भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को की जाने वाली आराधना में मिट्टी से बने विनायक (पार्थिव गणपति) की पूजा ही श्रेष्ठ है, ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं। कल्प में यद्यपि अपनी शक्ति के अनुसार स्वर्ण, रजत, ताम्र आदि धातुओं की प्रतिमा बनाने की अनुमति है, फिर भी सबसे प्रधान मिट्टी की प्रतिमा की पूजा ही मानी गई है।

पार्थिव (मिट्टी) आराधना क्यों श्रेष्ठ है?

  • हम पृथ्वी तत्त्व के जीव हैं — मनुष्य मुख्यतः पृथ्वी तत्त्व से जुड़ा है। उस मृत्तिका तत्त्व और प्रकृति की आराधना सनातन धर्म में प्रधान है।
  • शिव की आराधना का मार्ग — शास्त्रों में महादेव के लिए भी पार्थिव लिंगार्चन (मिट्टी के लिंग की पूजा) का वर्णन है; इसीलिए इस पार्थिव रूप में स्वामी की आराधना विशेष है।
  • मूलाधार तत्त्व के अधिपति — श्री महा गणपति मूलाधार चक्र के अधिपति हैं, और वही मूलाधार पृथ्वी तत्त्व का स्थान है। इसलिए पृथ्वी स्वरूप मिट्टी के विनायक की आराधना समस्त श्रेय प्रदान करती है।

मिट्टी प्रकृति का प्रतीक है — और पर्यावरण के लिए हितकर भी। इस विनायक चतुर्थी पर मिट्टी के गणेश की पूजा करें, प्रकृति की रक्षा करें। ॐ गं गणपतये नमः।