अनुसार सोमवार भगवान शिव का दिन है, और कार्तिक मास में इस दिन की गई शिव आराधना को भक्तजन अत्यंत फलदायी मानते आए हैं। दक्षिण भारत — विशेषकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक — में कार्तिक सोमवारम व्रत की परंपरा बहुत प्रचलित है, जहाँ शिव मंदिरों में विशेष अभिषेक और दीपदान होते हैं।
कार्तिक सोमवार 2026 की तिथियाँ (Quick Facts)
- पर्वकार्तिक सोमवार / कार्तिक सोमवारम 2026
- समर्पितभगवान शिव
- कार्तिक मास (अमांत)10 नवंबर से 8 दिसंबर 2026
- कार्तिक मास (पूर्णिमांत)26 अक्टूबर से 24 नवंबर 2026 [VERIFY]
- मुख्य क्षेत्रआंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक तथा अन्य राज्य
- मुख्य अनुष्ठानशिव अभिषेक, व्रत, दीपदान, बिल्वपत्र अर्पण
नीचे दी गई तालिका अमांत (दक्षिण भारतीय) पंचांग के अनुसार कार्तिक मास 2026 में पड़ने वाले सोमवारों को दर्शाती है। अंतिम सोमवार मास की समाप्ति तिथि के निकट पड़ता है, इसलिए उसे अपने परिवार तथा स्थानीय मंदिर के पंचांग से अवश्य मिला लें।
| सोमवार | तिथि 2026 | टिप्पणी |
|---|---|---|
| पहला कार्तिक सोमवार | 16 नवंबर | मास आरंभ के बाद पहला सोमवार |
| दूसरा कार्तिक सोमवार | 23 नवंबर | — |
| तीसरा कार्तिक सोमवार | 30 नवंबर | — |
| चौथा कार्तिक सोमवार | 7 दिसंबर [VERIFY] | मास समाप्ति के निकट; तिथि गणना क्षेत्र अनुसार बदल सकती है |
अमांत और पूर्णिमांत पंचांग का अंतर
भारत में कार्तिक मास की गणना दो प्रकार से होती है। अमांत पद्धति (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात आदि) में मास अमावस्या के बाद आरंभ होता है, जिसके अनुसार कार्तिक मास 2026 लगभग 10 नवंबर से 8 दिसंबर तक रहता है। पूर्णिमांत पद्धति (उत्तर भारत के अनेक राज्य) में मास पूर्णिमा के बाद आरंभ होता है, जिसके अनुसार कार्तिक मास 2026 लगभग 26 अक्टूबर से 24 नवंबर तक माना जाता है [VERIFY]।
दोनों गणनाएँ अपनी-अपनी परंपरा में प्रामाणिक हैं और किसी एक को सही या ग़लत नहीं कहा जा सकता। इसीलिए एक ही सोमवार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्तिक सोमवार के रूप में गिना जा सकता है। अपने कार्तिक सोमवार की सही तिथि के लिए सदैव अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मंदिर के पंचांग का पालन करें।
कार्तिक सोमवार पूजा विधि
कार्तिक सोमवार की पूजा घर के पूजाघर तथा शिव मंदिर दोनों में की जाती है। नीचे एक पारंपरिक क्रम दिया गया है, जिसे भक्तजन अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाते हैं। यह पूजा घर और शिव मंदिर दोनों में समान श्रद्धा से की जाती है।
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव पूजा का संकल्प लें।
- शिवलिंग या शिव प्रतिमा को जल, दूध, दही, शहद, घी आदि से अभिषेक करें (पंचामृत अभिषेक)।
- बिल्वपत्र, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।
- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
- शिव चालीसा अथवा शिव आरती का पाठ करें और नैवेद्य अर्पित करें।
- संध्या समय दीपदान करें — मंदिर, तुलसी या नदी तट पर दीप जलाना कार्तिक मास की विशेष परंपरा है।
- पूजा के अंत में क्षमा-प्रार्थना कर प्रसाद ग्रहण करें और वितरित करें।
व्रत और उपवास के नियम
कार्तिक सोमवार व्रत में भक्त प्रायः दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद या शिव पूजा के पश्चात एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। कुछ लोग पूर्ण निराहार व्रत रखते हैं, तो कुछ फलाहार करते हैं। व्रत का स्वरूप परिवार और परंपरा के अनुसार भिन्न होता है।
- उपवास का प्रकार अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही चुनें।
- व्रत के दौरान सात्विक आहार, संयम और शिव नाम स्मरण पर बल दिया जाता है।
- जो लोग किसी रोग से ग्रस्त हों, गर्भवती हों, अथवा किसी चिकित्सकीय स्थिति में हों, वे व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें।
दीपदान का महत्व
कार्तिक मास में दीपदान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। कार्तिक सोमवार की संध्या पर शिव मंदिरों, तुलसी के समक्ष तथा नदी-तट पर दीप प्रज्वलित करने की परंपरा है। भक्तजन इसे अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक मानते हैं। दीप जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें और सार्वजनिक स्थानों पर स्थानीय नियमों का पालन करें।
कौन और कैसे मनाता है
कार्तिक सोमवार व्रत को स्त्री-पुरुष, विवाहित-अविवाहित सभी श्रद्धालु रख सकते हैं। परंपरा में कहीं इसे मुख्यतः स्त्रियों का व्रत माना जाता है, तो कहीं परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसे मनाते हैं; आधुनिक व्यवहार में यह व्रत व्यक्तिगत श्रद्धा और सुविधा पर निर्भर करता है। यहाँ किसी को व्रत रखने या न रखने के लिए बाध्य नहीं किया जाता — पात्रता और विधि के विषय में सर्वोत्तम मार्गदर्शन आपके परिवार की परंपरा तथा स्थानीय मंदिर के पुरोहित ही दे सकते हैं। श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही व्रत का स्वरूप चुनें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
- आंध्र प्रदेश व तेलंगाना: शिव मंदिरों में विशेष अभिषेक, कार्तिक दीपोत्सव और नदी तट पर दीपदान की परंपरा प्रमुख है।
- कर्नाटक: कार्तिक सोमवार को शिव आराधना के साथ दीप जलाने और मंदिर दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
- उत्तर भारत: कार्तिक मास में शिव के साथ-साथ विष्णु भक्ति, तुलसी पूजा और दीपदान की परंपरा प्रचलित है।
- तमिल परंपरा (कार्त्तिगै): इस मास में दीपों की सज्जा और मुरुगन तथा शिव की आराधना का विशेष स्थान है।
कार्तिक सोमवार का आध्यात्मिक महत्व
परंपरा में कार्तिक मास को भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि का काल माना गया है। सोमवार का संबंध चंद्र और भगवान शिव से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन की गई शिव आराधना को श्रद्धालु मन की शांति और आस्था की दृढ़ता का मार्ग मानते हैं। ये मान्यताएँ परंपरा के रूप में प्रस्तुत हैं और इन्हें किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं समझना चाहिए। कार्तिक सोमवार का सार बाहरी अनुष्ठान से अधिक भीतर के भाव, संयम और श्रद्धा में निहित माना जाता है; अपने परिवार और मंदिर की परंपरा के अनुसार इस पवित्र मास के सोमवारों को श्रद्धाभाव से मनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिक सोमवार 2026 कब-कब हैं?
अमांत (दक्षिण भारतीय) पंचांग के अनुसार कार्तिक मास 2026 में सोमवार 16, 23 और 30 नवंबर तथा 7 दिसंबर [VERIFY] को पड़ते हैं। सही तिथि के लिए अपने स्थानीय मंदिर के पंचांग से मिलान करें।
कार्तिक मास 2026 कब से कब तक है?
अमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास 2026 लगभग 10 नवंबर से 8 दिसंबर तक रहता है, जबकि पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार यह लगभग 26 अक्टूबर से 24 नवंबर तक माना जाता है [VERIFY]। दोनों गणनाएँ अपनी परंपरा में प्रामाणिक हैं।
कार्तिक सोमवार किस देवता को समर्पित है?
कार्तिक सोमवार भगवान शिव को समर्पित है। सोमवार को शिव का दिन माना जाता है, और कार्तिक मास में इस दिन शिव अभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण और दीपदान की परंपरा है।
कार्तिक सोमवार व्रत की पूजा विधि क्या है?
प्रातः स्नान कर संकल्प लें, शिवलिंग का पंचामृत अभिषेक करें, बिल्वपत्र और पुष्प अर्पित करें, 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें, शिव आरती करें और संध्या को दीपदान करें। अंत में प्रसाद ग्रहण और वितरण करें।
कार्तिक सोमवार व्रत कौन रख सकता है?
परंपरा और आधुनिक व्यवहार में स्त्री-पुरुष, विवाहित-अविवाहित सभी श्रद्धालु यह व्रत रख सकते हैं। पात्रता और विधि के विषय में सर्वोत्तम मार्गदर्शन अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मंदिर के पुरोहित से लें।
क्या उपवास में कोई सावधानी आवश्यक है?
हाँ। व्रत का स्वरूप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार चुनें। यदि आप किसी रोग से ग्रस्त हैं, गर्भवती हैं या किसी चिकित्सकीय स्थिति में हैं, तो व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।
कार्तिक सोमवार पर दीपदान क्यों करते हैं?
कार्तिक मास में दीपदान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। संध्या पर मंदिर, तुलसी और नदी तट पर दीप जलाना अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है। दीप जलाते समय अग्नि सुरक्षा और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।
अमांत और पूर्णिमांत में कौन-सा पंचांग मानें?
दोनों पद्धतियाँ अपनी-अपनी परंपरा में प्रामाणिक हैं और किसी एक को सही या ग़लत नहीं कहा जा सकता। आप जिस क्षेत्र या परंपरा से जुड़े हैं, उसी के अनुसार अपने परिवार और स्थानीय मंदिर के पंचांग का पालन करें।

