गणेश आराधना में दो प्रमुख चतुर्थी व्रत: संकष्टी चतुर्थी (प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष) व विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष; भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी = गणेश चतुर्थी)। जुलाई 2026 जैसे हर माह ये तिथियाँ आती हैं — सटीक तिथियों हेतु पंचांग देखें।

संकष्टी चतुर्थी

प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष चतुर्थी का यह व्रत संकटों को हरने वाला कहलाता है। भक्त दिन में उपवास रखकर संध्या में चंद्रोदय देखकर गणेश को अर्घ्य देकर पारण करते हैं। मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारकी संकष्टी — और भी विशेष है।

विनायक चतुर्थी

शुक्ल पक्ष चतुर्थी विनायक चतुर्थी है; इनमें भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) सर्वाधिक प्रमुख — गणेश के जन्मदिवस रूप में मनाई जाती है। शेष माहों की शुक्ल चतुर्थी भी गणेश पूजा हेतु शुभ।

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व्रत विधि

  1. प्रातः स्नान, गणेश पूजा संकल्प; संभव हो तो उपवास।
  2. गणेश को 21 दूर्वा, मोदक/लड्डू, पुष्प अर्पण।
  3. संकष्टी हो तो संध्या में चंद्रोदय देखकर अर्घ्य देकर पारण।
  4. "ॐ गं गणपतये नमः" व वक्रतुण्ड श्लोक जप।

मंत्र

गणेश: ॐ गं गणपतये नमः।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संकष्टी चतुर्थी क्या है?

प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष चतुर्थी को गणेश के लिए किया जाने वाला व्रत; संकटों को हरने वाला व्रत, चंद्रोदय तक उपवास रखा जाता है।

विनायक चतुर्थी से अंतर क्या है?

विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी = गणेश चतुर्थी प्रमुख); संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष में, चंद्रोदय पूजा सहित।

अंगारकी संकष्टी क्या है?

मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी — अंगारकी संकष्टी — अधिक पुण्यदायी मानी जाती है।

कैसे करें?

दिन में उपवास, गणेश पूजा, संध्या में चंद्रोदय देखकर अर्घ्य देकर पारण; "ॐ गं गणपतये नमः" जप।

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मुख्य बिंदु

  • संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष, चंद्रोदय पूजा; अंगारकी संकष्टी विशेष।
  • विनायक चतुर्थी: शुक्ल पक्ष; भाद्रपद चतुर्थी प्रमुख।
  • 21 दूर्वा, मोदक; ॐ गं गणपतये नमः।

देखें: गणेश चतुर्थी 2026विनायक व्रत कथा व पूजा विधि