संक्षिप्त उत्तर: सिख दिवाली 2026 को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं। यह छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई का स्मरण कराता है, जब उन्होंने अपने साथ बंदी 52 राजाओं को भी मुक्त कराया। मुख्य दिवाली रविवार 8 नवंबर 2026 को है।

जहाँ करोड़ों लोग भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाकर दिवाली मनाते हैं, वहीं सिख समुदाय इसी अवसर को एक गहरे और भिन्न कारण से समान श्रद्धा के साथ मनाता है। सिखों के लिए यह पर्व 'बंदी छोड़ दिवस' अर्थात् 'मुक्ति का पर्व' है।

दिवाली 2026 में मुख्य दिवाली एवं बंदी छोड़ दिवस रविवार 8 नवंबर 2026 को है। यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई का स्मरण कराता है, जब उन्होंने अपने साथ कैद 52 राजाओं को भी स्वतंत्रता दिलाई।

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बंदी छोड़ दिवस का अर्थ और महत्व

'बंदी छोड़' का शाब्दिक अर्थ है 'बंदियों को मुक्त करने वाला'। सिख इतिहास में यह उपाधि गुरु हरगोबिंद साहिब जी से जुड़ी है, जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर अपनी स्वतंत्रता के साथ-साथ दूसरों की स्वतंत्रता को भी सर्वोपरि माना। यह पर्व धर्म, न्याय और मानवीय करुणा का प्रतीक है।

ऐतिहासिक कथा: ग्वालियर किले से रिहाई

इतिहास के अनुसार, मुगल बादशाह जहाँगीर ने गुरु हरगोबिंद साहिब जी को ग्वालियर किले में बंदी बनाया था। बाद में जब उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया, तो गुरु जी ने अकेले जाने से इनकार कर दिया और उन 52 राजाओं की भी रिहाई की शर्त रखी जो उसी किले में बंदी थे।

कहा जाता है कि गुरु जी के लिए एक विशेष 52 कलियों वाला चोगा बनवाया गया, ताकि किले से बाहर निकलते समय प्रत्येक राजा उसका एक-एक छोर पकड़कर मुक्त हो सके। इसी कारण उन्हें 'बंदी छोड़ दाता' कहा गया। जब गुरु जी अमृतसर लौटे, तो संगत ने घी के दीये जलाकर, स्वर्ण मंदिर को रोशन कर उनका स्वागत किया।

दिवाली 2026 की प्रमुख तिथियाँ

पर्वदिन और तिथि
धनतेरसशुक्रवार 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवालीशनिवार 7 नवंबर 2026
दिवाली / लक्ष्मी पूजा / बंदी छोड़ दिवसरविवार 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार 10 नवंबर 2026

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में उत्सव

बंदी छोड़ दिवस का केंद्र अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) है। इस दिन पूरे परिसर को हजारों दीयों और रोशनी से सजाया जाता है, और सरोवर में उनकी झिलमिलाहट का प्रतिबिंब एक अलौकिक दृश्य रचता है। संगत दूर-दूर से यहाँ शीश झुकाने पहुँचती है।

यदि आप 2026 में स्वर्ण मंदिर या किसी गुरुद्वारे में दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो कीर्तन, आतिशबाजी और लंगर के सटीक समय के लिए स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन की आधिकारिक घोषणाओं की जाँच अवश्य कर लें।

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बंदी छोड़ दिवस कैसे मनाया जाता है

  • गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और कथा का आयोजन
  • घरों और गुरुद्वारों को दीयों तथा रोशनी से सजाना
  • गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष श्रद्धा-नमन और सुखमनी साहिब का पाठ
  • सभी के लिए लंगर (सामुदायिक भोज) की सेवा
  • स्वर्ण मंदिर सहित प्रमुख गुरुद्वारों में आतिशबाजी और दीपमाला
  • सेवा, दान और जरूरतमंदों की सहायता के माध्यम से मुक्ति के संदेश का पालन

बंदी छोड़ दिवस पर घर में सरल आयोजन

  1. सूर्यास्त से पूर्व घर और द्वार की सफाई कर उसे सजाएँ।
  2. दीये या मोमबत्तियाँ जलाकर घर को रोशन करें।
  3. परिवार सहित गुरुद्वारे जाकर मत्था टेकें और कीर्तन में सम्मिलित हों।
  4. गुरु ग्रंथ साहिब जी से पाठ या सुखमनी साहिब का श्रवण करें।
  5. लंगर या भोजन-सेवा में भाग लें और प्रसाद ग्रहण करें।
  6. किसी जरूरतमंद की सहायता कर 'बंदी छोड़' के संदेश को साकार करें।

प्रार्थना और स्मरण

इस दिन संगत अरदास और 'वाहेगुरु' के सिमरन में लीन रहती है। कई श्रद्धालु सुखमनी साहिब का पाठ करते हैं और गुरु हरगोबिंद साहिब जी के उस आदर्श का स्मरण करते हैं जिसमें अपनी नहीं, बल्कि सबकी मुक्ति को महत्व दिया गया। लंबे स्तोत्रों को दोहराने के बजाय श्रद्धालु सामूहिक कीर्तन और सेवा पर बल देते हैं।

एक ही दिन, दो पावन संदेश

दिवाली और बंदी छोड़ दिवस दोनों ही अंधकार पर प्रकाश और अन्याय पर न्याय की विजय का उत्सव हैं। एक ओर श्रीराम का अयोध्या-आगमन है, तो दूसरी ओर गुरु हरगोबिंद साहिब जी की वह उदारता, जिसने बंदियों को स्वतंत्रता दिलाई। दोनों ही परंपराएँ करुणा, धर्म और आशा का साझा संदेश देती हैं।

  • मुख्य तिथिरविवार 8 नवंबर 2026
  • पर्वबंदी छोड़ दिवस / दिवाली
  • प्रमुख स्थलश्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर
  • स्मरणगुरु हरगोबिंद साहिब जी और 52 राजाओं की मुक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिख दिवाली 2026 को क्यों मनाते हैं?

सिख दिवाली 2026 को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं। यह छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई का स्मरण कराता है, जब उन्होंने अपने साथ 52 बंदी राजाओं को भी मुक्त कराया।

बंदी छोड़ दिवस 2026 कब है?

बंदी छोड़ दिवस 2026 मुख्य दिवाली के दिन, रविवार 8 नवंबर 2026 को है। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि यह रविवार को पड़ रहा है।

बंदी छोड़ दिवस का अर्थ क्या है?

'बंदी छोड़' का अर्थ है 'बंदियों को मुक्त करने वाला'। यह गुरु हरगोबिंद साहिब जी की उस उदारता का प्रतीक है जिसमें उन्होंने अपनी रिहाई के साथ दूसरों की स्वतंत्रता को भी सर्वोपरि माना।

गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने 52 राजाओं को कैसे मुक्त कराया?

मान्यता है कि गुरु जी के लिए 52 कलियों वाला विशेष चोगा बनवाया गया। किले से बाहर निकलते समय प्रत्येक राजा ने उसका एक छोर पकड़ा और इस प्रकार सभी 52 राजा गुरु जी के साथ मुक्त हो गए।

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बंदी छोड़ दिवस का मुख्य आयोजन कहाँ होता है?

इसका मुख्य केंद्र अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) है, जहाँ हजारों दीयों, रोशनी और आतिशबाजी से पूरे परिसर को सजाया जाता है और संगत बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुँचती है।

क्या दिवाली और बंदी छोड़ दिवस एक ही दिन हैं?

हाँ, दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाते हैं। हिंदू परंपरा में यह दिवाली है, जबकि सिख परंपरा में यही दिन बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बंदी छोड़ दिवस पर सिख क्या करते हैं?

सिख गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और कथा में भाग लेते हैं, घरों तथा गुरुद्वारों को दीयों से सजाते हैं, लंगर की सेवा करते हैं, और सेवा व दान के माध्यम से मुक्ति के संदेश का पालन करते हैं।

2026 में गुरुद्वारे के आयोजन का समय कैसे जानें?

कीर्तन, आतिशबाजी और लंगर के सटीक समय स्थान-अनुसार भिन्न होते हैं। 2026 के आयोजनों के लिए अपने स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन या सामुदायिक संस्था की आधिकारिक घोषणाओं की जाँच करें।