संक्षिप्त उत्तर: गोवर्धन पूजा 2026 में सोमवार 9 नवंबर को दिवाली के अगले दिन मनाई जाएगी। इस दिन श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावनवासियों की रक्षा की कथा का स्मरण किया जाता है और अन्नकूट अर्पित कर पूजा की जाती है।

गोवर्धन पूजा सनातन धर्म के सबसे मार्मिक पर्वों में से एक है, जो श्रीकृष्ण के दिव्य संरक्षण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व सोमवार 9 नवंबर को, दिवाली के ठीक अगले दिन मनाया जाएगा। इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

गोवर्धन पूजा 2026 की तिथि और दिवाली पर्व क्रम

गोवर्धन पूजा दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का चौथा दिन है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है। नीचे 2026 के पूरे दिवाली पर्व-क्रम की तालिका दी गई है ताकि आप सभी तिथियों को एक साथ देख सकें।

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पर्वदिन और तिथि 2026
धनतेरसशुक्रवार 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवालीशनिवार 7 नवंबर 2026
दिवाली / लक्ष्मी पूजारविवार 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार 10 नवंबर 2026

श्रीकृष्ण के दिव्य संरक्षण की पावन कथा

प्राचीन काल में वृंदावन के गोप-गोपियाँ प्रतिवर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे, इस विश्वास के साथ कि वर्षा और समृद्धि इंद्र की कृपा से मिलती है। बाल-कृष्ण ने ग्रामवासियों को समझाया कि उनकी वास्तविक जीविका तो गोवर्धन पर्वत से है, जो उनके पशुओं को घास, जल और आश्रय देता है। कृष्ण ने उन्हें इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत और गौओं की पूजा करने की प्रेरणा दी।

इससे क्रोधित होकर इंद्र ने वृंदावन पर प्रलयंकारी मूसलाधार वर्षा कर दी। तब सात वर्ष की आयु के श्रीकृष्ण ने अपनी बायीं हाथ की कनिष्ठा अंगुली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को छत्र की भाँति उठा लिया। सात दिनों तक समस्त वृंदावनवासी, गौएँ और पशु उस पर्वत के नीचे सुरक्षित रहे। अंततः इंद्र का अभिमान टूटा और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमायाचना की।

यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा संरक्षण ईश्वर से मिलता है, और प्रकृति तथा गौ-माता के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची भक्ति है। इसी दिव्य लीला के स्मरण में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है।

अन्नकूट का महत्व

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन भक्त छप्पन भोग सहित अनेक प्रकार के व्यंजन बनाकर श्रीकृष्ण को अर्पित करते हैं और उन्हें पर्वत के आकार में सजाते हैं। यह प्रकृति की उदारता और भोजन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।

गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक संदेश

  • प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना
  • गौ-माता तथा पशुधन की सेवा और पूजा का महत्व
  • अहंकार पर विनम्रता और भक्ति की विजय
  • ईश्वर पर पूर्ण श्रद्धा और शरणागति का भाव
  • अन्न और भोजन के प्रति कृतज्ञता

गोवर्धन पूजा की विधि

परंपरागत रूप से भक्त प्रातःकाल स्नान कर आँगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाते हैं, उसे फूलों से सजाते हैं और गौओं, ग्वालों तथा वृक्षों के प्रतीक रखते हैं। इसके बाद पूजा-अर्चना और परिक्रमा की जाती है। सटीक शुभ मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की घोषणा देखें।

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  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल तैयार करें।
  2. गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पुष्प, दीप और अक्षत से सजाएँ।
  3. अन्नकूट अर्थात विविध व्यंजनों का भोग श्रीकृष्ण को अर्पित करें।
  4. धूप-दीप, फूल और नैवेद्य से गोवर्धन तथा गौ-माता की पूजा करें।
  5. पर्वत की परिक्रमा करते हुए श्रीकृष्ण के नामों का जप और भजन करें।

पूजा में प्रयुक्त मंत्र और स्मरण

इस दिन भक्त सामान्यतः 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे प्रसिद्ध द्वादशाक्षर मंत्र और 'गोवर्धन धारी की जय' का उद्घोष करते हैं। श्रीकृष्ण के नामों का सरल जप और गोवर्धन लीला से जुड़े भजन गाना ही इस पर्व की भक्ति का सार है।

गोवर्धन पूजा 2026 के लिए त्वरित जानकारी

  • पर्व का नामगोवर्धन पूजा / अन्नकूट
  • तिथि 2026सोमवार 9 नवंबर 2026
  • हिंदू तिथिकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
  • मुख्य देवताभगवान श्रीकृष्ण
  • प्रमुख अनुष्ठानअन्नकूट भोग और गोवर्धन परिक्रमा

गोवर्धन पूजा हमें यह स्मरण कराती है कि भक्ति, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति प्रेम ही जीवन के सच्चे आधार हैं। श्रीकृष्ण का दिव्य संरक्षण आज भी प्रत्येक भक्त के हृदय में विश्वास की ज्योति जलाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?

गोवर्धन पूजा 2026 में सोमवार 9 नवंबर को मनाई जाएगी, जो दिवाली के ठीक अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को पड़ती है।

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावनवासियों को इंद्र की प्रलयंकारी वर्षा से बचाने की दिव्य लीला के स्मरण में मनाया जाता है।

अन्नकूट का क्या अर्थ है?

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन अनेक प्रकार के व्यंजन बनाकर श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं और उन्हें पर्वत के आकार में सजाया जाता है।

श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत क्यों उठाया?

जब इंद्र ने कुपित होकर वृंदावन पर भीषण वर्षा की, तब श्रीकृष्ण ने पर्वत को छत्र की तरह उठाकर सात दिनों तक समस्त ग्रामवासियों और गौओं की रक्षा की।

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गोवर्धन पूजा किस देवता की पूजा है?

गोवर्धन पूजा में मुख्यतः भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ-माता की पूजा की जाती है, जो प्रकृति और ईश्वरीय संरक्षण के प्रतीक हैं।

गोवर्धन पूजा की विधि क्या है?

भक्त गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसे सजाते हैं, अन्नकूट भोग अर्पित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और परिक्रमा करते हैं।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है?

शुभ मुहूर्त स्थान के अनुसार भिन्न होता है, इसलिए 2026 के सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या नज़दीकी मंदिर की घोषणा अवश्य देखें।

गोवर्धन पूजा से क्या शिक्षा मिलती है?

यह पर्व प्रकृति और गौ-माता के प्रति कृतज्ञता, अहंकार पर विनम्रता की विजय और ईश्वर पर पूर्ण श्रद्धा तथा शरणागति की शिक्षा देता है।